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पीएम मोदी का ज्ञान पर जोर, संस्कृत सुभाषितम् के जरिए बताया इसकी परिवर्तनकारी ताकत

पीएम मोदी का ज्ञान पर जोर, संस्कृत सुभाषितम् के जरिए बताया इसकी परिवर्तनकारी ताकत

नई दिल्ली (राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए बताया कि ज्ञान समाज के साथ सद्भाव में रहने की कला सिखाता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान बुद्धि और समृद्धि प्रदान करता है, हृदय को आनंद से भर देता है और व्यक्ति की गरिमा को बढ़ाता है। प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया- “उपदिशति लोकवृत्तं वितरति वित्तं विनोदयति चित्तम्।उत्तम्भयति महत्त्वं विद्या हृद्या सुराजसेवेव॥” यह सुभाषितम बताता है कि विद्या मनुष्य को लोक-व्यवहार की समझ देती है, ज्ञान और समृद्धि प्रदान करती है, उसके मन को आह्लादित करती है तथा महत्व को बढ़ाती है। इसलिए विद्या…
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पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, विवेकपूर्ण ज्ञान के महत्व पर दिया संदेश

पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, विवेकपूर्ण ज्ञान के महत्व पर दिया संदेश

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया। इस सुभाषितम् का तात्‍पर्य है कि एक बुद्धिमान और समझदार व्यक्ति को ज्ञान की हर शाखा से सार निकालना चाहिए, चाहे वह बड़ी हो या छोटी। उन्होंने हर स्रोत से मूल्यवान ज्ञान प्राप्त करने और उसे आत्मसात् करने के महत्व पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा किया- “अणुभ्यश्च महद्भ्यश्च शास्त्रेभ्यः कुशलो नरः। सर्वतः सारमादद्यात् पुष्पेभ्य इव षट्पदः॥” विवेकी और कुशल व्‍यक्ति को छोटे-बडे सभी शास्‍त्रों से, चाहे वे किसी भी विषय के हों, उपयोगी सारतत्‍व को ग्रहण करना चाहिए। जैसे भौंरा विभिन्‍न पुष्‍पों से केवल…
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प्रधानमंत्री ने आत्मसम्मान, साहस और दृढ़ता के महत्व को बताते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री ने आत्मसम्मान, साहस और दृढ़ता के महत्व को बताते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्म-सम्मान, साहस और सम्मान के साथ जीने के महत्व पर जोर डालते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। उन्होंने कहा कि सच्ची वीरता और ताकत किसी भी परिस्थिति में समझौता किए बिना अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर दृढ़ रहने में निहित है।प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया- “उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्। अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥” इस सुभाषितम् का यह संदेश है कि व्यक्ति को सदैव आत्म-सम्मान, साहस और सम्मान के साथ जीना चाहिए। सच्ची वीरता और ताकत इसमें है कि किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों और मूल्यों से…
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PM मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, शुभ विचार, वाणी और कर्म का दिया संदेश

PM मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, शुभ विचार, वाणी और कर्म का दिया संदेश

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें इस बात पर बल दिया गया कि विचार, वाणी और कर्म में निरंतर अभ्यास किस प्रकार व्यक्ति के चरित्र और जीवन की दिशा को आकार देता है। प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी एक पोस्ट में लिखा: "कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते। तदेवापहरत्येनं तस्मात् कल्याणमाचरेत्॥" मनुष्य अपने कर्मों, विचारों और वाणी के माध्यम से निरंतर जिसका अभ्यास करता है, अंततः वही उसके व्यक्तित्व को आकार देता है और उसे उसी दिशा में ले जाता है, इसलिए, व्यक्ति को अपने विचारों और संवाद में सदैव केवल कल्याणकारी विषयों…
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प्रधानमंत्री ने पारस्परिक निर्भरता के महत्व का उल्लेख करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री ने पारस्परिक निर्भरता के महत्व का उल्लेख करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने यह संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है- “प्रभया हि विना यद्वद् भानुरेष न विद्यते। प्रभा च भानुना तेन सुतरां तदुपाश्रया॥” इस सुभाषितम् में बताया गया है कि जैसे सूर्य को उसके प्रकाश के बिना नहीं महसूस किया जा सकता, वैसे ही सूर्य के बिना प्रकाश भी नहीं हो सकता। इस प्रकार, सूर्य और उसके प्रकाश का पूरा अस्तित्व और शक्ति पूरी तरह से एक-दूसरे पर निर्भर हैं। प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा है- प्रभया हि विना यद्वद् भानुरेष न विद्यते। प्रभा च भानुना तेन सुतरां तदुपाश्रया॥
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प्रधानमंत्री मोदी का संदेश: समावेशी विकास ही सशक्त राष्ट्र की नींव

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश: समावेशी विकास ही सशक्त राष्ट्र की नींव

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जब सर्वांगीण विकास हरेक नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित करता है, तो इससे देश की प्रगति को एक नई गति मिलती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसी प्रेरक भावना के साथ देश भारत की क्षमताओं को और अधिक मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-“कन्यानां सम्प्रदानञ्च कुमाराणाञ्च रक्षणम्।राष्ट्रस्य सङ्ग्रहे नित्यं विधानमिदमाचरेत्॥” यह सुभाषितम् संदेश देता है कि महिलाओं का कल्याण सुनिश्चित करना, युवा पीढ़ी की रक्षा और उनका पोषण करना, तथा राष्ट्र की…
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प्रधानमंत्री ने निस्वार्थ बलिदान की विरासत पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री ने निस्वार्थ बलिदान की विरासत पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया जिसमें यह दर्शाया गया है कि जो लोग दूसरों के कल्याण के लिए बलिदान देते हैं, वे अमरत्व प्राप्त करते हैं। “जयन्ति ते सुकृतिनो रससिद्धाः कवीश्वराः। नास्ति येषां यशःकाये जरामरणजं भयम्॥" श्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत की एकता, अखंडता और आत्मसम्मान के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। प्रधानमंत्री ने एक्‍स पोस्ट किया: भारतवर्ष की एकता, अखंडता और स्वाभिमान के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। जयन्ति ते सुकृतिनो रससिद्धाः…
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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् के माध्यम से नवाचार और उद्यमशीलता में विविधता के महत्व को रेखांकित किया

प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् के माध्यम से नवाचार और उद्यमशीलता में विविधता के महत्व को रेखांकित किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि नवाचार और उद्यमशीलता के क्षेत्र में प्रत्येक व्यक्ति के सोचने का तरीका अलग होता है तथा एक अद्वितीय रचनात्मक दृष्टि होती है और यही विविधता नई संभावनाओं को जन्म देती है। उन्होंने उल्लेख किया कि जिस प्रकार जल के प्रत्येक स्रोत का स्वाद अलग होता है, उसी प्रकार प्रत्येक प्रतिभा की अपनी विशिष्ट पहचान और योगदान होता है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि विविध विचारों और क्षमताओं के मिलन से ही नवाचार और प्रगति संभव हो पाती है। प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है, जो इस प्रकार है: “पिण्डे…
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