शिमला(राजीव शर्मा) : हिमाचल प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार के लिए केंद्र सरकार ने छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 320 अतिरिक्त पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल सीटों को मंजूरी दी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 415 करोड़ रुपये से अधिक है।
केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने स्वीकृति की घोषणा करते हुए कहा कि केंद्र आवश्यक धनराशि अनुदान के रूप में उपलब्ध कराएगा। इस निर्णय से विशेषज्ञ प्रशिक्षण लेने वाले मेडिकल स्नातकों के लिए अवसर बढ़ने और पहाड़ी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नड्डा ने कहा कि यह स्वीकृति पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा की क्षमता बढ़ाने और विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंच सुधारने के लिए केंद्र की व्यापक पहल का हिस्सा है।
आईजीएमसी शिमला को 91 सीटें
नई स्वीकृत सीटों का बंटवारा हिमाचल प्रदेश के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में किया गया है, जिसमें इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी), शिमला को सबसे अधिक आवंटन मिला है।
मेडिकल कॉलेज स्वीकृत पीजी सीटें
आईजीएमसी, शिमला 91
सरकारी मेडिकल कॉलेज, हमीरपुर 57
डॉ. राजेंद्र प्रसाद सरकारी मेडिकल कॉलेज, टांडा 57
नेरचौक मेडिकल कॉलेज, मंडी 55
सरकारी मेडिकल कॉलेज, नाहन 32
सरकारी मेडिकल कॉलेज, चंबा 28
इस अतिरिक्त क्षमता से सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, स्त्री रोग एवं प्रसूति, बाल रोग तथा ऑन्कोलॉजी सहित कई विशेष विषयों में पोस्टग्रेजुएट प्रशिक्षण को सहारा मिलने की उम्मीद है।
हिमाचल सरकार ने जून में भेजा था प्रस्ताव
नड्डा के अनुसार, हिमाचल प्रदेश सरकार ने अतिरिक्त सीटों के लिए प्रस्ताव 23 जून को प्रस्तुत किया था। इसके बाद 6 अक्टूबर को एम्स बिलासपुर के दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री से इस मुद्दे पर चर्चा की।
केंद्र ने अब प्रस्ताव के तहत मांगी गई सभी 320 सीटों को मंजूरी दे दी है।
नड्डा ने कहा कि इस विस्तार से अधिक मेडिकल स्नातकों को राज्य के बाहर प्रवेश लेने के बजाय उच्च योग्यता हासिल करने का अवसर मिलेगा। इससे विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता में सुधार हो सकता है, विशेष रूप से दूरदराज और कम सेवा वाले क्षेत्रों के मरीजों के लिए।
उन्होंने राज्य सरकार से आवश्यक प्रशासनिक और नियामक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी करने का आग्रह किया, ताकि स्वीकृत सीटें बिना अनावश्यक देरी के चालू हो सकें।
देशव्यापी मेडिकल शिक्षा विस्तार का हिस्सा
केंद्रीय मंत्री ने इस स्वीकृति को देशभर में मेडिकल शिक्षा की क्षमता बढ़ाने की केंद्र की व्यापक योजना से जोड़ा। उन्होंने 15,000 करोड़ रुपये की योजना का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य पांच वर्षों में देशभर में 10,000 अतिरिक्त मेडिकल सीटें सृजित करना है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को इन प्रयासों से लाभ मिलेगा, क्योंकि स्वीकृति में राज्य के लिए प्रस्तावित सभी 320 अतिरिक्त पोस्टग्रेजुएट सीटें शामिल हैं।
इस विस्तार का उद्देश्य विशेषज्ञ चिकित्सा पेशेवरों की मांग पूरी करना और देश के स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करना है।
अन्य विकास परियोजनाओं में तेजी की मांग
मेडिकल शिक्षा के अलावा, नड्डा ने हिमाचल प्रदेश में केंद्र समर्थित अन्य परियोजनाओं में देरी को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने क्रिटिकल केयर ब्लॉक और पब्लिक हेल्थ लैबोरेटरीज के तेज क्रियान्वयन की मांग की और जोर दिया कि स्वीकृत स्वास्थ्य अवसंरचना को जनता की सेवाओं में बदलना सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने रेलवे विकास से जुड़े लंबित मुद्दों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें चंडीगढ़-बद्दी और भानुपल्ली-बिलासपुर रेल परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इनमें राज्य के वित्तीय योगदान और भूमि उपलब्धता जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
नड्डा ने कहा कि जनहित से जुड़ी परियोजनाओं में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
हिमाचल प्रदेश के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने और जनकल्याण सुधारने पर ध्यान केंद्रित करते हुए राज्य के विकास के लिए सहायता जारी रखेगी।
उन्होंने कहा कि तात्कालिक प्राथमिकता राज्य सरकार के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करना और स्वीकृत मेडिकल सीटों तथा अन्य विकास पहलों के समय पर क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है।
