नई दिल्ली(राजीव शर्मा): पुलिस ने स्पष्ट किया कि वीडियो दिसंबर 2019 का है; भ्रामक जानकारी फैलाने वाले खातों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू
दिल्ली पुलिस ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के निवास पर हमले और गोलीबारी के सोशल मीडिया दावों को खारिज कर दिया। उसने वायरल वीडियो को फर्जी बताया और असत्यापित जानकारी साझा करने से बचने की चेतावनी दी।
अपने आधिकारिक एक्स खाते पर पोस्ट किए गए बयान में पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन प्रसारित हो रहा फुटेज दिसंबर 2019 में हुई एक घटना का है। इसका लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के निवास पर हुई किसी हालिया घटना से कोई संबंध नहीं है।
यह स्पष्टीकरण तब आया, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो कांग्रेस नेता के निवास पर गोलियां चलने और हमले के दावों के साथ प्रसारित होने लगा। पुलिस ने इन दावों को खारिज करते हुए लोगों से पुराने फुटेज को हालिया घटना बताकर भ्रमित होने से बचने का आग्रह किया।
झूठे दावे फैलाने वाले खातों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने चेतावनी भी दी कि भ्रामक सामग्री प्रसारित करने में कथित रूप से शामिल सोशल मीडिया खातों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जा रही है।
प्राधिकरणों ने उपयोगकर्ताओं से वीडियो या पोस्ट फॉरवर्ड करने से पहले सावधानी बरतने का आग्रह किया, विशेष रूप से तब जब वे हिंसा या सुरक्षा खतरे के दावों से जुड़े हों। उन्होंने लोगों को अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्टों पर भरोसा करने के बजाय ऐसी जानकारी को आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित करने की सलाह दी।
यह घटना मूल संदर्भ के बिना साझा किए जाने पर पुराने फुटेज की ऑनलाइन गलत सूचना फैलाने में भूमिका को उजागर करती है। पुलिस ने संभावित रूप से भ्रामक सामग्री साझा करने से पहले तथ्यों की जांच करने के महत्व को दोहराया।
