नई दिल्ली(राजीव शर्मा):भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) पांच मॉड्यूल वाला देश का पहला स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन होगा। इसे 2035 तक स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। अक्टूबर 2024 में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गगनयान कार्यक्रम के दायरे में संशोधन के तहत बीएएस के पहले मॉड्यूल (बीएएस-01) के विकास और प्रक्षेपण को 2028 तक अनुमति दी। बीएएस-01 की बेसलाइन डिजाइन समीक्षा और सिस्टम इंजीनियरिंग पूरी हो चुकी है और 31 बेसलाइन डिजाइन दस्तावेज जारी किए गए हैं। विशेषज्ञ समिति की समीक्षा पूरी हो चुकी है। उप-प्रणालियों के डिजाइन का कार्य शुरू हो चुका है।
गगनयान कार्यक्रम के अंतर्गत, मानव-योग्य प्रक्षेपण यान (एचएलवीएम3), कक्षीय मॉड्यूल, क्रू एस्केप सिस्टम, जमीनी अवसंरचना की स्थापना, उड़ान संचालन और संचार नेटवर्क की स्थापना, और क्रू रिकवरी ऑपरेशन के क्षेत्र में नए विकास कार्य किए गए हैं। पूर्ववर्ती मिशन टीवी-डी1, आईएडीटी-01 और 02 सफलतापूर्वक संपन्न किए जा चुके हैं। पहले मानवरहित मिशन, जी1 के लिए गतिविधियां कई चरण पूरे कर चुकी हैं।
इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंटरफेस सहित डॉकिंग सिस्टम विकसित कर लिए गए हैं। ईंधन भरने की प्रक्रिया के कॉन्सेप्ट डेमो मॉडल का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया जा चुका है।
मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए आवश्यक अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों में फ्लाइट सूट, व्यू पोर्ट और क्रू सीट शामिल हैं। गगनयान मिशन के लिए इन्हें फिलहाल बाहरी कंपनियों से मंगवाया गया है।
मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए प्रमुख महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों की पहचान कर ली गई है। इनमें फ्लाइट सूट, व्यू पोर्ट, क्रू सीट और डॉकिंग तकनीक शामिल हैं। सरकार ने इन महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी विकास को मंजूरी दे दी है। प्रोटोटाइप हार्डवेयर का डिजाइन और विकास कार्य प्रगति पर है।
इन पहलों से बीएएस के शेष चार मॉड्यूल के स्वदेशी डिजाइन और विकास के लिए तकनीकी आधार तैयार होगा। इससे मानव अंतरिक्ष उड़ान की महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, इससे नवाचार और मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए आवश्यक उच्च-तकनीकी विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री कार्यालय और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
