शिमला(सुदीप महाजन): भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता और विधायक त्रिलोक जमवाल ने हिमाचल प्रदेश में आपदा के बाद की जरूरतों के आकलन (पीडीएनए) फंड के उपयोग को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने आपदा पुनर्निर्माण कार्यों की टेंडरिंग और भुगतान में अनियमितताओं का आरोप लगाया और कागजों पर काम दिखाने तथा पर्याप्त क्रियान्वयन के बिना भुगतान की शिकायतों की स्वतंत्र जांच की मांग की।
जमवाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2023 की आपदा के बाद 18 जून 2025 को हिमाचल प्रदेश के लिए 2,006.40 करोड़ रुपये की पुनर्निर्माण योजना स्वीकृत की थी। स्वीकृत योजना में 1,504.80 करोड़ रुपये केंद्रीय हिस्सा शामिल था, जिसमें से पहली केंद्रीय किस्त के रूप में 451.44 करोड़ रुपये जारी किए गए।
13 जनवरी 2026 के सरकारी आदेश का हवाला देते हुए जमवाल ने कहा कि दूसरी किस्त में विभिन्न विभागों के लिए 753.29 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, जिनमें 564.97 करोड़ रुपये केंद्रीय सहायता और 188.32 करोड़ रुपये राज्य हिस्सा शामिल थे। उनके द्वारा बताए गए आंकड़ों के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को 487.80 करोड़ रुपये का आवंटन मिला, जबकि जल शक्ति विभाग को 176.48 करोड़ रुपये, कृषि विभाग को 29.13 करोड़ रुपये और बिजली बोर्ड को 18.22 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
बड़े आवंटन के बावजूद सड़कों की स्थिति पर सवाल
पुनर्निर्माण के लिए बड़ी राशि आवंटित होने के बावजूद सड़कों और पुलों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए जमवाल ने पूछा कि कई सड़कें क्षतिग्रस्त क्यों हैं और यात्रियों को गड्ढों तथा यातायात बाधा से क्यों जूझना पड़ रहा है। उन्होंने अगस्त 2026 में 259 सड़कों के अवरुद्ध होने और सितंबर में किन्नौर के ठियोग तथा पूह क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर यातायात बाधित होने की रिपोर्टों का उल्लेख किया।
जमवाल ने कहा कि सरकारी आदेश के अनुसार, पीडीएनए फंड 2023 की आपदा में क्षतिग्रस्त स्वीकृत परिसंपत्तियों के लिए ही हैं। उन्होंने राज्य सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि क्या टेंडर जारी करने और भुगतान स्वीकृत करने से पहले क्षति का आकलन तथा भौतिक सत्यापन किया गया था।
उन्होंने परियोजनाओं की स्थिति और वित्तीय उपयोग पर भी स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने उन निर्देशों का उल्लेख किया, जिनके तहत फंड का उपयोग कर उपयोगिता प्रमाणपत्र मार्च 2026 तक जमा करने थे। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि कितनी परियोजनाएं पूरी हुईं, कितने बिल स्वीकृत हुए और कितने कार्यों का निरीक्षण हुआ।
राजनीतिक रिश्तेदारी वाले ठेकेदारों की शिकायतों पर आरोप
जमवाल ने आरोप लगाया कि राजनीतिक रिश्तों वाले ठेकेदारों से जुड़ी शिकायतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में क्षेत्रवार आवंटन, टेंडर, ठेकेदारों का विवरण और भुगतान सार्वजनिक करने की मांग की।
“आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए दी गई धनराशि राजनीतिक संरक्षण या निजी लाभ का साधन नहीं बन सकती,” जमवाल ने कहा और अनियमितता के साक्ष्य स्थापित होने पर अधिकारियों तथा ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने आगे सभी विवादित परियोजनाओं का विशेष ऑडिट, पूर्ण कार्यों का भौतिक सत्यापन और पीडीएनए फंड के उपयोग का विवरण देने वाले विधानसभा क्षेत्रवार श्वेतपत्र प्रकाशित करने की मांग की।
ये आरोप और मांगें जमवाल द्वारा उठाई गई हैं। किसी भी कथित अनियमितता की पुष्टि स्वतंत्र जांच और सरकारी रिकॉर्ड के सत्यापन से ही हो सकेगी।
