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PM मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, शुभ विचार, वाणी और कर्म का दिया संदेश

PM मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, शुभ विचार, वाणी और कर्म का दिया संदेश

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें इस बात पर बल दिया गया कि विचार, वाणी और कर्म में निरंतर अभ्यास किस प्रकार व्यक्ति के चरित्र और जीवन की दिशा को आकार देता है। प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी एक पोस्ट में लिखा: "कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते। तदेवापहरत्येनं तस्मात् कल्याणमाचरेत्॥" मनुष्य अपने कर्मों, विचारों और वाणी के माध्यम से निरंतर जिसका अभ्यास करता है, अंततः वही उसके व्यक्तित्व को आकार देता है और उसे उसी दिशा में ले जाता है, इसलिए, व्यक्ति को अपने विचारों और संवाद में सदैव केवल कल्याणकारी विषयों…
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प्रधानमंत्री ने पारस्परिक निर्भरता के महत्व का उल्लेख करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री ने पारस्परिक निर्भरता के महत्व का उल्लेख करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने यह संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है- “प्रभया हि विना यद्वद् भानुरेष न विद्यते। प्रभा च भानुना तेन सुतरां तदुपाश्रया॥” इस सुभाषितम् में बताया गया है कि जैसे सूर्य को उसके प्रकाश के बिना नहीं महसूस किया जा सकता, वैसे ही सूर्य के बिना प्रकाश भी नहीं हो सकता। इस प्रकार, सूर्य और उसके प्रकाश का पूरा अस्तित्व और शक्ति पूरी तरह से एक-दूसरे पर निर्भर हैं। प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा है- प्रभया हि विना यद्वद् भानुरेष न विद्यते। प्रभा च भानुना तेन सुतरां तदुपाश्रया॥
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प्रधानमंत्री मोदी का संदेश: समावेशी विकास ही सशक्त राष्ट्र की नींव

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश: समावेशी विकास ही सशक्त राष्ट्र की नींव

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जब सर्वांगीण विकास हरेक नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित करता है, तो इससे देश की प्रगति को एक नई गति मिलती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसी प्रेरक भावना के साथ देश भारत की क्षमताओं को और अधिक मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-“कन्यानां सम्प्रदानञ्च कुमाराणाञ्च रक्षणम्।राष्ट्रस्य सङ्ग्रहे नित्यं विधानमिदमाचरेत्॥” यह सुभाषितम् संदेश देता है कि महिलाओं का कल्याण सुनिश्चित करना, युवा पीढ़ी की रक्षा और उनका पोषण करना, तथा राष्ट्र की…
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प्रधानमंत्री ने निस्वार्थ बलिदान की विरासत पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री ने निस्वार्थ बलिदान की विरासत पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया जिसमें यह दर्शाया गया है कि जो लोग दूसरों के कल्याण के लिए बलिदान देते हैं, वे अमरत्व प्राप्त करते हैं। “जयन्ति ते सुकृतिनो रससिद्धाः कवीश्वराः। नास्ति येषां यशःकाये जरामरणजं भयम्॥" श्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत की एकता, अखंडता और आत्मसम्मान के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। प्रधानमंत्री ने एक्‍स पोस्ट किया: भारतवर्ष की एकता, अखंडता और स्वाभिमान के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। जयन्ति ते सुकृतिनो रससिद्धाः…
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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् के माध्यम से नवाचार और उद्यमशीलता में विविधता के महत्व को रेखांकित किया

प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् के माध्यम से नवाचार और उद्यमशीलता में विविधता के महत्व को रेखांकित किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि नवाचार और उद्यमशीलता के क्षेत्र में प्रत्येक व्यक्ति के सोचने का तरीका अलग होता है तथा एक अद्वितीय रचनात्मक दृष्टि होती है और यही विविधता नई संभावनाओं को जन्म देती है। उन्होंने उल्लेख किया कि जिस प्रकार जल के प्रत्येक स्रोत का स्वाद अलग होता है, उसी प्रकार प्रत्येक प्रतिभा की अपनी विशिष्ट पहचान और योगदान होता है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि विविध विचारों और क्षमताओं के मिलन से ही नवाचार और प्रगति संभव हो पाती है। प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है, जो इस प्रकार है: “पिण्डे…
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