Gen Z प्रदर्शनों पर भागवत के समर्थन में शशि थरूर, बोले- लोकतंत्र में असहमति जरूरी

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने RSS प्रमुख मोहन भागवत की Gen Z के प्रदर्शनों पर हालिया टिप्पणियों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के प्रदर्शनों को स्वतः राष्ट्रविरोधी करार देने के बजाय लोकतांत्रिक भागीदारी के वैध हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।

थरूर ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं को प्रदर्शन करने का अधिकार है—भागवत की यह टिप्पणी उन्हें विशेष रूप से महत्वपूर्ण लगी। कांग्रेस नेता के अनुसार, जब पारंपरिक संस्थान सत्ता में बैठे लोगों तक जनता की चिंताओं को पर्याप्त रूप से नहीं पहुंचा पाते, तब सार्वजनिक प्रदर्शन नागरिकों को अपनी बात रखने का माध्यम देते हैं।

इंडिया इंटरनेशनल मॉडल यूनाइटेड नेशंस (IIMUN) में बातचीत के दौरान थरूर ने कहा कि प्रदर्शन का मूल उद्देश्य सरल है—यह सुनिश्चित करना कि नागरिकों की आवाज सुनी जाए।

‘प्रदर्शन दबाव कम करने का माध्यम’
थरूर ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में जनता की नाराजगी व्यक्त करने के रास्ते होने चाहिए।

उन्होंने कहा, “हर लोकतंत्र में लोगों के प्रदर्शन करने के लिए अवसर होने चाहिए।” उन्होंने प्रदर्शनों को एक तरह का ‘प्रेशर वाल्व’ बताया, जिससे जनता की निराशा दबने के बजाय बाहर निकल सके।

थरूर के अनुसार, संसद और मुख्यधारा का मीडिया समाज के हर वर्ग को अपनी शिकायतें और चिंताएं व्यक्त करने के लिए हमेशा पर्याप्त जगह नहीं देते। उन्होंने संकेत दिया कि अभिव्यक्ति के अन्य रास्ते बंद करने से लोगों का असंतोष और मजबूत हो सकता है।

कांग्रेस सांसद ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े प्रदर्शनों पर अपनी पिछली टिप्पणियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बड़ी संख्या में समर्थक जुटाने के बाद सरकार द्वारा संगठन के X अकाउंट पर पाबंदी लगाने के फैसले का उन्होंने विरोध किया था।

उन्होंने कहा कि उनका रुख इस व्यापक लोकतांत्रिक सिद्धांत पर आधारित था कि नागरिकों के पास अपनी आवाज उठाने के वैध माध्यम होने चाहिए।

ऑनलाइन प्रदर्शन से मुख्यधारा की राजनीति तक
थरूर ने कहा कि इसके बाद उन्होंने प्रदर्शनकारियों को सोशल मीडिया से आगे बढ़कर लोकतांत्रिक संस्थानों और राजनीतिक मंचों से जुड़ने की सलाह दी।

उन्होंने सुझाव दिया कि प्रदर्शनकारियों को विपक्षी दलों, मुख्यधारा के मीडिया और अदालतों का रुख करना चाहिए। साथ ही, उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के जरिए अपनी मांगें सड़कों पर भी उठानी चाहिए।

कांग्रेस सांसद ने पुलिस कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर जाने की घटना को भी याद किया। उन्होंने कहा कि वहां उन्होंने युवा प्रदर्शनकारियों से बात की और उनसे कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का वैध अधिकार है।

‘देश में कुछ बदला है’
थरूर ने प्रदर्शनों के व्यापक राजनीतिक महत्व पर भी चर्चा की।

उन्होंने कहा कि हालिया लामबंदी पहले के कुछ आंदोलनों से अलग थी, क्योंकि इसे आसानी से केवल किसी एक समुदाय या सीमित वर्ग के हितों से जुड़ा आंदोलन नहीं बताया जा सकता।

थरूर के अनुसार, शहरी, मध्यमवर्गीय और मुख्य रूप से हिंदी भाषी पृष्ठभूमि वाले युवाओं की भागीदारी, खासकर उत्तरी राज्यों में, ने इन प्रदर्शनों को व्यापक राजनीतिक आयाम दिया है।

उन्होंने कहा कि इन घटनाक्रमों का असर उन राजनीतिक दलों पर पड़ सकता है, जो परंपरागत रूप से इन मतदाता वर्गों के मजबूत समर्थन पर निर्भर रहे हैं।

थरूर ने बातचीत के दौरान कहा, “इस देश में कुछ बदला है।” उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को युवा मतदाताओं के विचारों पर अधिक ध्यान देना होगा और यह मानकर नहीं चल सकते कि जनता की भावनाएं हमेशा एक जैसी बनी रहेंगी।

उनकी ये टिप्पणियां भागवत द्वारा Gen Z के प्रदर्शन करने के लोकतांत्रिक अधिकार का बचाव किए जाने के एक दिन बाद आई हैं। इससे लोकतंत्र में असहमति के लिए जगह देने के मुद्दे पर RSS प्रमुख और कांग्रेस सांसद के बीच एक असामान्य समानता देखने को मिली है.

By Rajeev Sharma

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *