नई दिल्ली(राजीव शर्मा):मेरे मित्र राष्ट्रपति श्री मैक्रोन, गणमान्य व्यक्तियों, उपस्थित विशिष्ट प्रतिभागियों, नमस्कार!
प्रथम अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन का हिस्सा बनकर मुझे अत्यधिक प्रसन्नता हो रही है। राष्ट्रपति श्री मैक्रोन को उनके सौहार्दपूर्ण निमंत्रण और इस समयोचित पहल के लिए धन्यवाद। सदियों से अंतरिक्ष ने हमारी कल्पना को प्रेरित किया है। आज यह पृथ्वी पर, जलवायु और फसलों से लेकर महासागरों और समुदायों तक जीवन को आकार दे रहा है। अंतरिक्ष की संभावनाएं अनंत हैं। हमारा उत्तरदायित्व सामूहिक है। जैसे-जैसे ऑर्बिट में भीड़भाड़ बढ़ती जा रही हैं, प्रौद्योगिकियां अधिक विकसित हो रही हैं और संबंधित देशों की संख्या बढ़ रही है, हमारे विकल्प निश्चित रूप से स्पष्ट होने चाहिए: संघर्ष की जगह सहयोग; अल्पकालिक लाभ की जगह स्थिरता; और बहिष्करण की जगह समावेशन।
मित्रों,
भारत का दृष्टिकोण वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका अर्थ है एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य। इस भावना को अब पृथ्वी से परे भी ले जाना होगा। हम अंतरराष्ट्रीय कानून, संवाद और बहुपक्षीय सहयोग पर आधारित एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और टिकाऊ अंतरिक्ष कार्य क्षेत्र का समर्थन करते हैं। वैज्ञानिक डेटा का पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा के साथ जनहित में उपयोग किया जाना चाहिए।
भारत की अंतरिक्ष यात्रा इसी सिद्धांत को दर्शाती है। इस यात्रा के केंद्र में स्थित इसरो ने अपनी उत्कृष्टता और किफायती मिशनों के लिए वैश्विक प्रशंसा अर्जित की है। इसकी क्षमताएं किसानों और मछुआरों, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और नौवहन में सहायक हैं। 34 देशों के 430 से अधिक उपग्रह भारतीय रॉकेटों के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजे जा चुके हैं। इसरो की प्रौद्योगिकियां और साझेदारियां न केवल भारत बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए उपयोगी हैं।
इस वैश्विक विश्वास के पीछे पीढ़ियों से कार्यरत भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों का समर्पण और अथक परिश्रम है। दिन-रात काम करते हुए, उन्होंने मिशन दर मिशन, सफलता दर सफलता इसरो की वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ाई है और अंतरिक्ष यात्रा करने वाले देशों में भारत को गौरवपूर्ण स्थान दिलाया है।
चंद्रयान-3 ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट उतरने वाला पहला देश बनाया। आदित्य-एल1 सूर्य के रहस्यों को उजागर कर रहा है। पिछले वर्ष, एक भारतीय ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का दौरा किया। भविष्य में, हमारा लक्ष्य 2035 तक एक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना और 2040 तक एक भारतीय को चंद्रमा पर भेजना है। इन सभी प्रयासों में हमारा मार्गदर्शक सिद्धांत स्पष्ट रहा है: इनका लाभ पूरी मानवता तक पहुंचना चाहिए।
इसरो के साथ-साथ भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र भी तेजी से विकास कर रहा है। उद्यमशीलता की ऊर्जा इसरो की उत्कृष्टता के साथ जुड़ रही है। 1960 के दशक में थुम्बा में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत से ही फ्रांस एक विश्वसनीय भागीदार रहा है। आज हमारा सहयोग पृथ्वी अवलोकन और उन्नत प्रौद्योगिकियों तक फैला हुआ है, जो वैज्ञानिक उत्कृष्टता को मानवीय उद्देश्य के साथ जोड़ता है। हम फ्रांस और विश्व को भारत की अंतरिक्ष यात्रा में सहयात्री बनने के लिए आमंत्रित करते हैं।
मित्रों,
पेरिस में आयोजित अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन से ये स्पष्ट संदेश मिले: हम सब मिलकर समस्त मानवता के लिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए अंतरिक्ष की खोज करेंगे, मिलकर नवाचार करेंगे और मिलकर अंतरिक्ष की रक्षा करेंगे। मैं सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देता हूं।
धन्यवाद।
