धर्मशाला(सुदीप महाजन): भाजपा के हिमाचल प्रदेश प्रवक्ता संजय शर्मा ने सार्वजनिक शिक्षा की स्थिति पर कांग्रेस नेतृत्व वाली राज्य सरकार की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय औसतों के आधार पर सुधार के दावे सरकारी स्कूलों की चुनौतियों को दर्शाने में नाकाम हैं।
सरकारी और मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए शर्मा ने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश में 150 से अधिक स्कूल बिना किसी शिक्षक के चल रहे हैं, जबकि 3,315 स्कूल केवल एक शिक्षक पर निर्भर हैं। इनमें 3,214 प्राथमिक स्कूल और 101 मिडिल स्कूल शामिल हैं। उन्होंने उन आंकड़ों का भी हवाला दिया, जिनके अनुसार लगभग 47,579 छात्र ऐसे स्कूलों में नामांकित हैं जहां या तो कोई शिक्षक नहीं है या केवल एक शिक्षक है। उन्होंने बताई गई कमियों को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।

वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (एसर) का हवाला देते हुए उन्होंने सरकारी स्कूलों में नामांकन के रुझान और 15–16 वर्ष की आयु के स्कूल से बाहर बच्चों के अनुपात में 2.2 प्रतिशत से बढ़कर 3 प्रतिशत होने की रिपोर्ट पर चिंता जताई। उन्होंने सरकार की स्कूल रैशनलाइजेशन नीति की भी आलोचना की और तर्क दिया कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तथा दूरदराज के समुदायों के बच्चों के लिए कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं।
शर्मा ने रिक्त शिक्षक पदों की भर्ती की गति पर सवाल उठाए और कर्मचारियों की कमी, भर्ती की समय-सीमा तथा हर स्कूल में पर्याप्त शिक्षक सुनिश्चित करने की सरकार की योजनाओं का विवरण देने वाला श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने शिक्षा मंत्री से स्पष्ट और समयबद्ध कार्य योजना प्रस्तुत करने का आग्रह किया और चेताया कि यदि सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो भाजपा विरोध प्रदर्शन कर सकती है।
विवरण में दिए गए आंकड़ों और आरोपों को नवीनतम आधिकारिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों तथा संबंधित एसर रिपोर्ट के आधार पर सत्यापित करने की आवश्यकता है। दी गई विज्ञप्ति में राज्य सरकार की प्रतिक्रिया शामिल नहीं की गई है।
