नई दिल्ली(राजीव शर्मा): सरकार लद्दाख में ग्लेशियर, ग्लेशियल झीलों, बर्फबारी, जल संसाधनों और भूस्खलन की निगरानी के लिए सैटेलाइट और जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है। इन गतिविधियों का विवरण नीचे दिया गया है:
ग्लेशियर सूचीकरण : वर्ष 2020-23 के उपग्रह आंकड़ों का उपयोग करते हुए लद्दाख के 2,000 से अधिक ग्लेशियरों का डेटाबेस तैयार किया गया है। साथ ही, दो दशकों से अधिक की अवधि में 1,000 से अधिक ग्लेशियरों के क्षेत्रफल में हुए परिवर्तनों का मानचित्रण किया गया है।
ग्लेशियल झीलें: जल शक्ति मंत्रालय की राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना के अंतर्गत लद्दाख में 0.25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाली 3,219 ग्लेशियल झीलों की सूची तैयार की गई है। लद्दाख की कटकर और सुरु सहित उच्च जोखिम वाली झीलों के लिए ग्लेशियल झील विस्फोटजनित बाढ़ (जीएलओएफ) की जोखिम मॉडलिंग भी की गई है।
बर्फ से ढके क्षेत्र का मानचित्रण : वर्ष 2019 से सितम्बर 2025 तक लद्दाख सहित भारतीय हिमालय क्षेत्र का उपग्रह-आधारित बर्फ से ढके क्षेत्र का दैनिक मानचित्रण किया गया है।
गीली जमीन: जम्मू विश्वविद्यालय के सहयोग से लद्दाख में 4,912 गीली जमीनों का मानचित्रण किया गया है।
जल निकाय: 5.0 हेक्टेयर से अधिक सतही क्षेत्रफल वाले लगभग 41 जल निकायों की उपग्रह आंकड़ों के माध्यम से निगरानी और अद्यतन किया जा रहा है। यह जानकारी 2012 से भुवन वाटरबॉडी सूचना प्रणाली के अंतर्गत उपलब्ध कराई जाती है।
भूस्खलन: इसरो उपग्रह आंकड़ों का उपयोग कर लद्दाख में भूस्खलन की सूची समय-समय पर अपडेट कर रहा है।
पिछले पाँच वर्षों में लद्दाख में शुरू की गई उपग्रह-आधारित परियोजनाओं में शामिल हैं:
क्रायोस्फीयर विज्ञान एवं एप्लिकेशन कार्यक्रम (सीएपी): यह इसरो की एक वर्तमान परियोजना है, जिसके अंतर्गत राज्य सरकारों की एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों तथा अन्य अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से लद्दाख सहित हिमालय-काराकोरम क्षेत्र के बर्फ वाले क्षेत्रों और ग्लेशियरों की निगरानी की जा रही है।
लद्दाख विशिष्ट मॉडलिंग एवं अंतरिक्ष एप्लिकेशन्स (एलएएमए): इसरो/अंतरिक्ष विभाग द्वारा लद्दाख केन्द्र शासित प्रदेश के लिए एक परियोजना संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत अंतरिक्ष-आधारित आंकड़ों पर आधारित मौसम पूर्वानुमान मॉडल, भारी वर्षा चेतावनी प्रणाली तथा हिम पिघलने, ग्लेशियरों के पिघलने से होने वाले प्रवाह और नदी प्रवाह के आकलन हेतु हाइड्रोलॉजिकल सिमुलेशन विकसित किए जा रहे हैं।
सैटेलाइट इंटीग्रेटेड लैंडस्लाइड असेसमेंट एंड अलर्ट सिस्टम (एसआईएलएएएस): इसरो के आपदा प्रबंधन सहायता कार्यक्रम (डीएमएसपी) के अंतर्गत वर्ष 2023 से यह परियोजना संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य लद्दाख में उपग्रह आंकड़ों के माध्यम से भूस्खलनों का मानचित्रण करना तथा गांव-स्तर पर भूस्खलन संबंधी चेतावनी जारी करना है।
राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना, 2017-2025: जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग द्वारा प्रायोजित इस परियोजना के अंतर्गत हिमनदीय झीलों का मानचित्रण, हिमनदीय झील विस्फोटजनित बाढ़ (जीएलओएफ) जोखिम आकलन, हिमावरण की निगरानी, वाष्पोत्सर्जन तथा हाइड्रोलॉजिकल सूखे का आकलन किया गया है।
जियो-लद्दाख: इसरो द्वारा ‘केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए स्थानिक डेटा अवसंरचना (एसडीआई) जियोपोर्टल एवं संबद्ध डेटाबेस विकास’ परियोजना के तहत ‘जियो-लद्दाख’ जियोपोर्टल विकसित किया गया है। इसके साथ ही प्राकृतिक संसाधनों, ऊर्जा, अवसंरचना तथा प्रशासनिक सीमाओं का भू-स्थानिक डेटाबेस तैयार किया गया है और क्षमता निर्माण संबंधी गतिविधियां भी संचालित की गई हैं।
इसरो/डीओएस जीएलओएफ, अत्यधिक मौसम संबंधी घटनाओं तथा भूस्खलनों के लिए अंतरिक्ष-आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ बनाने हेतु उन्नत अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों में संलग्न है। इन प्रयासों से प्राप्त परिणाम लद्दाख के लिए भी लाभकारी होंगे।
प्रमुख आपदाओं के दौरान प्रतिक्रिया चरण में इसरो/अंतरिक्ष विभाग लद्दाख केन्द्र शासित प्रदेश को बाढ़, जीएलओएफ घटनाओं तथा वनाग्नि से संबंधित अंतरिक्ष-आधारित जानकारी उपलब्ध कराता है। विकेन्द्रीकृत योजना के लिए अंतरिक्ष-आधारित सूचना सहायता (एसआईएसडीपी) कार्यक्रम के अंतर्गत इसरो/अंतरिक्ष विभाग ने 1:10,000 के पैमाने पर भूमि उपयोग/भूमि आवरण, जल निकासी तंत्र, बस्तियों, ढाल तथा रेल एवं सड़क अवसंरचना का मानचित्रण किया है। यह जानकारी विकासात्मक योजना निर्माण के लिए भुवन-पंचायत पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है।
सतत विकास और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग का विस्तार करने हेतु क्षमता निर्माण के अंतर्गत इसरो/अंतरिक्ष विभाग समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। इन कार्यक्रमों से लद्दाख के प्रतिभागियों को भी लाभ प्राप्त हुआ है।
यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
