वाशिंगटन (राजीव शर्मा): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने में देरी के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि वह रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रहे राजनयिक प्रयासों को खतरे में नहीं डालना चाहते।
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि शांति स्थापित करने के उद्देश्य से चल रही बातचीत में प्रगति हो रही है। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा समय में कुछ कड़े कदम उठाने से मॉस्को वार्ता की मेज से दूर हो सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह बाद में किसी तारीख पर इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
ट्रंप ने बंधकों की रिहाई के लिए जारी वार्ताओं का भी संदर्भ दिया और इन्हें व्यापक कूटनीतिक प्रयासों का हिस्सा बताया। उन्होंने दोहराया कि उनकी प्राथमिकता बातचीत को जटिल बनाने वाले कदमों से बचते हुए इस संघर्ष को समाप्त करना है।
ट्रंप ने रूस नीति को ईरान से जोड़ा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने इस रुख के पीछे रूस और ईरान के संबंधों को भी एक कारक बताया। उन्होंने दावा किया कि मॉस्को अपनी पूरी क्षमता की तुलना में इस्लामिक गणराज्य (ईरान) को बहुत कम सहायता प्रदान कर रहा है, और वह इस समीकरण को बिगड़ने से रोकना चाहते हैं।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस-यूक्रेन संघर्ष और ईरान से जुड़े तनावों के बीच संबंधों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, जहां एक क्षेत्र का घटनाक्रम दूसरे क्षेत्र के कूटनीतिक और सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
रूसी ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर यूक्रेन के हमलों की आलोचना
ट्रंप ने रूसी डीजल रिफाइनरियों को निशाना बनाने वाले हमलों को लेकर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की की भी आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि इन प्रतिष्ठानों को पहुंचे नुकसान का असर अमेरिका में आपूर्ति और कीमतों सहित वैश्विक डीजल बाजार पर पड़ रहा है।
ट्रंप के अनुसार, इस व्यवधान से किसानों, पशुपालकों और व्यवसायों पर भारी दबाव पड़ रहा है। उन्होंने रूसी डीजल निर्यात का उल्लेख करते हुए दावा किया कि मॉस्को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तुलनात्मक रूप से कम कीमतों पर लाखों बैरल डीजल की आपूर्ति जारी रखे हुए है।
राष्ट्रपति ने ज़ेलेंस्की पर युद्ध को समाप्त करने की दिशा में ठोस पहल न करने का आरोप लगाया और यूरोपीय देशों तथा जो बाइडन के पिछले अमेरिकी प्रशासन से यूक्रेन को मिली वित्तीय सहायता की आलोचना की। ये टिप्पणियां संघर्ष पर ट्रंप के रुख और कीव की रणनीति के प्रति उनकी असहमति को दर्शाती हैं।
ट्रंप ने आगे तर्क दिया कि यूक्रेन ने अपने एक बड़े क्षेत्र को गंवा दिया है और अपनी पुरुष आबादी में भारी जनहानि झेली है। उन्होंने कहा कि दो साल पहले अधिक बेहतर शर्तों पर समझौता किया जा सकता था, हालांकि उन्होंने इस दावे के समर्थन में पोस्ट में कोई विस्तृत तथ्य पेश नहीं किए।
शांति स्थापित करना ही प्राथमिकता
अपनी स्थिति को दोहराते हुए ट्रंप ने कहा कि वह युद्ध का अंत चाहते हैं और रूस से संबंधित दस्तावेज पर उनके फैसले का मकसद वार्ताओं की संभावनाओं को बनाए रखना है।
उनका यह बयान मॉस्को के साथ कूटनीतिक रास्ते खुले रखने की प्रशासन की घोषित प्राथमिकता को रेखांकित करता है, जिसमें ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और ईरान के साथ रूस के रिश्तों से जुड़ी चिंताओं को संतुलित करने का प्रयास किया गया है।
आगे की दिशा शांति वार्ताओं में होने वाली प्रगति और उस दस्तावेज तथा अपनी रूस नीति के संबंध में अमेरिकी प्रशासन के आगामी फैसलों पर निर्भर करेगी।
