नई दिल्ली(राजीव शर्मा): गगनयान मिशन के अंतर्गत मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए आवश्यक मानकों को प्रमाणित करने वाली विकास गतिविधियों में निम्नलिखित शामिल हैं:
मानव रेटेड प्रक्षेपण यान (एचएलवीएम3): सभी प्रपल्शन चरणों और संरचनाओं का विकास तथा जमीनी परीक्षण पूरा हो चुका है।
ऑर्बिटल मॉड्यूल: क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल की प्रपल्शन प्रणालियों का विकास, परीक्षण और प्रमाणीकरण पूरा हो चुका है। पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन रक्षक प्रणाली (ईसीएलएसएस) का इंजीनियरिंग मॉडल तैयार किया गया है। अवरोहण प्रणाली, क्रू मॉड्यूल को सीधा रखने वाली प्रणाली, ताप सुरक्षा प्रणाली और एंड-टू-एंड एवियोनिक्स का विकास और परीक्षण भी पूरा हो चुका है।
क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस): पांच प्रकार की मोटर विकसित कर उनका स्थैतिक परीक्षण किया गया है। सीईएस की सभी संरचनाएं तैयार कर प्रमाणित की जा चुकी हैं।
बुनियादी ढांचा: ऑर्बिटल मॉड्यूल तैयारी सुविधा, गगनयान नियंत्रण केंद्र, गगनयान नियंत्रण सुविधा, अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र तथा दूसरे प्रक्षेपण परिसर में आवश्यक संशोधन पूरे किए जा चुके हैं।
परीक्षण मिशन: उड़ान के दौरान क्रू एस्केप सिस्टम के सत्यापन के लिए पहला टेस्ट व्हीकल मिशन टीवी-डी1 सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। अवरोहण प्रणाली के परीक्षण के लिए इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट-01 (आईएडीटी-01) और आईएडीटी-02 भी सफलतापूर्वक पूरे किए गए हैं। टीवी-डी2 मिशन की तैयारियां जारी हैं।
उड़ान संचालन और संचार नेटवर्क: ग्राउंड नेटवर्क का कॉन्फिगरेशन अंतिम रूप दिया जा चुका है। आईडीआरएसएस-1 फीडर स्टेशन और स्थलीय संचार लिंक स्थापित किए जा चुके हैं। अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ सहयोग के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
क्रू रिकवरी ऑपरेशन: रिकवरी संसाधनों को अंतिम रूप दे दिया गया है और रिकवरी योजना तैयार कर ली गई है।
इसके साथ ही गगनयान के लिए विकसित नई प्रणालियों के प्रदर्शन हेतु विभिन्न जमीनी योग्यता परीक्षण भी जारी हैं।
व्योममित्र हाफ-ह्यूमनॉइड सहित पहली बार विकसित की जा रही विभिन्न तकनीकों को मान्य करने के लिए पहला मानव रहित प्रायोगिक मिशन 2026 की चौथी तिमाही में लक्षित है। इसके बाद पहले मानवयुक्त मिशन जैसी संरचना वाले दो और मानवरहित मिशन तथा पहला मानवयुक्त गगनयान मिशन वर्ष 2027 तक भेजने का लक्ष्य रखा गया है।
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) को वर्ष 2035 तक संचालन में लाने का लक्ष्य है। इसरो ने पांच मॉड्यूल वाले भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की समग्र संरचना तैयार कर ली है। सरकार ने बीएएस-01 के पहले मॉड्यूल के विकास और प्रक्षेपण को मंजूरी दे दी है। बीएएस-01 की सिस्टम इंजीनियरिंग तथा विभिन्न उप-प्रणालियों की तकनीकी विकास गतिविधियां इसरो के विभिन्न केंद्रों और इकाइयों में जारी हैं।
मंत्रिमंडल ने सितंबर 2024 में 8 मिशनों को पूरा करने के लिए 20,193 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन को मंजूरी दी थी।
इसरो मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के विभिन्न क्षेत्रों में कई अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सहयोग से गगनयान मिशनों के लिए नेटवर्क संचालन सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी के साथ समझौते के अंतर्गत गगनयान मिशनों के लिए क्रू और क्रू मॉड्यूल की रिकवरी में सहयोग किया जा रहा है। फ्रांस की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी के सहयोग से इसरो के फ्लाइट सर्जनों और ग्राउंड सपोर्ट टीमों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा, इसरो और रूस की राज्य अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के बीच मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम में सहयोग के लिए समझौता हुआ है। इसके अंतर्गत क्रू सीट, व्यूपोर्ट, फ्लाइट सूट, विंड टनल परीक्षण जैसी प्रणालियों की आपूर्ति के साथ-साथ पहले बैच के गगनयात्रियों को गागरिन कॉस्मोनॉट प्रशिक्षण केंद्र में सामान्य अंतरिक्ष उड़ान प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
यह जानकारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
