नई दिल्ली(राजीव शर्मा):भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की छात्रवृत्तियों और फेलोशिप की राशि राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) के माध्यम से सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाई गई। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर की छात्रवृत्ति और फेलोशिप के केंद्रीकृत वितरण के लिए डीबीटी प्रणाली का शुभारंभ किया।
नई दिल्ली स्थित पूसा संस्थान के परिसर के बी.पी. पाल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में इस पहल का शुभारंभ करते हुए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल के माध्यम से पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियों और फेलोशिप की राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।
इस व्यवस्था का उद्देश्य छात्रवृत्ति और फेलोशिप वितरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुगम, कुशल और समयबद्ध बनाना है। इससे वित्तीय सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुंचेगी और वितरण प्रक्रिया में जवाबदेही भी बढ़ेगी।
शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के दौरान ICAR के ज़रिए अलग-अलग कृषि विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने वाले 6000 से ज़्यादा छात्रों को, जिन्हें छात्रवृत्ति या फ़ेलोशिप मंज़ूर की गई है, इस आर्थिक मदद के सीधे भुगतान से फ़ायदा होगा। बाद में यह पहल भविष्य में ICAR के ज़रिए दाखिला लेने वाले उन सभी योग्य छात्रों को दी जाएगी जिन्हें छात्रवृत्ति या फ़ेलोशिप मिलेगी। इस पहल के तहत ₹21.35 करोड़ की राशि बांटी गई, जिससे लाभार्थियों को समय पर आर्थिक मदद मिलेगी और कृषि व संबंधित विज्ञानों में उच्च शिक्षा और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए ICAR की प्रतिबद्धता और मज़बूत होगी। इस पहल के साथ राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) के माध्यम से पात्र विद्यार्थियों को ICAR की छात्रवृत्तियों एवं फेलोशिप के वितरण की शुरुआत हुई है। इस पहल का उद्देश्य छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना तथा वित्तीय सहायता को पारदर्शी, कुशल और समयबद्ध तरीके से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित करना है।
केन्द्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस पहल के लिए ICAR के प्रयासों की तारीफ़ की। उन्होंने कहा कि यह पहल छात्रों को बिना किसी रुकावट के अपनी पढ़ाई जारी रखने में बहुत मददगार साबित होगी। उन्होंने कहा कि ये पहल ऐसा शैक्षणिक माहौल बनाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं जो छात्रों को बिना किसी आर्थिक तंगी के अपनी शैक्षिक आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद करती हैं, साथ ही उन्हें कृषि और संबंधित विज्ञानों के उभरते और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में विशेष ज्ञान और विशेषज्ञता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने कहा कि DBT मैकेनिज़्म के ज़रिए छात्रों के बैंक खातों में छात्रवृत्ति और फ़ेलोशिप की मदद सीधे भेजने से वितरण प्रक्रिया की दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही और बढ़ेगी, साथ ही योग्य छात्रों को समय पर आर्थिक मदद मिलना सुनिश्चित होगी।
कृषि राज्यमंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि विद्यार्थियों को समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना उन्हें बिना किसी बाधा के शिक्षा और अनुसंधान जारी रखने में महत्वपूर्ण सहयोग देगा। केंद्रीकृत डीबीटी के माध्यम से छात्रवृत्ति एवं फेलोशिप की राशि समय पर मिलने से विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रखने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के बारे में आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि आईसीएआर देश में कृषि शिक्षा को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कृषि एवं संबद्ध विज्ञानों में उच्च शिक्षा के लिए प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आकर्षित और प्रोत्साहित करने तथा शिक्षण एवं अनुसंधान में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए आईसीएआर विभिन्न स्तरों पर कई प्रकार की छात्रवृत्तियां और फेलोशिप प्रदान करता है। इन योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक बाधाओं से मुक्त होकर अपनी शैक्षणिक आकांक्षाएं पूरी करने और कृषि एवं संबद्ध विज्ञानों के उभरते तथा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि धनराशि के सीधे बैंक खातों में पहुंचने से वित्तीय सहायता समय पर मिला करेगी और पूरी व्यवस्था की दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (डेयर) के अतिरिक्त सचिव और आईसीएआर के वित्त सलाहकार श्री संदीप सरकार ने बताया कि शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में आईसीएआर के माध्यम से प्रवेश पाने वाले स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएच.डी. स्तर के करीब 6,000 विद्यार्थी, जिन्हें छात्रवृत्ति अथवा फेलोशिप स्वीकृत की गई है, इस नई व्यवस्था से सीधे लाभान्वित होंगे।
इस पहल के तहत करीब 21.35 करोड़ रुपये की राशि विद्यार्थियों को वितरित की जाएगी। भविष्य में इस व्यवस्था को आईसीएआर की छात्रवृत्ति या फेलोशिप के लिए चयनित सभी पात्र विद्यार्थियों तक विस्तारित किया जाएगा।
