नई दिल्ली(राजीव शर्मा): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा को सूचित किया कि भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान ने मानव-रेटिंग से संबंधित महत्वपूर्ण प्रणालियों के विकास और प्रमाणीकरण में उल्लेखनीय उपब्धियां हासिल की हैं। इससे देश के पहले स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन की दिशा में निरंतर प्रगति हो रही है।
राज्यसभा में बोलते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (एचएलवीएम3) के सभी प्रणोदन चरणों और संरचनाओं का विकास तथा ग्राउंड टेस्टिंग पूरी कर ली है। उन्होंने बताया कि क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के प्रणोदन प्रणालियों का विकास, परीक्षण और प्रमाणीकरण हो चुका है, जबकि पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली (ईसीएलएसएस), तापीय सुरक्षा प्रणाली, मंदन प्रणाली, क्रू मॉड्यूल अप-राइटिंग प्रणाली और संपूर्ण इवियोनिक्स का भी सफलतापूर्वक विकास और परीक्षण किया जा चुका है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस) के लिए आवश्यक सभी पांच प्रकार के मोटरों का विकास कर और उनका सफल स्थिर परीक्षण किया गया तथा संबंधित सभी संरचनाओं का निर्माण एवं अर्हता परीक्षण भी पूरा कर लिया गया है। उन्होंने आगे बताया कि आगामी मिशन गतिविधियों के समर्थन में ऑर्बिटल मॉड्यूल तैयारी सुविधा, गगनयान नियंत्रण केन्द्र, क्रू परीक्षण सुविधा और दूसरे लॉन्च पैड में किए गए संशोधनों सहित प्रमुख मिशन अवसंरचना स्थापित कर ली गई है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि टीवी-डी1 (टीवी-डीआई) प्रक्षेपण यान मिशन, जिसका उददेश्य उड़ान के दौरान क्रू एस्केप सिस्टम का सत्यापन करना था, सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इसके अलावा, सिमुलेटेड क्रू मॉड्यूल का उपयोग करके किए गए इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट-01 और इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट-02 ने डीसेलरेशन सिस्टम का सफल सत्यापन किया है। अगले टेस्ट व्हीकल मिशन (टीवी-डी2) की तैयारियां वर्तमान में जारी हैं। उन्होंने आगे बताया कि ग्राउंड कम्युनिकेशन नेटवर्क को अंतिम रूप दे दिया गया है, आईडीआरएसएस-1 फीडर स्टेशन और स्थलीय लिंक स्थापित कर लिए गए हैं, रिकवरी एसेट्स की पहचान कर ली गई है और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी की योजना भी तैयार कर ली गई है। इसी के समानांतर नई विकसित प्रणालियों के विभिन्न ग्राउंड क्वालिफिकेशन परीक्षण भी जारी हैं।
मिशन रोडमैप की रूपरेखा बताते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कार्यक्रम के तहत पहली बार विकसित की जा रही प्रौद्योगिकियों का सत्यापित करने के लिए व्योममित्र (हाफ-ह्यूमनॉइड) अर्ध-मानव को ले जाने वाला पहला मानवरहित प्रायोगिक गगनयान मिशन 2026 की चौथी तिमाही के दौरान लक्षित है। इसके बाद भारत के पहले मानव कक्षीय मिशन से पहले 2027 तक पहले क्रू उड़ान के कॉन्फीग्रेशन में दो अतिरिक्त मानवरहित मिशन का लक्ष्य रखा गया है।
मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए सरकार के दीर्घकालिक विजन को साझा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) को 2035 तक चालू करने की योजना है। उन्होंने बताया कि आईएसआरओ ने पांच मॉड्यूल वाले अंतरिक्ष स्टेशन की समग्र संरचना तैयार कर ली है, जबकि सरकार ने पहले मॉड्यूल बीएएस-01 के विकास और प्रक्षेपण को मंजूरी दे दी है। मॉड्यूल के लिए समग्र सिस्टम इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विकास गतिविधियां आईएसआरओ के विभिन्न केंद्रों और इकाइयों में प्रगति पर है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा ने आगे बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2024 में भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के तहत आठ मिशनों के निष्पादन के लिए 20,193 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन स्वीकृत किया था। उन्होंने नेटवर्क संचालन सहायता के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए), क्रू और क्रू मॉड्यूल रिकवरी के लिए ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी (एएसए), उड़ान शल्य चिकित्सकों और ग्राउंड सहायता टीमों के विशेष प्रशिक्षण के लिए फ्रांस की सीएनईएस और अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण और महत्वपूर्ण मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रणालियों की खरीद के लिए रूस की रोस्कोस्मोस सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ आईएसआरओ के सहयोग पर भी प्रकाश डाला।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि गगनयान मिशन के तहत हासिल की गई प्रगति भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के रोडमैप के साथ भारत की स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं को मजबूत करने और देश के भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम के लिए प्रौद्योगिकीय आधार तैयार करने के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
