नई दिल्ली(राजीव शर्मा): सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी की उस याचिका को जल्द सूचीबद्ध करने की सहमति दे दी है, जिसमें चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी गई है, जिसने विवादित गुटों के बीच चल रहे विवाद के मद्देनजर पार्टी के मूल नाम और चुनाव प्रतीक को फ्रीज कर दिया था।
यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और वी. मोहना सहित पीठ के समक्ष उल्लेख किया गया। ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने जल्द सुनवाई की मांग करते हुए इस बात पर सवाल उठाया कि जब चुनाव आयोग के समक्ष कार्यवाही अभी जारी है, तब पार्टी की पहचान को फ्रीज करने का फैसला क्यों लिया गया।
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को दोनों गुटों को संगठन के प्रतिस्पर्धी दावों पर कोई ठोस फैसला लेने तक ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के पारंपरिक ‘फूल और घास’ प्रतीक का इस्तेमाल करने से रोक दिया था।
आयोग ने बाद में दोनों पक्षों के उम्मीदवारों को आगामी चुनावों में हिस्सा लेने में सक्षम बनाने के लिए वैकल्पिक नाम और प्रतीक जारी किए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ प्रतीक आवंटित किया गया, जबकि अरुप राय के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘एनवेलप’ प्रतीक दिया गया।
आयोग का कहना: विवाद में विस्तृत निर्धारण जरूरी
अपने अंतरिम आदेश में चुनाव पैनल ने कहा कि दो प्रतिद्वंद्वी समूह टीएमसी की पहचान और संगठनात्मक नियंत्रण का दावा कर रहे हैं। आयोग ने कहा कि यह विवाद चुनाव प्रतीक (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 की पैराग्राफ 15 के तहत ठोस निर्धारण मांगता है। यह अंतरिम व्यवस्था आगामी उपचुनावों की पृष्ठभूमि में की गई।
ममता बनर्जी ने पार्टी की स्थापित पहचान और प्रतीक पर लगे फ्रीज पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के कदम को चुनौती दी है।
पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में होने वाले उपचुनावों की वजह से इस मुद्दे की तात्कालिकता बढ़ गई है। चुनाव आयोग की नई व्यवस्था दोनों गुटों से जुड़े उम्मीदवारों को मूल पार्टी नाम और प्रतीक को लेकर चल रहे विवाद से प्रभावित हुए बिना चुनाव लड़ने की अनुमति देती है।
ममता का संकल्प: कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी
चुनाव आयोग के फैसले के बाद ममता बनर्जी ने सार्वजनिक तौर पर इस कदम की आलोचना की और कहा कि वे मूल पार्टी नाम और ‘फूल और घास’ प्रतीक बरकरार रखने के अपने प्रयास जारी रखेंगी। उन्होंने इस फैसले को पार्टी की पहचान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि इस मामले को कानूनी और लोकतांत्रिक माध्यमों से आगे बढ़ाया जाएगा।
यह विवाद टीएमसी के भीतर व्यापक आंतरिक संकट के बाद सामने आया है, जिसमें प्रतिद्वंद्वी समूह पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण और राजनीतिक पहचान पर दावा ठोक रहे हैं। चुनाव आयोग की प्रतिस्पर्धी दावों पर ठोस कार्यवाही अभी लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ममता बनर्जी की याचिका को सुनवाई के लिए लेने के फैसले से टीएमसी के नाम और प्रतीक को लेकर चल रहा विवाद न्यायालय के समक्ष आ गया है, जबकि प्रतिस्पर्धी दावों का निर्धारण करने की चुनाव आयोग की प्रक्रिया अलग से जारी रहेगी।
