नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई) के कार्यान्वयन का एक वर्ष 11 अक्टूबर, 2026 को पूरा हो गया। इस अवसर पर भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने आज भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी), पूसा, नई दिल्ली में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के सचिव, पीएमडीडीकेवाई के अंतर्गत केंद्रीय नोडल अधिकारी, केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और राज्यों से 370 से अधिक प्रतिनिधि उपस्थित थे, जिनमें जिला कलेक्टर, जिला स्तरीय पदाधिकारी, कृषि वैज्ञानिक और पीएमडीडीकेवाई जिलों के प्रगतिशील किसान शामिल थे।
सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहले वर्ष में मजबूत नींव स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया, जबकि आने वाले वर्ष को जमीनी स्तर पर स्पष्ट और मापने योग्य परिणाम देने के लिए समर्पित करना होगा। उन्होंने कृषि उत्पादकता में सुधार, फसल सघनता बढ़ाने, सिंचाई एवं जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने, कृषि ऋण की सुगमता सुनिश्चित करने, उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा देने, फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे में सुधार करने और किसानों की आय बढ़ाने के महत्व पर प्रकाश डाला।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि पीएमडीडीकेवाई की सफलता का अंतिम मापदंड किसानों के जीवन में इससे होने वाला सार्थक बदलाव होगा। उन्होंने सभी हितधारकों से समन्वय मजबूत करने, कार्यान्वयन में तेजी लाने और कृषि परिणामों में मापने योग्य सुधारों और किसानों की सतत आय पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। संबद्ध मंत्रालयों/विभागों की भागीदारी कृषि विकास के लिए समन्वित, समग्र सरकारी दृष्टिकोण के महत्व को दर्शाती है।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने जिला कार्य योजनाओं को ठोस परिणामों में बदलने के लिए राज्य सरकारों, जिला प्रशासनों, वैज्ञानिक संस्थानों और किसानों के साथ मिलकर काम करने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। आगामी वर्ष में सभी चिन्हित जिलों में सफल पहलों को व्यापक स्तर पर लागू करने और परिणामों में सुधार लाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसका व्यापक लक्ष्य सभी 100 पीएमडीडीकेवाई जिलों को सही मायने में “धन-धान्य” बनाना यानी अनाज से समृद्ध और समृद्धि से भरपूर है।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बात पर भी जोर दिया कि 22 अक्टूबर से 30 नवंबर, 2026 तक सभी राज्यों में आयोजित होने वाले खेत बचाओ अभियान का उद्देश्य उर्वरकों के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है। श्री चौहान ने सभी राज्य सरकारों और संबंधित अधिकारियों को इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने और इसके सफल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने मृदा की उर्वरता बनाए रखने, पर्यावरण की रक्षा करने और भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के महत्व पर प्रकाश डाला।
अपने स्वागत भाषण में, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव ने योजना के जिला-केंद्रित दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला, जिसके तहत जिलों द्वारा उनकी मिट्टी की स्थिति, वर्षा, फसल पैटर्न, जल उपलब्धता, बुनियादी ढांचे और किसानों की आवश्यकताओं के अनुसार कार्ययोजनाएं तैयार की जाती हैं। उन्होंने योजना के कार्यान्वयन में राज्य सरकारों, जिला कलेक्टरों, जिला नोडल अधिकारियों, केंद्रीय नोडल अधिकारियों, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के वैज्ञानिकों और जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों के योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने योजना और कार्यान्वयन के समन्वय में जिला धन-धान्य समितियों के महत्व पर भी बल दिया। यह योजना एक समर्पित डैशबोर्ड के माध्यम से 121 संकेतकों के आधार पर जिलों के प्रदर्शन की निगरानी करती है, जिसमें मासिक रैंकिंग पारदर्शिता और जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है।
कार्यक्रम के अंतर्गत, पीएमडीडीकेवाई के तीन जिलों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और नवोन्मेषी पहलों को साझा किया। गढ़चिरोली जिले ने जल संरक्षण और सूखा प्रबंधन पर अपने कार्यों को प्रस्तुत किया, अल्लूरी सीताराम राजू जिले ने उच्च मूल्य वाली बागवानी को बढ़ावा देने की पहलों पर प्रकाश डाला , और बांका जिले ने लिलावरन प्राकृतिक कृषि भूमि पुनरुद्धार मॉडल का प्रदर्शन किया। प्रस्तुतियों से यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप किए गए उपाय, समन्वय और किसानों की भागीदारी के साथ, कृषि संबंधी चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं और अनुकरणीय उपाय उत्पन्न कर सकते हैं।
इस कार्यक्रम में पीएमडीडीकेवाई के तहत उत्कृष्ट जिला प्रदर्शन को भी मान्यता दी गई। बिहार के गया जिले ने प्रथम स्थान, राजस्थान के नागौर जिले ने द्वितीय स्थान और मध्य प्रदेश के उमरिया जिले ने समग्र रूप से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों में तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त, योजना के छह प्रमुख उद्देश्यों में अनुकरणीय कार्य के लिए 18 जिलों को सम्मानित किया गया, जिनमें कृषि उत्पादकता बढ़ाना (छत्रपति संभाजी नगर, महाराष्ट्र, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश; गेजिंग, सिक्किम); फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना (महोबा, उत्तर प्रदेश; दिंडोरी, मध्य प्रदेश, चमोली, उत्तराखंड); फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाना (तियाकमगढ़, मध्य प्रदेश, सीधी, मध्य प्रदेश, दंतवाड़ा, छत्तीसगढ़); सिंचाई अवसंरचना में सुधार करना (किश्तवार, जम्मू-कश्मीर, दाहोद, गुजरात, छोटा उदयपुर, गुजरात); अल्पकालिक और दीर्घकालिक कृषि ऋण तक अधिक पहुंच सक्षम करना (नारायणपेट, तेलंगाना, जालौन, उत्तर प्रदेश, श्री स्तह्या साई, आंध्र प्रदेश) शामिल हैं। बेहतर शासन और सेवा वितरण (नगर, कुरनूल, तेलंगाना, कच्छ, गुजरात, हावेरी, कर्नाटक)। इस अभिनंदन समारोह में कृषि विकास को आगे बढ़ाने में जिला स्तरीय प्रयासों को सराहा गया और अन्य जिलों को भी नवोन्मेषी पद्धतियों को अपनाने और अपने प्रदर्शन में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम का समापन जिला स्तरीय योजना को सुदृढ़ करने, नवाचार को बढ़ावा देने और समावेशी एवं सतत कृषि विकास के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी समन्वय को सुनिश्चित करने की नवप्रवर्तित प्रतिबद्धता के साथ हुआ। प्रथम वर्ष की उपलब्धियों को किसानों के लिए ठोस लाभों में परिवर्तित करने पर बल दिया गया, जिसमें उत्पादकता में सुधार, सशक्त कृषि पद्धतियों, उन्नत बुनियादी ढांचे और संस्थागत ऋण तक बेहतर पहुंच शामिल है। सरकार ने पीएमडीडीकेवाई के उद्देश्यों को प्राप्त करने और चिन्हित 100 जिलों को कृषि प्रगति, समृद्धि और किसान कल्याण के आदर्श बनाने के लिए राज्य सरकारों, जिला प्रशासनों, वैज्ञानिक संस्थानों और किसान समुदायों के साथ निकट समन्वय में कार्य करने के अपने संकल्प की पुष्टि की।
केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई) को औपचारिक रूप से 11 अक्टूबर, 2025 को कम उत्पादकता, कम फसल सघनता और कम कृषि ऋण वितरण वाले 100 जिलों को कवर करने के लिए प्रारंभ किया गया था। इस योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर फसल कटाई के बाद भंडारण को बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं में सुधार करना और दीर्घकालिक और अल्पकालिक ऋण की उपलब्धता को सुगम बनाना है।
यह योजना 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं के साथ-साथ संबंधित राज्य सरकार की योजनाओं को एक समन्वित ढांचे के तहत लाती है ताकि जिले-विशिष्ट कृषि प्राथमिकताओं का समाधान किया जा सके।
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