नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत का एक सुभाषितम साझा किया है, जिसमें सत्य, मधुर और हितकारी शब्दों के उच्चारण और समाज में शांति एवं सद्भाव का प्रचार-प्रसार करने के लिए वाणी में अनुशासन के अभ्यास के महत्व का उल्लेख किया गया है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;
“अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्।
स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्मयं तप उच्यते॥”
हमें सदैव सत्य, मधुर और हितकारी वाणी बोलनी चाहिए, जो किसी के मन में अशांति उत्पन्न न करे। पवित्र सद्ग्रंथों का निरंतर स्वाध्याय और चिंतन ही वाणी को वास्तविक सार्थकता प्रदान करता है। विचारपूर्वक बोली गई वाणी समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मकता का संचार करती है।
