शिमला (राजीव शर्मा): ठियोग के पास जनोगघाट पर सोमवार तड़के हुए एक बड़े भूस्खलन के बाद शिमला-किन्नौर राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई, जिससे मार्ग के दोनों ओर सैकड़ों वाहन फंस गए।
यह भूस्खलन सुबह करीब 5 बजे हुआ, जिसमें मलबे के साथ देवदार के दो से तीन बड़े पेड़ उखड़कर हाईवे पर आ गिरे। इसके बाद प्रशासन ने एहतियातन इस हिस्से पर यातायात बंद कर दिया और मलबा हटाने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया गया।
इस रुकावट से विशेष रूप से सेब से लदे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है; हाईवे पर फलों से भरे दर्जनों ट्रकों के फंसे होने की सूचना है। आपातकालीन वाहन भी इस प्रभावित क्षेत्र को पार नहीं कर पा रहे हैं, जिसके चलते सड़क से मलबा हटाने के अभियान में और तेजी लाई जा रही है।
मानसून कमजोर, विदाई में अभी दो से तीन हफ्ते बाकी
हाईवे बंद होने की यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब हिमाचल प्रदेश अपेक्षाकृत शुष्क मौसम के दौर में प्रवेश कर रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र, शिमला के निदेशक शोभित कटियार के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ गया है, लेकिन राज्य से इसकी पूरी तरह विदाई में अभी दो से तीन सप्ताह का समय लग सकता है।
हिमाचल प्रदेश से मानसून की वापसी की सामान्य तिथि 25 सितंबर मानी जाती है।
कटियार ने बताया कि अगले पांच से छह दिनों के दौरान व्यापक बारिश की संभावना काफी कम है और राज्य भर में मौसम आमतौर पर साफ रहने का अनुमान है। मौसम के मिजाज में आ रहे इस बदलाव से तापमान में करीब 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
12 सितंबर के आसपास बारिश की गतिविधियों में दोबारा कुछ तेजी आ सकती है, हालांकि मौजूदा पूर्वानुमान के मुताबिक उस दौरान बहुत भारी बारिश की कोई आशंका नहीं है।
हिमाचल में बारिश 9% कम दर्ज
सीजन के दौरान कई दौर की मूसलाधार बारिश के बावजूद हिमाचल प्रदेश में कुल वर्षा दीर्घावधि औसत से नीचे बनी हुई है।
1 जून से 7 सितंबर तक राज्य में लगभग 588 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य आंकड़ा 648 मिमी है। यह लगभग 9 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है।
जिलों के आधार पर बारिश का वितरण काफी असमान रहा है। शिमला, कुल्लू और सिरमौर में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हुई है, जबकि अधिकांश अन्य जिले अपने-अपने औसत से पीछे चल रहे हैं। लाहौल-स्पीति और हमीरपुर में बारिश की सबसे अधिक कमी दर्ज की गई है।
मानसून से नुकसान ₹1,400 करोड़ के पार
इसके बावजूद, मौजूदा मानसून सीजन अपने पीछे बड़े पैमाने पर तबाही के निशान छोड़ गया है। बारिश, भूस्खलन, बाढ़ और मौसम जनित अन्य हादसों के कारण हिमाचल प्रदेश भर में सरकारी व निजी संपत्ति को अनुमानित ₹1,423 करोड़ का नुकसान हुआ है।
राज्य में अब तक 123 मकान पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं, जबकि अन्य 490 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा सड़कें, पुल, पेयजल योजनाएं और अन्य बुनियादी ढांचा भी खराब मौसम की चपेट में आया है।
मानसून सीजन में अब तक 283 लोगों की मौत
इस पहाड़ी राज्य में मानसून के दौरान भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। सीजन के दौरान दर्ज दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं में अब तक कुल 283 लोगों की जान जा चुकी है।
सड़क हादसों में सबसे ज्यादा 169 मौतें दर्ज की गई हैं। भूस्खलन से 18 लोगों की जान गई, जबकि अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) से एक व्यक्ति और डूबने से 15 लोगों की मौत हुई। बाकी मौतें मानसून अवधि के दौरान हुए अन्य हादसों और प्राकृतिक कारणों से जुड़ी हैं।
फिलहाल, प्रशासन की प्राथमिकता शिमला-किन्नौर हाईवे पर यातायात बहाल करने की है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि इस रुकावट ने सेब की ढुलाई और आपातकालीन सेवाओं को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। वहीं, अगले कुछ दिनों तक शुष्क मौसम का अनुमान भूस्खलन जैसी घटनाओं से कुछ राहत दे सकता है, भले ही आने वाले दिनों में पारे में उछाल देखने को मिले।
