28
Oct
नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया, जिसमें सभी के कल्याण और समृद्धि के लिए प्रकृति की रक्षा और देखभाल के महत्व पर बल दिया गया है: पालयन् प्रकृतिं राजा सुखी भवति नान्यथा। प्रकृतिश्च हिता यस्य स राजा सर्वकामधुक्॥ इस श्लोक का अभिप्राय है कि जो राजा प्रकृति की रक्षा करता है और उसके कल्याण की दिशा में कार्य करते हुए उसकी प्रसन्नता और समृद्धि को सुनिश्चित करता है। इसके फलस्वरूप, प्रकृति उन व्यक्त्यिों की आशाओं को परिपूर्ण करती है जो उसकी रक्षा और देखभाल करते हैं। प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:…
