सिरसा नदी का प्रदूषण बरकरार, कोलीफॉर्म स्तर नहाने की तय सीमा से 260 गुना अधिक

रूपनगर(गुरप्रीत सिंह): सिरसा नदी में गंभीर प्रदूषण की स्थिति बनी हुई है। ताजा जल गुणवत्ता विश्लेषण में नहाने के लिए निर्धारित सीमा से कहीं अधिक बैक्टीरियल प्रदूषण पाया गया है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) द्वारा अगस्त 2026 में दर्ज आंकड़ों से पता चलता है कि पहले की निगरानी और सुधारात्मक उपायों के बावजूद नदी पर पर्यावरणीय दबाव बना हुआ है।

पीपीसीबी की अगस्त की सतही जल विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार, 11 अगस्त को घनौली के पास लिए गए पानी के नमूने में कुल कोलीफॉर्म का स्तर 1,30,000 एमपीएन/100 मिलीलीटर पाया गया। नहाने के पानी के लिए निर्धारित सीमा 500 एमपीएन/100 मिलीलीटर है। इस तरह दर्ज स्तर अनुमत सीमा से 260 गुना अधिक रहा।

फीकल कोलीफॉर्म का स्तर भी 23,000 एमपीएन/100 मिलीलीटर दर्ज किया गया, जो नहाने के लिए निर्धारित 500 एमपीएन/100 मिलीलीटर मानक से काफी अधिक है। यह आंकड़ा बिना पारंपरिक उपचार के पीने योग्य पानी के लिए लागू 50 एमपीएन/100 मिलीलीटर के मानक से भी काफी ऊपर है।

नमूने में जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) 5.4 मिलीग्राम/लीटर दर्ज की गई, जबकि संगठित बाहरी स्नान के लिए उपयुक्त पानी का मानक 3 मिलीग्राम/लीटर है। निर्धारित सर्वोत्तम उपयोग वर्गीकरण के आधार पर नमूना स्थल को क्लास डी में रखा गया।

जल गुणवत्ता के संकेतक चिंताजनक
पीपीसीबी के विश्लेषण में घुलित ऑक्सीजन 6.5 मिलीग्राम/लीटर और रासायनिक ऑक्सीजन मांग 36 मिलीग्राम/लीटर पाई गई। पानी की गंदलापन 182 एनटीयू और कुल निलंबित ठोस पदार्थ 284 मिलीग्राम/लीटर दर्ज किए गए।

यह नमूना पीपीसीबी की लुधियाना स्थित जोनल प्रयोगशाला द्वारा एकत्र कर उसका विश्लेषण किया गया था।

अगस्त के आंकड़े महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे दिखाते हैं कि लंबे समय तक नदी की निगरानी और पहले किए गए उपायों के बाद भी प्रदूषण का उच्च स्तर बना हुआ है।

जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक पीपीसीबी के पहले के अवलोकनों में भी घनौली के पास सिरसा नदी की स्थिति में गंभीर गिरावट की ओर संकेत किया गया था। मार्च 2026 तक कुल कोलीफॉर्म का स्तर 60,000 एमपीएन/100 मिलीलीटर और फीकल कोलीफॉर्म का स्तर 17,000 एमपीएन/100 मिलीलीटर पहुंच गया था।

बीओडी का स्तर भी बार-बार 3 मिलीग्राम/लीटर के मानक से ऊपर दर्ज किया गया। दिसंबर 2025 में बीओडी 15 मिलीग्राम/लीटर, फरवरी 2026 में 6 मिलीग्राम/लीटर और मार्च में 4.8 मिलीग्राम/लीटर दर्ज की गई।

औद्योगिक गतिविधियों पर ध्यान
सिरसा नदी के एक हिस्से को लंबे समय से प्रदूषित नदी क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। सरकारी पर्यावरणीय रिकॉर्ड में भी इसकी स्थिति दर्ज है। हिमाचल प्रदेश के बद्दी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद नदी के वर्गीकरण को प्रायोरिटी-III से बढ़ाकर प्रायोरिटी-I कर दिया गया।

हिमाचल प्रदेश राज्य पर्यावरण योजना में नालागढ़ के आसपास सिरसा नदी के हिस्से को प्रायोरिटी-I के रूप में दर्ज किया गया है और इसमें अधिकतम बीओडी 40 मिलीग्राम/लीटर बताई गई है। वर्गीकरण प्रणाली के तहत प्रायोरिटी-I उन प्रदूषित हिस्सों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जहां अधिकतम बीओडी 30 मिलीग्राम/लीटर से अधिक होती है।

बद्दी-परवाणू क्षेत्र में जल गुणवत्ता के 2024 के आकलन में भी सिरसा नदी की बीओडी में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में बीओडी करीब 8-16 मिलीग्राम/लीटर थी, जो बढ़कर 40 मिलीग्राम/लीटर तक पहुंच गई।

बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में और उसके आसपास औद्योगिक गतिविधियों को बार-बार प्रदूषण की समस्या से जोड़ा गया है। हिमाचल प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए रूपनगर के विधायक दिनेश चड्ढा ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र में करीब 2,200 इकाइयां हैं, जिनमें लगभग 1,000 इकाइयां तरल अपशिष्ट उत्पन्न करती हैं। बताया गया है कि इनमें से केवल करीब 377 इकाइयों का अपशिष्ट जल साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र तक पहुंच रहा था।

पहले की पर्यावरणीय जांच में बद्दी औद्योगिक क्षेत्र से होकर बहने वाली नदी के कुछ हिस्सों में दवा अवशेष, भारी धातुओं और अन्य औद्योगिक प्रदूषकों की मौजूदगी की भी जानकारी सामने आई है।

प्रदूषण सतलुज नदी तंत्र तक पहुंच रहा
पर्यावरणीय चिंता केवल सिरसा नदी तक सीमित नहीं है। औद्योगिक क्षेत्रों से गुजरने के बाद यह नदी रूपनगर क्षेत्र में सतलुज नदी में मिल जाती है। इससे प्रदूषकों के बड़े नदी तंत्र में पहुंचने की आशंका पैदा होती है।

इस मुद्दे पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का भी ध्यान गया है। एनजीटी ने सिरसा नदी में प्रदूषण और सतलुज पर इसके संभावित प्रभाव से जुड़ी चिंताओं पर सुनवाई की है।

अगस्त में पीपीसीबी द्वारा दर्ज ताजा आंकड़े संकेत देते हैं कि बैक्टीरियल प्रदूषण का बढ़ा हुआ स्तर और जल गुणवत्ता से जुड़ी अन्य चिंताएं अब भी दूर नहीं हुई हैं। नदी पर प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों और एनजीटी का ध्यान बना हुआ है, ऐसे में ये आंकड़े कई निगरानी चक्रों से जारी समस्या के अतिरिक्त प्रमाण पेश करते हैं।

By Gurpreet Singh

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