बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन(एमओयू) के आदान-प्रदान से नियामक अभिसरण और एकीकृत गुणवत्ता बुनियादी ढांचे को मजबूती मिली

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):भारतीय गुणवत्ता परिषद(क्यूसीआई) के संघटक बोर्ड, राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड(एनएबीएल) ने नई दिल्ली के होटल अशोक में आयोजित ‘गुणवत्ता समन्वय – बहुपक्षीय एमओयू आदान-प्रदान समारोह’ के दौरान एकीकृत मूल्यांकन कार्यक्रम के तहत मोबाइल खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए भारत की अपनी तरह की पहली प्रत्यायन योजना की शुरुआत की है।

इस पहल का उद्देश्य समुदायों के करीब विश्वसनीय, गुणवत्ता-आश्वासन और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खाद्य परीक्षण सेवाओं की पहुंच का विस्तार करना है। कार्यक्रम में भाग लेने वाले संगठनों के बीच एक बहुपक्षीय समझौता ज्ञापनों(एमओयू) का आदान-प्रदान भी हुआ, जिससे अधिक नियामक अभिसरण, समन्वित मूल्यांकन तथा अधिक एकीकृत एवं कुशल गुणवत्ता बुनियादी ढांचे की दिशा में प्रयासों को मजबूती मिली।

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग(डीपीआईआईटी) के सचिव श्री अमरदीप सिंह भाटिया के साथ-साथ भारतीय गुणवत्ता परिषद(क्यूसीआई) के संघटक बोर्ड, राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड(एनएबीएल), एकीकृत मूल्यांकन ढांचे(आईएएफ) से जुड़े नियामक प्राधिकरणों और कमोडिटी बोर्डों के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

एनएबीएल द्वारा विकसित यह प्रत्यायन योजना मोबाइल खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए एक ढांचा तैयार करती है, जिसके माध्यम से समुदायों के निकट विश्वसनीय, गुणवत्ता-आश्वासन और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परीक्षण सेवाएं प्रदान की जा सकें। परंपरागत प्रयोगशालाओं से आगे बढ़कर मान्यता प्राप्त खाद्य परीक्षण का विस्तार करके, इस पहल से खाद्य सुरक्षा निगरानी को मजबूत करने, गुणवत्ता परीक्षण तक पहुंच में सुधार लाने, तेज नियामक हस्तक्षेपों में सहायता करने और उपभोक्ताओं के विश्वास को बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन(एमओयू) के आदान-प्रदान के अवसर पर विभिन्न भागीदार संगठनों ने समन्वित मूल्यांकन, नियामक सामंजस्य तथा एकीकृत मूल्यांकन ढांचे(आईएएफ) को सुदृढ़ करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस पहल का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रियाओं में दोहराव को कम करना, पारस्परिक मान्यता को बढ़ावा देना, नियामक दक्षता में सुधार करना तथा उच्च गुणवत्ता और अनुपालन मानकों को बनाए रखते हुए कारोबार सुगमता को बढ़ावा देना है।

सभा को संबोधित करते हुए, डीपीआईआईटी के सचिव श्री अमरदीप सिंह भाटिया ने संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में गुणवत्ता को शामिल करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘गुणवत्ता समन्वय’ जैसी पहल गुणवत्ता-संचालित प्रथाओं को बढ़ावा देकर वर्ष 2047 की ओर भारत की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

एनएबीएल के अध्यक्ष डॉ. संदीप शाह ने प्रत्यायन योजना और एकीकृत मूल्यांकन ढांचे(आईएएफ) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत के विकास में सहयोगात्मक मूल्यांकन प्रक्रियाओं और विश्वसनीय संस्थानों की भूमिका पर जोर दिया।

भारतीय गुणवत्ता परिषद(क्यूसीआई) के महासचिव श्री चक्रवर्ती टी. कन्नन ने एक मजबूत गुणवत्ता पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में सहयोग, अभिसरण और पारस्परिक विश्वास के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘गुणवत्ता समन्वय’ पहल, मोबाइल खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं की प्रत्यायन योजना के साथ मिलकर भारत के गुणवत्ता बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और समुदायों के करीब गुणवत्ता-आश्वासन परीक्षण सेवाएं पहुंचाने में योगदान देगी।

‘गुणवत्ता समन्वय’ का सफल आयोजन सहयोगी गुणवत्ता पहलों को आगे बढ़ाने, नियामक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने, हितधारकों के विश्वास को बढ़ाने और भारत के गुणवत्ता बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के प्रति क्यूसीआई और एनएबीएल की प्रतिबद्धता को और मजबूती प्रदान करता है।

By Rajeev Sharma

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