स्पेस स्टार्टअप्स को बढ़ावा: संसद में अंतरिक्ष वेंचर कैपिटल फंड पर चर्चा

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): सेबी से 31 अक्टूबर 2025 को मंजूरी मिलने के बाद फंड का संचालन शुरू हो गया है। 24 जुलाई 2026 तक योगदान समझौते के अंतर्गत इन-एसपीएसी ने इस फंड में कुल 188.93 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। इसमें वित्त वर्ष 2026-27 के 182.87 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। अंतरिक्ष वेंचर कैपिटल फंड की निवेश समिति ने निवेश के लिए तीन स्टार्टअप्स का चयन किया है।

अंतरिक्ष वेंचर कैपिटल फंड को सेबी-पंजीकृत कैटेगरी-II वैकल्पिक निवेश फंड के रूप में स्थापित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य उभरते हुए स्पेस-टेक स्टार्टअप्स को इक्विटी पूंजी उपलब्ध कराना है, ताकि वे नई तकनीकों का विकास, उनका व्यावसायीकरण और अपने परिचालन का विस्तार कर सकें।

निवेश फंड के निवेश उद्देश्य और निवेश रणनीति (खंड 2.7.2 और 2.7.3) के अनुरूप किए जाते हैं। यह सेबी (वैकल्पिक निवेश निधि) विनियमों, निजी प्लेसमेंट ज्ञापन और अन्य फंड दस्तावेजों के लागू प्रावधानों के अधीन हैं।

खंड 2.7.2 और 2.7.3 को नीचे के रूप में पुन: प्रस्तुत किया गया है:

2.7.2: फंड का मुख्य उद्देश्य विभिन्न चरणों में मौजूद उभरते स्पेस-टेक स्टार्टअप्स को आवश्यक इक्विटी पूंजी उपलब्ध कराना, उनके परिचालन का विस्तार करना, नई तकनीकों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देना और देश की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं में उनके योगदान को मजबूत करना है।

2.7.3: फंड विभिन्न चरणों में मौजूद स्पेस-टेक स्टार्टअप्स में निवेश करेगा, ताकि उनके परिचालन का विस्तार, नई तकनीकों का व्यावसायीकरण और भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के विकास में उनकी भागीदारी को बढ़ावा मिल सके। सभी निवेश एआईएफ विनियमों में निर्धारित निवेश संबंधी प्रावधानों के अनुसार किए जाएंगे।

योगदान समझौते के अंतर्गत फंड मैनेजर की ओर से बताई गई निवेश आवश्यकताओं के आधार पर इन-एसपीएसी ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 182.87 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। फिलहाल यह अनुमान उपलब्ध नहीं है कि केवल इस वेंचर कैपिटल फंड के कारण देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में कितनी प्रतिशत वृद्धि होगी। इस फंड का उद्देश्य पात्र अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप्स को तकनीक विकास, व्यावसायीकरण और परिचालन विस्तार के लिए पूंजी उपलब्ध कराना है। अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था पर इसका समग्र प्रभाव पोर्टफोलियो में शामिल स्टार्टअप्स और कंपनियों के प्रदर्शन के आधार पर समय के साथ आंका जाएगा।

यह जानकारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

By Rajeev Sharma

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