लिपिंस्की की कोर्ट याचिका से सरे पुलिस प्रमुख की बर्खास्तगी पर उठे सवाल

Norm Lipinski

सरे, बी.सी. (ऋचा वालिया): ब्रिटिश कोलंबिया सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हालिया याचिका ने सरे पुलिस सर्विस के पूर्व चीफ कांस्टेबल नॉर्म लिपिंस्की की बर्खास्तगी की परिस्थितियों पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। इसके साथ ही ‘सरे फर्स्ट’ के काउंसिल उम्मीदवार बिलाल चीमा ने मेयर ब्रेंडा लॉक से अधिक पारदर्शिता बरतने की मांग की है।

लिपिंस्की ने अपनी बर्खास्तगी को अदालत में चुनौती दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस फैसले पर राजनीतिक दबाव का असर था और यह प्रक्रिया पुलिस अधिनियम (Police Act) तथा पुलिस बोर्ड संचालन के नियमों का पालन नहीं करती थी। ये आरोप फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और अदालत द्वारा अभी तक इन पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है।

सरे पुलिस बोर्ड के पूर्व सदस्य चीमा ने कहा कि ये आरोप चुने हुए प्रतिनिधियों और स्वतंत्र पुलिस प्रशासन के बीच के अलगाव (स्वायत्तता) पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

चीमा ने कहा, “याचिका में लगाए गए आरोपों पर खुले तौर पर जवाब दिया जाना चाहिए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि सरे के निवासियों को लिपिंस्की को हटाए जाने से जुड़े सभी प्रासंगिक तथ्यों की जानकारी होनी चाहिए।

यह विवाद मेयर लॉक और सरे पुलिस सर्विस के बीच पहले से चले आ रहे तनाव के बाद सामने आया है। सितंबर 2023 में, सरे पुलिस बोर्ड की अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए, लॉक ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे लिपिंस्की और बोर्ड पर अपना विश्वास खो चुकी हैं। हालांकि, इसके बाद पुलिस बोर्ड ने उनकी टिप्पणियों को खारिज करते हुए चीफ लिपिंस्की के प्रति अपना समर्थन जताया था।

लिपिंस्की की अदालत में दायर याचिका के अनुसार, लॉक ने कथित तौर पर अगस्त 2024 में सरे पुलिस सर्विस के एक सदस्य से कहा था कि चीफ को पद से हटाए जाने की जरूरत है।

इसके बाद अक्टूबर 2025 में स्थिति बदल गई, जब सरे पुलिस बोर्ड ने लिपिंस्की के अनुबंध को तीन साल के लिए बढ़ा दिया था। उस समय इस फैसले को उनके नेतृत्व में बोर्ड के भरोसे के प्रतीक के रूप में पेश किया गया था।

याचिका के मुताबिक, वर्ष 2026 में पुलिस बोर्ड की संरचना बदल दी गई, जिसके पांच नवनियुक्त सदस्यों में से चार की सिफारिश सिटी ऑफ सरे (सरे नगर निगम) द्वारा की गई थी। लिपिंस्की की याचिका में इन नियुक्तियों के तरीके पर भी सवाल उठाए गए हैं।

बोर्ड की संरचना में इस बदलाव के कुछ महीनों बाद लिपिंस्की को बर्खास्त कर दिया गया।

चीमा अब यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या लॉक, उनके कार्यालय या वरिष्ठ नगर निगम अधिकारियों और पुलिस बोर्ड के सदस्यों के बीच लिपिंस्की के कामकाज, भविष्य या उनकी बर्खास्तगी को लेकर कोई संवाद हुआ था।

चीमा ने कहा, “अदालत कानूनी पहलुओं को तय करेगी,” लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नगर निकाय चुनावों से पहले मतदाताओं को इस विवाद से जुड़ी परिस्थितियों की पूरी जानकारी होनी चाहिए।

सरे फर्स्ट की मेयर पद की उम्मीदवार लिंडा एनिस ने भी इस मामले से जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रशासन द्वारा लिए गए फैसलों का समर्थन करने वाले राजनीतिक नेताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

लिपिंस्की की याचिका में लगाए गए आरोपों की अदालत में जांच होना अभी बाकी है। उम्मीद है कि आगामी अदालती कार्यवाहियों में उनकी बर्खास्तगी के कारणों और इसमें शामिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा की जाएगी।

इस विवाद ने सरे के निर्वाचित नेतृत्व, उसके पुलिस बोर्ड और सरे पुलिस सर्विस के बीच के रिश्तों पर फिर से सबका ध्यान खींच लिया है। जैसे-जैसे यह कानूनी मामला आगे बढ़ेगा, संस्थागत स्वतंत्रता से जुड़े सवाल प्रमुखता से बने रहने की संभावना है।

By Rajeev Sharma

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