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प्रधानमंत्री ने भारत के युवाओं के प्रयास और समर्पण की सराहना करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री ने भारत के युवाओं के प्रयास और समर्पण की सराहना करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के युवाओं के प्रयासों और समर्पण की सराहना करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है: "न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते । तत्स्वयं योगसंसिद्ध: कालेनात्मनि विन्दति ॥" श्री मोदी ने कहा है कि निरंतर प्रयास और समर्पण से हमारी प्रतिभा निखरती है और उसमें सुधार होता है, और हमारे युवा इन्हीं गुणों को अपनाकर भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने एक्स पर किए गए पोस्ट में लिखा है: निरंतर प्रयास और साधना से हमारी प्रतिभा और निखरती है। आज हमारे युवा इन्हीं गुणों को आत्मसात कर दुनियाभर में देश…
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प्रधानमंत्री ने साहस और धैर्य के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री ने साहस और धैर्य के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भाग्य के प्रतिकूल होने पर भी कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए क्योंकि धैर्य और दृढ़ता से खोई हुई स्थिति को फिर से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक कुशल नाविक समुद्र के बीच में जहाज टूटने पर भी उम्मीद नहीं छोड़ता बल्कि तैरकर जीवित रहने का प्रयास जारी रखता है, उसी प्रकार दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से विपत्ति पर विजय प्राप्त की जा सकती है। प्रधानमंत्री ने संस्कृत में एक सुभाषितम् साझा किया- “त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि दैवे धैर्यात्कदाचित्स्थितिमाप्नुयात्सः। याते समुद्रेऽपि च पोतभङ्गे सांयात्रिको…
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प्रकृति संरक्षण का संदेश: PM मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्

प्रकृति संरक्षण का संदेश: PM मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि प्रकृति, पर्यावरण और संपूर्ण सृष्टि के प्रति सम्मान हमारे अस्तित्व का मूल आधार है। उन्होंने सभी से स्वस्थ, समृद्ध और मजबूत राष्ट्र के निर्माण में कृतज्ञता और निस्वार्थ सेवा की भावना के साथ भाग लेने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने एक संस्‍कृत सुभाषितम् साझ किया “शं नो द्यावापृथिवी पूर्वहूतौ शमन्तरिक्षं दृशये नो अस्तु। शं न ओषधीर्वनिनो भवन्तु शं नो रजसस्पतिरस्तु जिष्णुः॥” सुभाषितम् में कहा गया है कि सृष्टि के आरंभ से ही पूजनीय द्युलोक और पृथ्वी हमारे लिए सदा श्रद्धेय रहे हैं। ईश्‍वर करे, पृथ्वी और सूर्य के बीच का मध्यवर्ती…
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PM मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, शुभ विचार, वाणी और कर्म का दिया संदेश

PM मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, शुभ विचार, वाणी और कर्म का दिया संदेश

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें इस बात पर बल दिया गया कि विचार, वाणी और कर्म में निरंतर अभ्यास किस प्रकार व्यक्ति के चरित्र और जीवन की दिशा को आकार देता है। प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी एक पोस्ट में लिखा: "कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते। तदेवापहरत्येनं तस्मात् कल्याणमाचरेत्॥" मनुष्य अपने कर्मों, विचारों और वाणी के माध्यम से निरंतर जिसका अभ्यास करता है, अंततः वही उसके व्यक्तित्व को आकार देता है और उसे उसी दिशा में ले जाता है, इसलिए, व्यक्ति को अपने विचारों और संवाद में सदैव केवल कल्याणकारी विषयों…
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प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं के साहस और दृढ़ता को सराहा, साझा किया संस्कृत सुभाषितम्

प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं के साहस और दृढ़ता को सराहा, साझा किया संस्कृत सुभाषितम्

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारत के युवाओं के साहस और दृढ़ता की सराहना करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। "प्राप्यापदं न व्यथते कदाचिदुद्योगमन्विच्छति चाप्रमत्तः। दुःखं च काले सहते महात्मा धुरन्धरस्तस्य जिताः सपत्नाः॥" श्री मोदी ने कहा कि हमारे युवा अपने साहस, आत्मविश्वास और अथक परिश्रम के बल पर ऐतिहासिक सफलता प्राप्त कर रहे हैं, और यही तेजी से विकासशील भारत की सबसे बड़ी ताकत है। प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्ट किया: आज हमारे युवा साथी धैर्य, आत्मविश्वास और अथक परिश्रम से ऐतिहासिक सफलता हासिल कर रहे हैं। यही विकसित हो रहे भारत की सबसे बड़ी…
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प्रधानमंत्री ने निःस्वार्थ सेवा की भावना को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री ने निःस्वार्थ सेवा की भावना को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि निस्वार्थ सेवा मानवता की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि सेवा और समर्पण की इसी भावना के साथ देश प्रत्येक नागरिक के जीवन को बेहतर बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया- “हितं यत्सर्वभूतानामात्मानश्च सुखावहम्। तत्कुर्यादीश्वरे ह्येतन्मूलं सर्वार्थसिद्धये।।” यह सुभाषितम् यह संदेश देता है कि मनुष्य को केवल वही कार्य करने चाहिए जो सभी प्राणियों के लिए हितकारी हो और आत्मा के लिए शांति देने वाला हो। यही ईश्वर के प्रति वास्तविक समर्पण भी है, क्योंकि यही मार्ग समस्त…
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प्रधानमंत्री ने साहस और सुदृढ़ता की शक्ति का महत्व बताते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री ने साहस और सुदृढ़ता की शक्ति का महत्व बताते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि साहस किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि साहस देश को कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए भी एकजुट रहने और प्रगति, समृद्धि तथा आत्मनिर्भरता की ओर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री ने संस्कृत में सुभाषितम् साझा किया। “चलन्ति गिरयः कामं युगान्तपवनाहताः। कृच्छ्रेऽपि न चलत्येव धीराणां निश्चलं मनः।। ” यह सुभाषितम बताता है कि प्रलय के समय तूफानी हवाओं से घिरे पहाड़ भी कांप उठते हैं और गतिमान हो जाते हैं, फिर भी सबसे गंभीर परीक्षाओं के बीच भी दृढ़ व्यक्ति का मन…
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प्रधानमंत्री ने विश्व की विविध संस्कृतियों के सम्मान के महत्‍व को दर्शाते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री ने विश्व की विविध संस्कृतियों के सम्मान के महत्‍व को दर्शाते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया: “देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः। स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति॥" यह सुभाषितम दर्शाता है कि विश्व की विविध संस्कृतियों का सम्मान करने से लोगों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना बढ़ती है और आपसी समझ तथा भाईचारा मजबूत होता है। प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा: दुनिया की अलग-अलग संस्कृतियों का सम्मान करने से लोगों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना बढ़ती है। इससे आपसी समझ और भाईचारा और मजबूत होता है। देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः। स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति॥
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