आकाशवाणी भवन में प्रदर्शन को लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित विपक्षी नेताओं पर मामला दर्ज

नई दिल्ली (राजीव शर्मा): दिल्ली पुलिस ने बुधवार को चुनाव आयोग के खिलाफ निकाले गए एक विरोध मार्च के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा और कई अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

यह मामला उन आरोपों से संबंधित है कि प्रदर्शनकारियों का एक समूह बिना अनुमति के आकाशवाणी भवन परिसर में दाखिल हुआ और पुलिस द्वारा वहां से जाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद वहीं डटा रहा।

यह घटना ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के सांसदों द्वारा संसद भवन से चुनाव आयोग के मुख्यालय ‘निर्वाचन सदन’ की ओर निकाले गए मार्च के बाद सामने आई। पुलिस के अनुसार, यह प्रदर्शन सुबह करीब 10:30 बजे शुरू हुआ था।

मार्च के आगे बढ़ने पर प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पहले पुलिस बैरिकेड को पार किया और नीति आयोग के पास लगाए गए दूसरे बैरिकेड की ओर बढ़ गए। पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है और उनसे तितर-बितर होने का आग्रह किया।

अधिकारियों के अनुसार, जब भीड़ ने निर्देशों का पालन नहीं किया, तो पुलिस ने 10 सांसदों सहित लगभग 260 लोगों को हिरासत में ले लिया और आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए उन्हें विभिन्न पुलिस थानों में ले जाया गया।

हिरासत में लिए जाने और बाद में छोड़े जाने के बाद जहां अधिकांश लोग प्रदर्शन स्थल से हट गए, वहीं एक छोटा समूह कथित तौर पर आकाशवाणी भवन परिसर के भीतर चला गया। पुलिस ने बताया कि इस समूह में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, मनीष चथरथ और लगभग 50 से 60 समर्थक शामिल थे।

अधिकारियों का आरोप है कि यह समूह बिना अनुमति के परिसर के भीतर मौजूद रहा और जगह खाली करने के बार-बार किए गए अनुरोधों को ठुकरा दिया।

खबरों के मुताबिक राहुल गांधी और अन्य नेता परिसर में एक बरगद के पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे तभी वहां से हटेंगे जब विपक्षी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल को चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलने का समय दिया जाएगा।

पुलिस ने बताया कि अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों की लगातार अवहेलना करने के बाद यह प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई। अधिकारियों का कहना था कि प्रदर्शन के दौरान आगे की अव्यवस्था को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कानूनी कार्रवाई जरूरी थी।

यह घटनाक्रम विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच बढ़ते सियासी टकराव के बीच सामने आया है, जहां ‘इंडिया’ गठबंधन के नेता विरोध प्रदर्शनों और मार्च के जरिए अपनी चिंताओं को लगातार उठा रहे हैं।

By Rajeev Sharma

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