संसद प्रश्न: वैश्विक प्रक्षेपण बाजार में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी पर सरकार का जवाब

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): एलवीएम3-एम6 मिशन ने अमेरिकी एएसटी स्पेस मोबाइल ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को सफलतापूर्वक 520 किलोमीटर वृत्ताकार निम्न पृथ्वी कक्षा (एलईओ) में स्थापित कर दिया है। यह भारत की धरती से एलवीएम3 द्वारा प्रक्षेपित किया गया अब तक का सबसे भारी पेलोड (6100 किलोग्राम) है। इस प्रक्षेपण ने भारत की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है, जिससे एलवीएम3 प्रक्षेपण यान में वाणिज्यिक विश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक प्रक्षेपण सेवा बाजार में पसंदीदा प्रक्षेपण यानों में से एक बन गया है।

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को रणनीतिक और तकनीकी लाभ प्रदान करने के लिए सरकार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ावा दे रही है। मानव अंतरिक्ष उड़ान, अंतरिक्ष स्टेशन और अंतरिक्ष अन्वेषण मिशन सहित अंतरिक्ष विजन 2047 के लक्ष्यों को पूरा करना इन प्रयासों का मुख्य घटक है। प्रक्षेपण क्षमता बढ़ाना, ग्राउंड स्टेशन नेटवर्क का विस्तार करना, अंतरिक्ष अवसंरचना और अनुप्रयोग आधार को बढ़ाना, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों और व्यापार मंचों में भारतीय अंतरिक्ष उद्योगों की भागीदारी को बढ़ावा देना, बी2बी (व्यापारिक व्यापार) जुड़ाव और भारतीय उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ना भी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग रणनीति का हिस्सा है। सरकार ने साझेदार देशों के साथ संवाद तंत्र और संयुक्त नवाचार रोडमैप भी स्थापित किए हैं ताकि उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और रणनीतिक लाभों को प्राप्त किया जा सके।

अंतरिक्ष सेवाओं के विश्वसनीय प्रदाता के रूप में देश की भूमिका का विस्तार करने के उद्देश्य से, सरकार इन-स्पेस के माध्यम से निजी क्षेत्र को प्रक्षेपण यान खंड सहित अंतरिक्ष क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने में सक्षम बना रही है। कुछ प्रमुख पहलें इस प्रकार हैं:

तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में दूसरे अंतरिक्ष बंदरगाह का विकास देश के प्रक्षेपण अवसंरचना को मजबूत करने और प्रक्षेपण यान संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
प्रक्षेपण प्रणालियों की सुरक्षा, विश्वसनीयता और गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए एक कठोर समीक्षा और प्राधिकरण तंत्र की स्थापना।
अंतरिक्ष क्षेत्र में मानकीकरण और गुणवत्ता आश्वासन को बढ़ावा देने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के सहयोग से भारतीय अंतरिक्ष मानकों का विकास करना।
स्काईरूट, अग्निकुल और एचएएल को उनके संबंधित प्रक्षेपण यानों को तैयार करने के लिए तत्परता प्रदान करना और सक्षम बनाना।
अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी उद्यमों की भागीदारी को सक्षम और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इन-स्पेस द्वारा निम्नलिखित पहल/योजनाओं की घोषणा की गई है:

भारत की अंतरिक्ष नीति 2023 जारी की गई, जिसमें भारतीय अंतरिक्ष परितंत्र में योगदान देने वाले सभी पक्षों की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां परिभाषित की गई हैं।
अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए उदारीकृत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति की शुरुआत।
गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को इसरो की सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करने के लिए रियायती मूल्य नीति का कार्यान्वयन।
अंतरिक्ष क्षेत्र में कार्यरत स्टार्टअप्स को मदद के लिए 1,000 करोड़ रुपये के वेंचर कैपिटल (वीसी) फंड की स्थापना।
स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के विकास, प्रदर्शन और व्यावसायीकरण में तेजी लाने के लिए 500 करोड़ रुपये के प्रौद्योगिकी अभिकरण कोष (टीएएफ) का शुभारम्भ।
निजी क्षेत्र के विकास को समर्थन देने के लिए आईएसआरओ के बुनियादी ढांचे, तकनीकी विशेषज्ञता और मार्गदर्शन तक पहुंच को सुगम बनाना।
अंतरिक्ष क्षेत्र की बदलती कार्यबल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कौशल विकास पहलों का शुभारम्भ।
अंतरिक्ष प्रणालियों के लिए किफायती परीक्षण, सत्यापन और अनुकरण सुविधाएं प्रदान करने हेतु एक तकनीकी केंद्र की स्थापना।
इसरो की विकसित प्रौद्योगिकियों को व्यावसायीकरण के लिए उद्योग को हस्तांतरित करने में सक्षम बनाना।
पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (पीओईएम) प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों को मान्य करने के अवसर प्रदान करना।
स्वदेशी उपग्रह प्लेटफार्म क्षमताओं को विकसित करने और उपग्रह विकास में तेजी लाने के लिए “सैटेलाइट बस एज़ ए सर्विस (एसबीएएएस)” पहल का शुभारम्भ किया गया है।
घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, निवेश आकर्षित करने और एक एकीकृत अंतरिक्ष औद्योगिक परितंत्र बनाने के लिए राज्य सरकारों को समर्पित अंतरिक्ष विनिर्माण क्लस्टर स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना।
पीपीपी मॉडल के तहत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह समूह की स्थापना, जिसमें भारत की पृथ्वी अवलोकन क्षमताओं और डेटा सेवाओं को बढ़ाने के लिए एक स्वदेशी वाणिज्यिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह समूह का विकास, प्रक्षेपण और संचालन शामिल है।
यह जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।

By Rajeev Sharma

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