गुरुग्राम में अडानी रियल्टी के 31 वर्षीय मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के मामले में पुलिस की लापरवाही को लेकर कार्रवाई तेज हो गई है। युवराज का शव बादशाहपुर इलाके में 10 सितंबर को मिला था। शव की पहचान नहीं होने के कारण 14 सितंबर को उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। बाद में सामने आया कि यह शव युवराज का था, जो 6 सितंबर से लापता था। मामले में उसकी बहन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
पुलिस की कार्रवाई के तहत बादशाहपुर थाने के जांच अधिकारी एएसआई साहुन खान को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। अब एसएचओ राजेश बागड़ी समेत अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। गुरुग्राम पुलिस ने unidentified body से जुड़ी जानकारी समय पर संबंधित पुलिस इकाइयों और पड़ोसी राज्यों तक नहीं पहुंचाने को लेकर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है। पुलिस के मुताबिक, मामले में कम से कम पांच और अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
युवराज दिल्ली के सरिता विहार का रहने वाला था। वह 6 सितंबर को गुरुग्राम आया था और इसके बाद लापता हो गया। उसके परिवार ने 11 सितंबर को दिल्ली के लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। इसी बीच गुरुग्राम पुलिस को 10 सितंबर को बादशाहपुर के पास एक नाले से अज्ञात शव मिला। शव काफी खराब हालत में था। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद उसे अज्ञात मानकर 14 सितंबर को अंतिम संस्कार कर दिया।
परिवार का आरोप है कि शव की फोटो और जानकारी ZIPNET पर समय रहते अपलोड नहीं की गई। इसी वजह से युवराज के परिवार को उसकी पहचान करने का मौका नहीं मिला। दिल्ली पुलिस की ओर से युवराज की गुमशुदगी की जानकारी ZIPNET पर 12 सितंबर को अपलोड की गई थी, लेकिन गुरुग्राम पुलिस की ओर से मिले अज्ञात शव की जानकारी को लेकर प्रक्रिया में देरी के आरोप सामने आए। पुलिस ने हालांकि कहा था कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत जानकारी CCTNS पर दर्ज की गई थी।
मामले में युवराज की पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, दोनों ने पूछताछ में युवराज की हत्या करने की बात स्वीकार की है। पुलिस का आरोप है कि युवराज की हत्या 6 सितंबर को गुरुग्राम में की गई और शव को बाद में बादशाहपुर के पास फेंक दिया गया। हालांकि, आरोपियों के कथित बयानों और मामले के अन्य पहलुओं का अंतिम परीक्षण अदालत में होना बाकी है।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में जांच प्रक्रिया में हुई लापरवाहियों को स्वीकार करते हुए माफी मांगी है। हलफनामे में अज्ञात शव की जानकारी CCTNS में समय पर दर्ज नहीं करने, 24 घंटे के भीतर कार्यकारी मजिस्ट्रेट को सूचना नहीं देने और पड़ोसी राज्यों को सूचना नहीं भेजने जैसी प्रक्रियागत कमियों का उल्लेख किया गया है। पुलिस ने हालांकि किसी दुर्भावनापूर्ण मंशा से इनकार किया है।
इस घटना के बाद गुरुग्राम पुलिस ने अज्ञात शवों की पहचान को लेकर नई व्यवस्था भी लागू की है। अब ऐसे शव मिलने पर जानकारी जिले के सभी थानों, पड़ोसी जिलों, हरियाणा पुलिस मुख्यालय और दिल्ली पुलिस तक अनिवार्य रूप से पहुंचाई जाएगी। पुलिस कंट्रोल रूम में एक विशेष नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी चूक दोबारा न हो।
