नई दिल्ली(राजीव शर्मा): भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उत्पादन और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से शुरू की गई योजनाओं/पहलों का विवरण निम्नलिखित है;
अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए उदारीकृत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति की शुरुआत।
गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को इसरो की सुविधाओं का लाभ लेने के लिए रियायती मूल्य नीति का कार्यान्वयन।
अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप्स को समर्थन देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये के वेंचर कैपिटल (वीसी) फंड की स्थापना।
स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के विकास, प्रदर्शन और व्यावसायीकरण में तेजी लाने के लिए 500 करोड़ रुपये के प्रौद्योगिकी अभिग्रहण कोष (टीएएफ) का शुभारम्भ किया गया है।
निजी क्षेत्र के विकास को समर्थन देने के लिए इसरो के बुनियादी ढांचे, तकनीकी विशेषज्ञता और मार्गदर्शन का लाभ लेने को सुगम बनाना।
अंतरिक्ष क्षेत्र की बदलती कार्यबल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कौशल विकास पहलों का शुभारम्भ।
अंतरिक्ष प्रणालियों के लिए किफायती परीक्षण, सत्यापन और अनुकरण सुविधाएं प्रदान करने हेतु एक तकनीकी केंद्र की स्थापना।
इसरो की विकसित प्रौद्योगिकियों को व्यावसायीकरण के लिए उद्योग को हस्तांतरित करने में सक्षम बनाना।
पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (पीओईएम) प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों को मान्य करने के अवसर प्रदान करना।
स्वदेशी उपग्रह प्लेटफार्म क्षमताओं को विकसित करने और उपग्रह विकास में तेजी लाने के लिए “सैटेलाइट बस एज़ ए सर्विस (एसबीएएएस)” पहल का शुभारम्भ किया गया है।
विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों को विनिर्माण क्लस्टर स्थापित करने के साथ-साथ साझा परीक्षण सुविधाएं स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना।
इन-स्पेस योजनाएं/पहलें अखिल भारतीय योजनाएं हैं। इसलिए, राज्यवार विवरण नहीं रखे जाते हैं।
भारत में निजी अंतरिक्ष क्षेत्र वर्तमान में एक प्रारंभिक और विकासात्मक चरण में है, इसलिए सरकारी कार्यक्रम मुख्य रूप से आधारभूत संरचना के निर्माण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सुगम बनाने, प्रौद्योगिकियों के विकास और निवेश को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं।
इन-स्पेस विभिन्न प्रचार-प्रसार मंचों के माध्यम से अपनी योजनाओं, नीतियों और पहलों के बारे में जागरूकता पैदा करता है और उनका प्रचार करता है। इन मंचों में उद्योग जगत के साथ बातचीत की बैठकें, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी अभिग्रहण और जागरूकता कार्यशालाएं (एसएएडब्ल्यू), विशिष्ट कार्यों के लिए वेबिनार, हितधारकों के साथ परामर्श, सम्मेलन, प्रदर्शनियां और आवधिक प्रकाशन शामिल हैं। ये पहलें गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई), शिक्षाविदों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई और अन्य हितधारकों के साथ जुड़ाव को सुगम बनाती हैं। साथ ही नीति सुधारों, वित्तपोषण के अवसरों, नियामक ढांचों और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के बारे में जानकारी का प्रसार करती हैं।
यह जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।
