पंजाब के दिड़बा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते गांव कौहरियां में राज्य सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच एक बड़ा और अभूतपूर्व टकराव देखने को मिला है। यहां अपनी मांगों और सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा करने को लेकर अंदोलन कर रहे शिक्षकों को गुरुद्वारा साहिब में बंधक बना दिया गया है।
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने और उनके कथित झूठे वादों का पर्दाफाश करने के लिए गांव के गुरुद्वारा साहिब में एकत्र हुए करीब 180 शिक्षकों और उनके परिवारों को प्रशासन द्वारा कथित तौर पर गुरुद्वारा साहिब के भीतर ही बंद कर दिया गया। गुरुद्वारा साहिब के मुख्य द्वारों पर ताला लगा दिए जाने के कारण सभी शिक्षक अंदर ही फंस गए, जिसके बाद से इलाके में स्थिति बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण बनी हुई है।
घर-घर जाकर पर्चे बांटने और पोस्टर चिपकाने की थी योजना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘3704 टीचर्स यूनियन पंजाब’ और ‘ETT TET पास टीचर्स एसोसिएशन जय सिंह वाला’ के लगभग 180 शिक्षक अपने परिवारों के साथ कौहरियां में इकट्ठा हुए थे। इस मुहिम को ‘भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) एकता उगराहां’ और ‘गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन (जीटीयू) पंजाब’ का भी पूरा समर्थन हासिल था।
इन सभी का उद्देश्य वित्त मंत्री हरपाल चीमा के हलके के गांवों (कौहरियां और शादीहरी) में घर-घर जाकर सरकार के खिलाफ प्रचार करना, पर्चे बांटना और पोस्टर चिपकाना था। लेकिन, शिक्षकों का यह अभियान जमीन पर शुरू होने से ठीक पहले ही भारी पुलिस बल और प्रशासनिक मुस्तैदी के चलते गुरुद्वारा साहिब के भीतर ही रोक दिया गया।
“2022 से पहले किए वादे पूरे करे सरकार”
इस कार्रवाई के विरोध में गुरुद्वारा साहिब के भीतर से ही शिक्षक नेताओं ने पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। ‘3704 टीचर्स यूनियन’ के राज्य अध्यक्ष हरजिंदर सिंह और ‘180 ई.टी.टी. टीचर्स यूनियन’ के राज्य अध्यक्ष कमल ठाकुर ने कहा कि हम जनता को यह बताने आए थे कि साल 2022 के चुनावों से पहले हरपाल चीमा और उनकी पार्टी ने पंजाब की जनता से क्या वादे किए थे।
उन्होंने नशा मुक्त पंजाब, बेहतर पंजाब, बेरोजगारों को पक्की नौकरियां, किसानों को फसलों पर एमएसपी (MSP) और बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा देने की बात कही थी, लेकिन आज जमीनी हकीकत कुछ और ही है।”
वित्त विभाग पर फाइलें दबाकर समय बर्बाद करने का आरोप
यूनियन के वरिष्ठ राज्य नेताओं गौरव कांत और जीवनजोत सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव ने 3704 और 180 ETT शिक्षकों की जायज मांगों के पक्ष में अपनी सकारात्मक रिपोर्ट बहुत पहले ही वित्त विभाग को भेज दी है। इसके बावजूद, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा केवल इस मुद्दे पर लंबी बहसें करके और तारीखें देकर जानबूझकर समय बर्बाद कर रहे हैं, जिससे शिक्षकों में भारी निराशा है।
शिक्षकों ने किया आगे भी संघर्ष करने का ऐलान
शिक्षकों को बंधक बनाए जाने (अंदर बंद करने) की इस कार्रवाई के बाद शिक्षक और किसान यूनियनों के तेवर और कड़े हो गए हैं। राज्यस्तरीय नेताओं ने दोटूक शब्दों में घोषणा की है कि प्रशासन चाहे जितने दमनकारी हथकंडे अपना ले, जब तक शिक्षकों के मुद्दों का स्थायी हल नहीं हो जाता, तब तक वित्त मंत्री के गृह हलके दिड़बा में उनका यह तीखा संघर्ष लगातार जारी रहेगा।
