नई दिल्ली(राजीव शर्मा):उच्च शिक्षा तक पहुंच विद्यार्थी को अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने तथा शैक्षणिक और पेशेवर विकास के अवसरों का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि उच्च शिक्षा और शोध करने की आकांक्षा रखने वाले विद्यार्थियों के लिए आर्थिक कठिनाइयां और पारिवारिक दबाव बड़ी चुनौतियां बन सकते हैं।
पुडुचेरी की 27 वर्षीय शोधार्थी सुश्री प्रियंका जी अपनी पीएच.डी. कर रही हैं। यह दर्शाता है कि फैलोशिप सहायता उच्च शिक्षा और शोध को किस प्रकार सहयोग प्रदान कर सकती है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति फैलोशिप (एनएफएससी) योजना का लाभ प्राप्त करने से पहले, उच्च शिक्षा के अपने सपने को पूरा करने के दौरान प्रियंका को आर्थिक बोझ और पारिवारिक दबाव का सामना करना पड़ा। इन चुनौतियों के बावजूद वह शोध के प्रति प्रतिबद्ध रहीं और अपने करियर के विकास के लिए सरकारी फैलोशिप का उपयोग करने की आकांक्षा रखती थीं।
उन्हें एनएफएससी फैलोशिप की सहायता नवंबर 2022 में मिलनी शुरू हुई। फैलोशिप से मिली सहायता ने उनकी पीएच.डी. की यात्रा के दौरान आर्थिक कठिनाइयों को काफी हद तक कम किया और उन्हें शोध से जुड़े खर्चों को पूरा करने में सक्षम बनाया। वह 10,000 से 15,000 रूपये की महंगी शोध सामग्री बिना किसी झिझक के खरीद सकीं। इससे उन्हें अपने शोध कार्य को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिली।
फैलोशिप ने प्रियंका को विदेशों में आयोजित दो अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में शामिल होने में भी सक्षम बनाया। जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक अनुभव प्राप्त हुआ। वह अपने माता-पिता को भी अपने साथ ले जा सकीं। उनके अनुसार फैलोशिप की सहायता के बिना यह अनुभव संभव नहीं हो पाता। इसके अतिरिक्त उन्होंने देश में आयोजित 10 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए हैं।
