जलवायु परिस्थितियों पर आधारित कृषि रूपरेखा

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार असम, गोवा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के लिए कृषि कार्य योजनाएं प्रारंभ की जा चुकी हैं। इन रोडमैपों को तैयार करने के लिए संबंधित राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों से व्यापक परामर्श किया गया है।

आईसीएआर, कृषि और किसान कल्याण विभाग, आईसीएआर संस्थानों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों सहित अन्य संबंधित राज्य विभागों के सहयोग से कृषि रोडमैप तैयार किया जा रहा है। यह योजना प्रक्रिया कृषि-जलवायु क्षेत्रों, प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता, जलवायु अनुकूलन क्षमता, तकनीकी उपायों और किसानों की आवश्यकताओं पर आधारित है। इन रोडमैप का मकसद तकनीकी पुष्टि, राज्यों की प्राथमिकताओं के साथ तालमेल, स्थानीय कृषि-जलवायु स्थितियों और जलवायु के प्रति लचीलेपन को सुनिश्चित करना है।

इस रोडमैप में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में उत्पादकता, लाभप्रदता और संसाधन उपयोग दक्षता बढ़ाने की परिकल्पना की गई है। खेती से जुड़ा यह रोडमैप एक व्यापक नीतिगत ढांचा है जो खेती और मौसम की स्थितियों पर आधारित है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अलग-अलग योजनाओं के तहत वार्षिक कार्य योजना बनाते समय इन दिशा-निर्देशों को ध्यान में रख सकते हैं। कृषि रोडमैप के प्रमुख परिणामों में किसानों की आय में वृद्धि करना, कृषि और संबद्ध वस्तुओं में आत्मनिर्भरता में सुधार करना, ग्रामीण रोजगार के अवसर सृजित करना और स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों, जलवायु अनुकूलन और किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कृषि क्षेत्र के सतत विकास को सुनिश्चित करना शामिल है।

यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

By Rajeev Sharma

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