सरे, बी.सी. (राजीव शर्मा): सरे पुलिस सर्विस के पूर्व चीफ कांस्टेबल नॉर्म लिपिंस्की ने अपनी बर्खास्तगी के मामले को ब्रिटिश कोलंबिया सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जहां उन्होंने जून में अपने कार्यकाल को समाप्त करने वाले फैसले की न्यायिक समीक्षा (ज्यूडिशियल रिव्यू) की मांग की है।
लिपिंस्की द्वारा अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनकी बर्खास्तगी उनके आचरण या प्रदर्शन से परे राजनीतिक कारणों से प्रभावित थी। हालांकि, ये आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।
यह घटनाक्रम सरे में एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है, जहां मेयर पद की उम्मीदवार लिंडा एनिस ने शहर के पुलिसिंग ट्रांजिशन (पुलिस सेवा परिवर्तन) और लिपिंस्की की विदाई से जुड़े तौर-तरीकों को लेकर मेयर ब्रेंडा लॉक और सरे पुलिस बोर्ड की तीखी आलोचना की है।
एनिस का आरोप है कि लॉक प्रशासन ने आरसीएमपी (RCMP) से सरे पुलिस सर्विस में बदलाव का बार-बार विरोध किया या इसमें देरी की। उन्होंने लिपिंस्की को बर्खास्त करने के बोर्ड के फैसले पर भी चिंता जताई है और उनके पद से हटने तथा सेवरेंस (विदाई भत्ते) को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
लिपिंस्की 2020 से सरे के पुलिस प्रमुख के रूप में कार्यरत थे और उन्होंने सरे पुलिस सर्विस के गठन व बदलाव की प्रक्रिया में एक केंद्रीय भूमिका निभाई थी। पुलिस बोर्ड ने 2 जून को घोषणा की थी कि उन्होंने संगठन छोड़ दिया है और डिप्टी चीफ कांस्टेबल टॉड मात्सुमोतो को अंतरिम प्रमुख नियुक्त किया गया था। बोर्ड ने उस समय लिपिंस्की के हटने के विस्तृत कारणों की जानकारी नहीं दी थी।
पूर्व पुलिस प्रमुख की कानूनी चुनौती इस बात पर भी सवाल उठाती है कि क्या बर्खास्तगी से पहले उचित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। अदालत में दाखिल याचिका की रिपोर्टों के अनुसार, लिपिंस्की का कहना है कि यह फैसला लिए जाने से पहले उन्हें न तो पर्याप्त नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का कोई अवसर प्रदान किया गया।
यह मामला सरे में पुलिसिंग के भविष्य को लेकर चल रही लगातार बहस के बीच सामने आया है। आरसीएमपी से सरे पुलिस सर्विस में शहर का बदलाव लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी विवादों का विषय रहा है, जबकि एसपीएस (SPS) नवंबर 2024 में आधिकारिक तौर पर सरे की मुख्य पुलिस सेवा बन गई थी।
एनिस ने सितंबर में सरे पुलिस बोर्ड की बैठक रद्द किए जाने की भी आलोचना की है। उनका तर्क है कि निवासियों को लिपिंस्की के जाने और उनके स्थायी विकल्प की तलाश को लेकर बोर्ड से सवाल पूछने का अवसर मिलना चाहिए। वहीं बोर्ड का कहना है कि उसने लिपिंस्की के पद छोड़ने के बाद नए प्रमुख के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
अब अदालत की कार्यवाही यह तय करेगी कि लिपिंस्की के दावों का निपटारा किस प्रकार किया जाता है और क्या उनकी बर्खास्तगी से जुड़ी परिस्थितियों में किसी आगे की कार्रवाई की आवश्यकता है।
