संशोधित FDI ढांचे से सीमा साझा करने वाले देशों से गैर-नियंत्रणकारी निवेश को मिलेगी सुविधा

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): संशोधित ढांचे के अंतर्गत 20 अगस्त 2026 तक कुल 29 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए हैं, जिनमें 4,895.65 करोड़ रुपये का प्रस्तावित निवेश शामिल है। इस निवेश में सूचना प्रौद्योगिकी, एआई, सूचना एवं संचार, विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, डेटा सेंटर और परिवहन सेवाओं सहित कई क्षेत्र शामिल हैं।

मॉरीशस, संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण कोरिया गणराज्य, जापान, सिंगापुर, लक्ज़मबर्ग और केमैन द्वीप समूह सहित विभिन्न देशों के निवेशकों/संस्थाओं द्वारा 29 निवेश प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए है।

संशोधित ढांचा भारत में विदेशी निवेश के प्रवाह को सुगम बनाता है, क्योंकि इसमें 10 प्रतिशत तक के गैर-नियंत्रणकारी भूमि सीमा साझा करने वाले देशों (एलबीसी) के स्वामित्व वाले मामलों में पूर्व सरकारी अनुमोदन की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। यह सुधार निवेशकों को अधिक निश्चितता प्रदान करता है, लेनदेन में लगने वाले समय को कम करता है और भारत में व्यापार करने की सुगमता को बढाता है।

वर्ष 2026 के प्रेस नोट-2 और इसके परिणामस्वरूप 1 मई 2026 को अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) नियम, 2019 में किए गए संशोधन के तहत अब लाभकारी स्वामित्व की जांच निवेशक इकाई के स्तर पर की जाती है। भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से 10 प्रतिशत तक गैर-नियंत्रणकारी स्वामित्व रखने वाले निवेशक, संबंधित क्षेत्रीय सीमा, प्रवेश मार्ग और अन्य लागू शर्तों के अधीन स्वचालित मार्ग से निवेश कर सकते हैं। निवेशक इकाई द्वारा सरकार को संबंधित जानकारी प्रदान किए जाने के बाद, किसी अन्य अनुमोदन की आवश्यकता के बिना निवेश किया जा सकता है।

इससे पहले, भारत के भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से लाभकारी स्वामित्व रखने वाले विदेशी निवेशकों को वर्ष 2020 के प्रेस नोट-3 के तहत पूर्व सरकारी अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक था, भले ही ऐसे देशों की स्वामित्व में हिस्सेदारी बहुत कम ही क्यों न हो। यह स्थिति लंबे समय से उन निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी, जो निवेश प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता और सुगमता चाहते थे।

By Rajeev Sharma

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