ओटावा/नई दिल्ली (राजीव शर्मा): कनाडा तीन दशकों से अधिक समय में भारत में अपना सबसे बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भेजने की तैयारी कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू इस मिशन का नेतृत्व करेंगे, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक संबंधों का विस्तार करना और नए कारोबारी अवसर पैदा करना है।
इस प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न उद्योगों से जुड़े लगभग 300 व्यापारिक प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कनाडा की रुचि को दर्शाता है। सिद्धू ने कहा कि भारत की 1.4 अरब से अधिक की आबादी कनाडाई कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंचने और दीर्घकालिक साझेदारी स्थापित करने के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।
यह व्यापार मिशन कई प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिनमें एयरोस्पेस, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, लाइफ साइंसेज (जीवन विज्ञान), कृषि-खाद्य और वानिकी शामिल हैं। बैठकों और व्यावसायिक संवादों के माध्यम से, भाग लेने वाली कंपनियां साझेदारी विकसित करने, निवेश की संभावनाओं को तलाशने और वाणिज्यिक संपर्कों का विस्तार करने के अवसरों की खोज करेंगी।
व्यावसायिक वार्ताओं के साथ-साथ, कनाडा और भारत प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए – CEPA) पर भी बातचीत जारी रखे हुए हैं। इस समझौते का उद्देश्य अतिरिक्त व्यापार अवसर पैदा करना और दोनों देशों के व्यवसायों के लिए बाजारों तक पहुंच में सुधार करना है।
सिद्धू ने कहा कि सरकार का उद्देश्य बढ़ते वाणिज्यिक रुझान को कनाडाई श्रमिकों और व्यवसायों के लिए ठोस लाभों में बदलना है। प्रतिनिधिमंडल का यह व्यापक स्तर निजी क्षेत्र के सहयोग और औपचारिक व्यापार वार्ताओं के माध्यम से भारत के साथ आर्थिक जुड़ाव को मजबूत करने के ओटावा के प्रयासों का भी संकेत देता है।
यह मिशन ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश कई उद्योगों में आर्थिक सहयोग को व्यापक बनाने के रास्ते तलाश रहे हैं। इस यात्रा के परिणाम और सीईपीए वार्ताओं में प्रगति भारत-कनाडा व्यापार संबंधों के अगले चरण को दिशा देने में मदद कर सकती है।
