नई दिल्ली(राजीव शर्मा): पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बल प्रयोग छात्रों की शिकायतों का स्थायी समाधान नहीं दे सकता।
जोशी ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित 21वें फिक्की उच्च शिक्षा सम्मेलन से इतर पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह टिप्पणी की। जारी छात्र प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि छात्रों द्वारा उठाई गई जायज चिंताओं का समाधान टकराव के बजाय बातचीत के माध्यम से किया जाना चाहिए।
उन्होंने किसी शिकायत को लेकर परेशान बच्चे से निपटने वाले माता-पिता का उदाहरण देते हुए कहा कि छात्रों के साथ धैर्य और समझदारी से पेश आना चाहिए। जोशी ने कहा, “वे हमारे बच्चे हैं,” और जोर दिया कि कोई भी कार्रवाई करने से पहले उनकी चिंताओं को सुना जाना चाहिए।
जोशी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के कार्यान्वयन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि इसके समग्र प्रभाव का आकलन करने के लिए अभी बहुत जल्दी है।
उनके अनुसार, यह नीति अभी अपेक्षाकृत नई है और इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि इसके परिणाम तभी स्पष्ट होंगे, जब इसे लागू हुए अधिक समय बीत जाएगा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री इससे पहले भी छात्र प्रदर्शनों से निपटने के तरीके को लेकर चिंता जता चुके हैं। नीट परीक्षा से जुड़े विवाद के बाद हुए प्रदर्शनों के दौरान जोशी ने अधिकारियों से छात्रों की चिंताओं को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं देखने की अपील की थी।
उस समय उन्होंने कहा था कि देश के विभिन्न हिस्सों के छात्रों द्वारा परीक्षा प्रणाली को लेकर उठाई गई चिंताओं पर सहानुभूतिपूर्ण प्रतिक्रिया और दीर्घकालिक समाधान की जरूरत है। उन्होंने प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों, विशेष रूप से युवा महिलाओं, के साथ कथित बल प्रयोग की भी आलोचना की थी।
जोशी ने चेतावनी दी थी कि बल पर अत्यधिक निर्भरता जनता में अलगाव की भावना बढ़ा सकती है और व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्यों को कमजोर कर सकती है।
उनकी ताजा टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं, जब छात्र प्रदर्शनों का एक नया दौर चल रहा है। उन्होंने एक बार फिर शारीरिक बल के बजाय संवाद, सहानुभूति और शिकायतों के समाधान पर जोर दिया है।
