गैंगस्टर के सहयोगियों से पूछताछ में कारोबारियों को निशाना बनाने की साजिश का खुलासा

लुधियाना(गुरप्रीत सिंह): लुधियाना कमिश्नरेट पुलिस ने विदेश में बैठे एक गैंगस्टर के दो कथित सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद चंडीगढ़ और मोहाली के प्रमुख कारोबारियों को निशाना बनाने की कथित योजना का खुलासा करने का दावा किया है।

आरोपियों की पहचान राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के रावला मंडी क्षेत्र निवासी राधे श्याम और राहुल कुमार के रूप में हुई है। दोनों को लुधियाना में एक अभियान के दौरान क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (सीआईए) ने गिरफ्तार किया।

अतिरिक्त डीसीपी क्राइम रूपिंदर भट्टी के अनुसार, दोनों संदिग्धों से पूछताछ में पता चला कि वे विदेश में रह रहे हरमन संधू के निर्देश पर कथित तौर पर काम कर रहे थे। पुलिस ने कहा कि संदिग्धों को कुछ कारोबारियों के घरों और कार्यालयों पर गोलीबारी करने का काम सौंपा गया था। कथित उद्देश्य दहशत पैदा करना और इसके बाद धन की मांग करना था।

कथित वारदात से पहले पकड़े गए संदिग्ध
भट्टी ने बताया कि सीआईए प्रभारी इंस्पेक्टर अवतार सिंह और उनकी टीम ने लुधियाना में फिरोजपुर रोड के पास सिंचाई विभाग की खाली जमीन के निकट दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।

पुलिस के अनुसार, पकड़े जाने के समय दोनों कथित तौर पर गिरोह के अन्य सदस्यों का इंतजार कर रहे थे। जांचकर्ता अब इस नेटवर्क के व्यापक स्वरूप का पता लगाने और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं।

दोनों आरोपियों के खिलाफ पहले से भी मामले दर्ज हैं। पुलिस ने बताया कि राधे श्याम के खिलाफ राजस्थान के रावला मंडी और अनूपगढ़ में पांच मामले लंबित हैं, जबकि राहुल कुमार के खिलाफ रावला मंडी में एक मामला दर्ज है।

लुधियाना के पुलिस डिवीजन नंबर 8 में 3 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 111(1) और 308(4) के साथ-साथ शस्त्र अधिनियम की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से पुलिस को दोनों का दो दिन का रिमांड मिला।

पुलिस का पाकिस्तान से जुड़े हथियारों की आपूर्ति का आरोप
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच में हथियारों की कथित आवाजाही से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है।

पुलिस ने बताया कि संधू के सहयोगियों ने अमृतसर से एक ग्लॉक पिस्तौल और 20 कारतूस प्राप्त किए थे। जांचकर्ताओं को संदेह है कि यह हथियार पाकिस्तान से भारत में तस्करी के जरिए लाया गया था।

कथित तौर पर हथियार और गोला-बारूद को नकोदर ले जाकर एक साइनबोर्ड के पास छिपाया गया था। शूटरों को बाद में वहां से इन्हें लेने का निर्देश दिया गया था।

जांचकर्ताओं ने आगे आरोप लगाया कि संधू ने गिरोह के सदस्यों को ईंधन, ठहरने और अन्य जरूरतों का खर्च पूरा करने के लिए कई बार पैसे भेजे। पुलिस के अनुसार, इन पैसों को भी अलग-अलग स्थानों पर छिपाया जाता था, जहां से सहयोगी उन्हें बाद में प्राप्त करते थे।

कथित शूटरों को अपना निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के बाद प्रत्येक को 40,000 से 50,000 रुपये देने का वादा किया गया था। पुलिस ने कहा कि किसी भी हमले से पहले ही योजना को विफल कर दिया गया।

लक्ष्य सूची की जांच जारी
पुलिस ने कहा कि गिरफ्तारियों से चंडीगढ़ और मोहाली में प्रस्तावित गोलीबारी तथा जबरन वसूली के प्रयासों को रोका जा सका है।

भट्टी ने बताया कि जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि संभावित लक्ष्यों के रूप में किन लोगों की पहचान की गई थी। इसके साथ ही कथित गिरोह के अन्य सदस्यों का पता लगाने का प्रयास भी किया जा रहा है।

सुरक्षा कारणों से पुलिस ने उन कारोबारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, जिन्हें कथित तौर पर निशाना बनाया जाना था। भट्टी ने कहा कि संबंधित लोगों को खतरे के बारे में सतर्क कर दिया गया है।

कथित नेटवर्क के पूरे विस्तार, हथियार के स्रोत और अन्य संदिग्धों की भूमिका का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

By Gurpreet Singh

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