प्राग, चेक गणराज्य(नवल किशोर): यू.टी. चंडीगढ़ के मुख्य सचिव श्री एच. राजेश प्रसाद, आईएएस, जल प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन और सर्कुलर इकोनॉमी पर केंद्रित पांच दिवसीय मिशन के लिए चेक गणराज्य गए उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।
21 से 25 सितंबर तक आयोजित इस मिशन का उद्देश्य सतत जल प्रबंधन, अपशिष्ट जल उपचार, पुनर्चक्रण, संसाधनों के कुशल उपयोग और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के क्षेत्र में भारत और चेक गणराज्य के बीच सहयोग को मजबूत करना है।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए श्री एच. राजेश प्रसाद ने विशेष रूप से भारतीय संदर्भ में जल अर्थव्यवस्था को विकसित और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जल को एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए। इसके संरक्षण, कुशल उपयोग, अपशिष्ट जल के उपचार, दोबारा उपयोग, पुनर्चक्रण और सतत प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
मुख्य सचिव ने कहा कि बढ़ती जल एवं पर्यावरण संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकारी नीतियों, तकनीक, शैक्षणिक शोध और उद्योगों के माध्यम से व्यावहारिक कार्यान्वयन को आपस में जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ऐसे नए समाधान तलाशने में मदद मिल सकती है, जिन्हें भारत की शहरी, औद्योगिक और कृषि संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार बड़े स्तर पर अपनाया जा सके।
प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए चेक गणराज्य के पर्यावरण उपमंत्री श्री इवो मार्सिन ने साझा पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अपशिष्ट को केवल निपटान की वस्तु मानने के बजाय उसके दोबारा उपयोग, पुनर्चक्रण, पुनर्प्राप्ति और संसाधनों के कुशल इस्तेमाल पर ध्यान देना आवश्यक है।
प्रतिनिधिमंडल में लोक प्रशासन, नीति निर्माण, शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों और प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। आईआईटी रोपड़ और चितकारा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं शिक्षाविद भी मिशन में भाग ले रहे हैं, जिससे इसे शोध और नवाचार के क्षेत्र में मजबूती मिली है।
यह पहल चेक गणराज्य के मानद वाणिज्य दूत मेजर गुनीत चौधरी द्वारा की गई है। मिशन का आयोजन भारत में चेक गणराज्य के दूतावास और चेक गणराज्य के पर्यावरण मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल प्राग, ज़्लीन और ओस्ट्रावा का दौरा करेगा तथा वहां चेक गणराज्य के सरकारी अधिकारियों, कंपनियों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के साथ विचार-विमर्श करेगा। चर्चा में तकनीकी सहयोग, संयुक्त अनुसंधान, पायलट परियोजनाओं, संस्थागत साझेदारी, निवेश और व्यावसायिक सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस मिशन से जल प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन और सर्कुलर इकोनॉमी के क्षेत्र में भारत और चेक गणराज्य के संबंधित पक्षों के बीच व्यावहारिक एवं पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
