नई दिल्ली(राजीव शर्मा): केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री, श्री प्रतापराव जाधव ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) की शासी निकाय की 27वीं बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक के दौरान, केंद्रीय मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने वर्चुअल माध्यम से सीसीआरएएस- क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई) पुणे में एनिमल हाउस, आरएआरआई रानीखेत में स्टाफ क्वार्टर्स कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया तथा आरएआरआई नागपुर में नए 50-बिस्तरों वाले आयुर्वेद अस्पताल का भूमि पूजन किया। उन्होंने सीसीआरएएस- परम्परा का भी अनावरण किया, जो भारत की स्थानीय स्वास्थ्य परंपराओं, एथनोमेडिकल प्रथाओं और पारंपरिक पशु चिकित्सा ज्ञान के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, मूल्यांकन और वैज्ञानिक सत्यापन के लिए एक प्रमुख पहल है।
श्री प्रतापराव जाधव ने CCRAS National Research Recognitions पोर्टल का शुभारंभ किया, जिसमें सीसीआरएएस प्रकाश, सीसीआरएएस नवोन्मेष और सीसीआरएएस प्रबोध 3 एमटी शामिल हैं, जो स्नातकोत्तर आयुर्वेद अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक संचार में उत्कृष्टता को मान्यता देने के लिए एक पूर्णतः डिजिटल मंच है। उन्होंने आगे Ayur-dict का भी शुभारंभ किया, जो CCRAS का पहला एंड्रॉयड एप्लिकेशन है, जिसमें अनेक आयुर्वेद शब्दकोशों को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया गया है। बैठक में परिषद की हालिया उपलब्धियों की समीक्षा की गई, प्रमुख रणनीतिक पहलों को अनुमोदित किया गया और साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रमुख अनुसंधान अवसंरचना और डिजिटल पहलों का शुभारंभ किया गया।
शासी निकाय को संबोधित करते हुए, श्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि आज आयुर्वेद एक परिवर्तनकारी युग की दहलीज पर खड़ा है, जहाँ वैज्ञानिक सत्यापन, नवाचार और वैश्विक पहुँच को भारत की समृद्ध पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का पूरक बनना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीसीआरएएस ने साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। श्री जाधव ने संस्थान से आयुर्वेद को अधिक वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़, वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य और सुलभ बनाने के अपने प्रयासों को और मजबूत करने का आह्वान किया।
श्री जाधव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आयुर्वेद के विकास के अगले चरण का केंद्रबिंदु प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और बाज़ार से जुड़ाव होना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “Heal by Ayurveda, Heal in India and Make in India,” के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को वैज्ञानिक उत्कृष्टता, मानकीकरण और नवाचार के माध्यम से एक वैश्विक स्वास्थ्य सेवा समाधान के रूप में उभरना चाहिए। उन्होंने सीसीआरएएस से अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ अधिक सहयोग को बढ़ावा देने, ट्रांसलेशनल रिसर्च को प्रोत्साहित करने, तथा नैदानिक अनुसंधान, डेटा प्रबंधन और व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवा के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने का आग्रह किया, साथ ही शास्त्रीय आयुर्वेदिक ज्ञान की प्रामाणिकता और मूल सिद्धांतों को संरक्षित रखने पर भी बल दिया।
आयुर्वेद के भविष्य को आकार देने में भारत के युवाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, श्री जाधव ने कहा कि युवा शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, उद्यमियों और उद्योग को आयुर्वेद को प्रयोगशालाओं से बाज़ार तक पहुँचाने में सक्रिय भागीदार बनना चाहिए। उन्होंने अनुसंधान अनुदान, इनक्यूबेशन सहायता, मार्गदर्शन और उद्योग साझेदारियों के माध्यम से एक सशक्त नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का आह्वान किया। श्री जाधव ने नवाचार को प्रोत्साहित करने और भारत को एक वैश्विक वेलनेस हब के रूप में स्थापित करने के लिए युवा अनुसंधान कोष, आयुर्वेद स्टार्टअप एक्सेलेरेटर, और ग्लोबल आयुर्वेद चैलेंज जैसी पहलों पर ध्यान केंद्रित करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने शासी निकाय से आयुर्वेद को एक आधुनिक, साक्ष्य-आधारित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में परिवर्तित करने की दिशा में सामूहिक रूप से कार्य करने का आग्रह किया।
आयुष मंत्रालय में सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने शासी निकाय को संबोधित करते हुए कहा, “मंत्रालय एक अनुसंधान-प्रेरित पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ गुणवत्तापूर्ण अवसंरचना, डिजिटल नवाचार और वैज्ञानिक उत्कृष्टता मिलकर साक्ष्य- आधारित आयुर्वेद को सशक्त बनाते हैं। आज शुरू की गई पहलें अनुसंधान क्षमता, शैक्षणिक उत्कृष्टता और ज्ञान की सुलभता को और अधिक बढ़ाएँगी।”
प्रो. (वैद्य) रबिनारायण आचार्य, महानिदेशक, सीसीआरएएस तथा शासी निकाय के सदस्य सचिव, ने परिषद की उपलब्धियों और भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा, “सीसीआरएएस एक ऐसे अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है जहाँ शास्त्रीय आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, डिजिटल नवाचार और गुणवत्तापूर्ण साक्ष्यों के माध्यम से सुदृढ़ किया जाए। आज शुरू की गई पहलें अनुसंधान अवसंरचना का विस्तार करेंगी, युवा शोधकर्ताओं को सशक्त बनाएँगी, भारत के पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण करेंगी और आयुर्वेद को शोधकर्ताओं, चिकित्सकों तथा वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए अधिक सुलभ बनाएँगी।”
बैठक में सीसीआरएएस के शासी निकाय के सदस्यों, आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों तथा सीसीआरएएस के वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने भाग लिया। शासी निकाय ने परिषद की उपलब्धियों की सराहना की और अनुसंधान, नवाचार, संस्थागत क्षमता तथा आयुर्वेद की वैश्विक पहुँच को और सुदृढ़ करने के लिए मूल्यवान मार्गदर्शन प्रदान किया।
बैठक में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, नवाचार और संस्थागत उत्कृष्टता के माध्यम से साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद को सुदृढ़ करने के प्रति आयुष मंत्रालय की प्रतिबद्धता की दोबारा पुष्टि की गई। बैठक के दौरान लिए गए निर्णयों से आयुर्वेद अनुसंधान में सीसीआरएएस के नेतृत्व को और सुदृढ़ करने तथा वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में उसके योगदान को अधिक करने की अपेक्षा है।
