नई दिल्ली(राजीव शर्मा): उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह में स्थित सेलुलर जेल का दौरा किया और उन स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अत्यधिक कष्ट सहे। उन्होंने शहीद स्तंभ पर पुष्पांजलि अर्पित की, वीर सावरकर की कोठरी पर श्रद्धांजलि दी और स्वतंत्र ज्योति, सेंट्रल टॉवर, फांसी घर तथा संग्रहालय एवं प्रदर्शनी गैलरी का दौरा किया। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की वीरतापूर्ण गाथा को दर्शाने वाला लाइट एंड साउंड शो भी देखा।
दौरे के दौरान बोलते हुए, उपराष्ट्रपति ने वीर सावरकर को एक अनूठा और निडर क्रांतिकारी बताया, जिनकी असीम देशभक्ति ने भारतीय युवाओं की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। सेलुलर जेल में सावरकर के कारावास और उनके साथ हुए कठोर व्यवहार को याद करते हुए उन्होंने कहा, “स्वतंत्रता सेनानियों को जेल भेजने का उद्देश्य उनका हौसला तोड़ना था। सावरकर जी का हौसला कभी नहीं टूटा। आखिरकार, ब्रिटिश राज का ही हौसला टूट गया।” उन्होंने छुआछूत और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ लड़ाई में सावरकर के योगदान का भी उल्लेख किया।
श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के अधिक शक्तिशाली बनने के प्रयासों का उद्देश्य दूसरों पर अपनी शर्तें थोपना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि “हम कभी नहीं चाहेंगे कि दुनिया में कोई भी हम पर अपनी शर्तें थोपे; यही असली आजादी है।”
आज इससे पहले, श्री सी. पी. राधाकृष्णन के आईएनएस उत्क्रोश, श्री विजय पुरम पहुंचने पर अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह के उप-राज्यपाल एडमिरल देवेंद्र कुमार जोशी (अवकाश प्राप्त) ने वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्हें औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ भी दिया गया।
श्री सी. पी. राधाकृष्णन अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह के दो-दिवसीय दौरे पर हैं। इस दौरान वे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत सहित विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप का दौरा भी करेंगे।
