चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह): पंजाब में बिजली आपूर्ति व्यवस्था गंभीर दबाव में आती दिख रही है, क्योंकि निजी थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का स्टॉक कथित तौर पर घटकर महज दो दिन के उत्पादन जितना ही रह गया है। यदि नई खेप जल्द नहीं पहुंचती है, तो इन संयंत्रों में बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे राज्य भर में अघोषित बिजली कटौती की आशंका गहरा गई है।
इस स्थिति का सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ पंजाब के औद्योगिक क्षेत्र पर भी पड़ सकता है, विशेषकर तब जब राज्य को सेंट्रल ग्रिड से खरीदी जाने वाली बिजली पर अधिक निर्भर होने के लिए मजबूर होना पड़े।
पंजाब की कुल थर्मल बिजली उत्पादन क्षमता 5,680 मेगावाट है। इसमें सरकारी संयंत्रों की हिस्सेदारी करीब 2,300 मेगावाट है, जबकि निजी थर्मल स्टेशनों की संयुक्त क्षमता 3,380 मेगावाट है।
निजी संयंत्रों में लंबे समय तक उत्पादन ठप रहने की स्थिति में सरकार के सामने एक बड़ा बिजली घाटा पैदा हो जाएगा। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त बिजली का प्रबंध केंद्रीय पूल से करना पड़ेगा, जिससे राज्य की आपूर्ति व्यवस्था और वित्तीय ढांचे पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
सरकार की तैयारियों पर उठे सवाल
कोयले की कमी ने उपभोक्ताओं के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार की तैयारियों और निर्बाध बिजली उत्पादन बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब तक न तो बिजली मंत्री और न ही पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL/पावरकॉम) के वरिष्ठ अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से इस कमी से निपटने या प्रभावित संयंत्रों में कोयले की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों का कोई स्पष्ट खाका पेश किया है।
ऐसे समय में जब घरों, व्यवसायों और उद्योगों के लिए बिजली की मांग बेहद अहम बनी हुई है, इस तरह की स्पष्टता का अभाव चिंताओं को और बढ़ा रहा है।
लुधियाना के उद्यमियों ने दी पलायन की चेतावनी
बिजली आपूर्ति में आ रही रुकावटों को लेकर लुधियाना के उद्योगपतियों में असंतोष तेजी से बढ़ रहा है।
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने अपनी शिकायतें मुख्य अभियंता (सेंट्रल जोन) जगदेव सिंह हंस के समक्ष रखी हैं। उन्होंने आगाह किया कि यदि बिजली कटौती का यह सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धा में टिके रहना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
औद्योगिक प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि विश्वसनीय और निर्बाध बिजली सुनिश्चित नहीं की गई, तो कुछ इकाइयां अपने कारोबार को दूसरे राज्यों में स्थानांतरित करने पर विचार करने के लिए विवश हो सकती हैं, जहां बिजली की उपलब्धता अधिक भरोसेमंद है।
पंजाब के लिए ऐसा कोई भी कदम दूरगामी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है, क्योंकि रोजगार, विनिर्माण और राज्य की समग्र अर्थव्यवस्था में लुधियाना के औद्योगिक आधार का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है।
कोयले की निर्बाध आपूर्ति बनी फौरी प्राथमिकता
निजी थर्मल संयंत्रों में मात्र दो दिन का कोयला शेष होने के चलते, राज्य प्रशासन की सबसे पहली प्राथमिकता नई आपूर्ति सुनिश्चित कर उत्पादन को ठप होने से बचाना है।
थर्मल उत्पादन में किसी भी लंबी गिरावट से राज्य की बाहरी खरीद पर निर्भरता बढ़ेगी, जिससे पीक आवर्स के दौरान बिजली की उपलब्धता और उसकी लागत दोनों पर भारी दबाव पड़ सकता है।
लिहाजा, पंजाब के ऊर्जा क्षेत्र के लिए आने वाले कुछ दिन बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। उपभोक्ता और उद्योग जगत कोयले की उपलब्धता में सुधार के संकेतों और सरकार की आपातकालीन कार्ययोजना (कंटिंजेंसी प्लान) पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
