नई दिल्ली(राजीव शर्मा):केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भारत और ब्रिटेन के व्यवसायों का आह्वान किया कि वे भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) से उत्पन्न अवसरों को व्यापार, निवेश, साझेदारियों और रोजगार सृजन के विस्तार में परिवर्तित करें। भारत-ब्रिटेन संयुक्त आर्थिक एवं व्यापार समिति (जेईटीसीओ) के 16वें सत्र के अंतर्गत आयोजित जेईटीसीओ बिजनेस पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों को वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखना चाहिए और अधिक आर्थिक महत्वाकांक्षा एवं सहयोग के लिए भारत-ब्रिटेन विजन 2035 को एक रूपरेखा बनानी चाहिए।
श्री गोयल ने कहा कि सीईटीए दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह समझौता अधिकांश भारतीय निर्यातों को ब्रिटेन के बाजार में शून्य शुल्क पर प्रवेश की सुविधा प्रदान करता है, जबकि विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिटेन के निर्यातकों के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर खोलता है। इस समझौते से सेवा क्षेत्र में भी नए अवसर उपलब्ध हुए हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा संबंधी दोहरे अंशदान पर हुए समझौते से प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सेवाओं की आपूर्ति और बेहतर लाभप्रदता के माध्यम से दोनों अर्थव्यवस्थाओं को और अधिक लाभ मिल सकता है।
इस समझौते को व्यावसायिक स्तर पर ठोस परिणामों में बदलने की आवश्यकता पर बल देते हुए मंत्री ने कहा, “यह समझौता दरवाजे खोलता है, जिनसे होकर व्यवसायों को आगे बढ़ना होगा।” उन्होंने व्यवसायों से सीईटीए के तहत उपलब्ध अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 को केवल दशक के अंत के रूप में नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच कहीं अधिक महत्वाकांक्षी साझेदारी की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए। वर्ष 2030 के अंत तक शेष लगभग 1,500 दिनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने व्यवसायों से द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के साझा लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम करने का आग्रह किया।
श्री गोयल ने कहा कि भारत और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और मौजूदा व्यापार का विस्तार करने, निर्यात के नए अवसर विकसित करने तथा आपस में कारोबार किए जाने वाले उत्पादों की विविधता बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। भारत के पास बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता, लगातार मजबूत होता विनिर्माण आधार, विश्वस्तरीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और दुनिया में कहीं भी उपलब्ध सबसे युवा प्रतिभा समूह है। वहीं, ब्रिटेन को अनुसंधान, डिजाइन, उन्नत प्रौद्योगिकियों और दुनिया के अग्रणी वित्तीय केन्द्रों में से एक होने का लाभ प्राप्त है।
मौजूदा व्यापार पूरकताओं की विशेषताएं बताते हुए मंत्री ने बताया कि भारत स्मार्टफोन, औषधीय उत्पादों, आभूषणों, वस्त्रों, चमड़े के सामान, चावल और कुछ कृषि उत्पादों, लौह एवं गैर-मिश्र धातु इस्पात, मशीनरी के पुर्जों तथा ऑटोमोबाइल कलपुर्जों का एक प्रमुख निर्यातक है। ब्रिटेन की ओर से उन्होंने पेट्रोलियम मूल्य श्रृंखला के विभिन्न उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं विद्युत उपकरणों से संबंधित प्रौद्योगिकी उत्पादों, औषधियों, मोटर कारों और स्कॉच व्हिस्की की आपूर्ति में संभावनाओं की पहचान की। उन्होंने कहा कि व्यापक सीईटीए ने व्यापार के विस्तार, नए निर्यातकों को प्रोत्साहित करने और उत्पादों की नई श्रेणियां प्रस्तुत करने के अनेक अवसर खोले हैं।
मंत्री ने दोनों देशों के बीच एक-दूसरे के यहां निवेश की व्यापक संभावनाओं को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि कई भारतीय कंपनियों ने ब्रिटेन के प्रमुख क्षेत्रों में पर्याप्त निवेश किया है, जबकि ब्रिटेन की कई प्रमुख कंपनियों ने भारत में निवेश किया है। उन्होंने कहा कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय मौजूदा व्यवस्थाओं के विस्तार, विभिन्न क्षेत्रों में पारस्परिक मान्यता को बढ़ावा देने और दोनों अर्थव्यवस्थाओं को तेज गति से आगे बढ़ने में सहायता देने के लिए सहयोग करने को तैयार है।
भारत-ब्रिटेन सहयोग के पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए श्री गोयल ने कहा कि अवसंरचना और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में परियोजना विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, पारेषण लाइनों और उपयोगिता क्षेत्र के वित्तपोषण के माध्यम से दोनों देशों में सतत विकास को समर्थन देने के अवसर उपलब्ध हैं।
दूसरा क्षेत्र उन्नत विनिर्माण और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं का है, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रिसिजन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में। उन्होंने कहा कि सहयोग से प्रतिस्पर्धी विनिर्माण इकोसिस्टम विकसित करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती बढ़ाने और दोनों विश्वसनीय साझेदारों के बीच विश्वास को सुदृढ़ करने में मदद मिलनी चाहिए।
तीसरी प्राथमिकता प्रौद्योगिकी और नवाचार है। उन्होंने शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों, प्रौद्योगिकी कंपनियों और स्टार्टअप्स के बीच अधिक मजबूत संबंध स्थापित करने के साथ-साथ अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं की भी जानकारी दी।
चौथा क्षेत्र वित्तीय सेवाओं का है, जहां उन्होंने लंदन शहर और गुजरात के गांधीनगर स्थित गिफ्ट सिटी के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने फिनटेक, बीमा, सीमा-पार भुगतान, वित्तीय गतिविधियों और व्यापार वित्तपोषण को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया। उन्होंने कहा कि दोनों वित्तीय केन्द्रों को अधिक प्रगति और समृद्धि की दिशा में एक-दूसरे से जुड़े मार्ग के रूप में विकसित होने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
पांचवां क्षेत्र स्वास्थ्य सेवा और उपभोक्ता क्षेत्र हैं। श्री गोयल ने भारत की ओर से जेनेरिक औषधियों तथा ब्रिटेन की ओर से ब्रांडेड और नवोन्मेषी औषधीय उत्पादों के साथ-साथ निदान सेवाओं, खाद्य प्रसंस्करण और उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत की किफायती उत्पादन क्षमता और ब्रिटेन की औषधि खोज एवं विकास संबंधी विशेषज्ञता मिलकर प्रभाव को कई गुना बढ़ा सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन सभी पांच क्षेत्रों में कौशल विकास और प्रशिक्षण व्यापार की संभावनाओं का विस्तार करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि पूंजी तेजी से सीमाओं के पार जा सकती है, लेकिन क्षमताओं को विकसित करने में समय लगता है। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए पारस्परिक समझ और क्षमता निर्माण में निवेश करने की आवश्यकता पर बल दिया।
व्यवसायों को सीईटीए का लाभ उठाने में सहायता देने के लिए व्यावहारिक सहयोग का आह्वान करते हुए श्री गोयल ने शुल्क संबंधी अनुसूचियों, उत्पत्ति के नियमों और दस्तावेजीकरण की आवश्यकताओं को स्पष्ट निर्देशों के माध्यम से सुलभ बनाने पर जोर दिया। उन्होंने सरल भाषा और भारत के संदर्भ में क्षेत्रीय भाषाओं में सहायक सामग्री उपलब्ध कराने का आह्वान किया, ताकि विभिन्न आकार के व्यवसाय और अलग-अलग क्षेत्रों के उद्यम इस समझौते का प्रभावी ढंग से लाभ उठा सकें। दक्षिण भारत के तिरुपुर स्थित एक इकाई और मिडलैंड्स की एक इंजीनियरिंग कंपनी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जहां आवश्यक हो, तमिल सहित अन्य भाषाओं में सुलभ मार्गदर्शन उपलब्ध कराने से व्यवसायों को इस समझौते का लाभ उठाने में मदद मिलेगी।
मंत्री ने कहा कि सफलता का एक पैमाना ब्रिटेन के बाजार में नए उत्पादों के साथ प्रवेश करने वाले नए निर्यातकों की संख्या होगी। उन्होंने दोनों देशों के व्यवसायों के बीच नियमित क्षेत्रवार गोलमेज बैठकों, क्षेत्रवार प्रतिनिधिमंडलों और बड़े पैमाने पर आयोजित प्रदर्शनियों में भागीदारी के माध्यम से अधिक संवाद और सहभागिता का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को भागीदार देशों के रूप में भी ऐसी प्रदर्शनियों में हिस्सा लेना चाहिए, ताकि मुक्त व्यापार समझौते को लागू करने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता प्रदर्शित हो सके।
अपने संबोधन के समापन पर श्री गोयल ने भारत-ब्रिटेन विजन 2035 की प्रतिबद्धताओं को धरातल पर वास्तविक प्रगति में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस सिद्धांत के मार्गदर्शन में आगे बढ़ना चाहिए कि जब राष्ट्र साथ मिलकर विकास करते हैं, तो उनके नागरिक भी साथ मिलकर समृद्ध होते हैं।
सत्र को संबोधित करते हुए ब्रिटेन के वरिष्ठ व्यापार, नवाचार, विज्ञान एवं व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने कहा कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) का निष्कर्ष दोनों देशों की सरकारों और व्यवसायों के बीच निरंतर एवं व्यावहारिक संवाद की शुरुआत है। उन्होंने बताया कि व्यावसायिक संवाद से पहले सरकारों के बीच आयोजित जेईटीसीओ बैठक संपन्न हुई, जिसमें समितियों और कार्य समूहों का गठन किया गया। साथ ही, व्यवसायों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करने, कार्यान्वयन संबंधी समस्याओं का समाधान करने और समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन में सुधार लाने के लिए इसके उपयोग की संयुक्त समीक्षा शुरू की गई। सीईटीए को लागू हुए लगभग 100 दिन हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के व्यवसायों द्वारा इस समझौते का उपयोग शुरू करने और उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, जीवन विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सेवाओं तथा रचनात्मक उद्योगों में नए अवसर तलाशने के उत्साहजनक संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि व्यवसाय निर्यात, निवेश और साझेदारियों के विस्तार के लिए इसका कितना उपयोग करते हैं।
श्री रेनॉल्ड्स ने व्यवसायों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों को व्यावहारिक सहायता प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि वे शुल्क में कटौती, उत्पत्ति के नियमों, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, नियामक आवश्यकताओं और सरकारी खरीद के अवसरों को समझ सकें। उन्होंने कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों और उन क्षेत्रों की पहचान करने के लिए व्यवसायों से स्पष्ट एवं रचनात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त करने के महत्व को रेखांकित किया, जहां सरकार की आगे की कार्रवाई से व्यापार और निवेश को सुगम बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि व्यवसायों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर सीईटीए की उपयोग समीक्षा, समितियों और कार्य समूहों के माध्यम से विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता भारत-ब्रिटेन व्यापारिक संबंधों के और विस्तार की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने व्यापार और सहयोग की प्रतिबद्धता को ठोस परिणामों में बदलने का आह्वान किया, जिनमें दोनों देशों में वाणिज्यिक अनुबंध, निवेश, प्रौद्योगिकियों का व्यावसायीकरण और रोजगार सृजन शामिल हैं। उन्होंने समझौते के कार्यान्वयन में व्यवसायों को केन्द्र में रखने के महत्व को दोहराया।
केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि व्यावसायिक मिशनों और औद्योगिक संघों के बीच आदान-प्रदान के माध्यम से भारत और ब्रिटेन के कारोबारी समुदायों के बीच निरंतर संवाद से कंपनियों को संभावित साझेदारों की पहचान करने, अवसरों का पता लगाने और विभिन्न क्षेत्रों तथा अलग-अलग आकार के उद्यमों के बीच वाणिज्यिक संबंध मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने प्रौद्योगिकी सहयोग को भारत-ब्रिटेन आर्थिक संबंधों का अगला प्रमुख क्षेत्र बताया, विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर के क्षेत्रों में। उन्होंने कहा कि अनुसंधान एवं विकास में ब्रिटेन की विशेषज्ञता, भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा, डिजिटल बाजार और बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकियों को लागू करने की क्षमता के साथ मिलकर सहयोग के नए अवसर प्रदान करती है। वर्ष 2024 में सहमत प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देश वैश्विक बाजारों के लिए विश्वसनीय और किफायती प्रौद्योगिकियां विकसित करने की दिशा में काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और उद्योग के बीच निरंतर संवाद से व्यावसायिक विश्वास मजबूत होगा। उन्होंने आगामी जेईटीसीओ बैठक में हस्ताक्षरित साझेदारियों, स्थापित कारखानों और सृजित रोजगार के आधार पर प्रगति का आकलन करने का आह्वान किया।
ग्रेट नॉर्थ प्रतिनिधिमंडल के रणनीतिक एवं ज्ञान साझेदार, यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूकेआईबीसी), इंग्लैंड के उत्तरी क्षेत्र के पांच संयुक्त प्राधिकरणों के नेताओं को एक साथ लाने वाले भारत के पहले महापौर-स्तरीय मिशन को सहयोग प्रदान कर रहा है।
यूकेआईबीसी ने प्रतिनिधिमंडल को भारत के संबंध में रणनीतिक एवं बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई है, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में द्विपक्षीय अवसरों की पहचान की है तथा भारतीय उद्योग और सरकार के साथ संवाद स्थापित करने में सहायता की है। यह मिशन उत्तरी क्षेत्रों के साथ यूकेआईबीसी के व्यापक कार्य का हिस्सा है। इसमें प्रत्येक क्षेत्र की भारत में सबसे मजबूत व्यावसायिक पेशकश की पहचान करना, बाजार रणनीतियां एवं सहभागिता योजनाएं विकसित करना और भारतीय व्यवसायों तथा संस्थानों के साथ दीर्घकालिक साझेदारियां स्थापित करना शामिल है। इन प्रयासों का उद्देश्य प्रतिबद्धताओं को धरातल पर व्यावहारिक कार्यक्रमों में बदलना है।
