पंजाब के नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर झोटा का अंतिम संस्कार आज, 26 दिन बाद पैतृक गांव पहुंचा पार्थिव शरीर

13 अक्टूबर को मानसा के एक मेडिकल स्टोर पर हुई गोलीबारी में झोटा की मौत हो गई थी। वह नशे के खिलाफ अभियान चलाते थे। घटना के दिन वह एक बुजुर्ग को कथित तौर पर नशीली दवाइयां बेचे जाने का विरोध कर रहे थे और इस दौरान फेसबुक लाइव भी कर रहे थे। इसी दौरान मेडिकल स्टोर के मालिक अश्विनी कुमार ने उन पर गोली चला दी। इस घटना में झोटा के चार साथी भी घायल हुए थे। पुलिस ने मुख्य आरोपी सहित अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था।

झोटा की हत्या के बाद उनके परिवार और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इंसाफ की मांग को लेकर मानसा में धरना शुरू कर दिया था। परिवार की मांग थी कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक गौरव यादव जिम्मेदारी लें। इसके अलावा मामले की जांच सीबीआई से कराने, संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए युवाओं को रिहा करने की मांग भी उठाई गई थी।

करीब 22 दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद 4 नवंबर को पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां सहित सरकारी प्रतिनिधियों के साथ परिवार और एक्शन कमेटी की बैठक हुई। इसमें सरकार ने परिवार को 2 करोड़ रुपये मुआवजा देने और झोटा की पत्नी को सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया। इसके अलावा झोटा के नाम पर स्मारक प्रतिमा स्थापित करने और ख्याला कलां गांव में प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर का नाम उनके नाम पर रखने की बात भी कही गई। सरकार ने प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए युवाओं को रिहा करने और दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग पर भी सहमति जताई।

इसके बाद परिवार पोस्टमार्टम के लिए तैयार हुआ और झोटा का शव मानसा सिविल अस्पताल की मोर्चरी से PGIMER चंडीगढ़ लाया गया। शव 20 दिनों से अधिक समय तक मोर्चरी में रहने के कारण पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में देरी हुई। डॉक्टरों के बोर्ड ने जरूरी चिकित्सकीय प्रोटोकॉल पूरे करने के बाद शनिवार को पोस्टमार्टम किया और शव परिवार को सौंप दिया।

इस बीच झोटा के पिता भीम सिंह ने मानसा के SSP वैभव चौधरी के तबादले की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, वह भूख हड़ताल करेंगे। वहीं, झोटा की मां अमरजीत कौर ने स्पष्ट किया कि परिवार की मुख्य मांग पंजाब से नशे का कारोबार खत्म करना है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी सरकारी नौकरी या आर्थिक मुआवजे से लाभ लेना नहीं, बल्कि दूसरे युवाओं को नशे से बचाना है।

मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है। पंजाब सरकार ने संबंधित थाने के SHO, DSP और ड्रग इंस्पेक्टर को निलंबित किया है। झोटा की हत्या के बाद मानसा में नशे के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई भी तेज की गई है। प्रशासन ने कुछ केमिस्ट दुकानों के लाइसेंस रद्द और निलंबित किए हैं तथा कई दुकानों को सील किया है।

झोटा के अंतिम संस्कार में सामाजिक संगठनों, किसान संगठनों और राजनीतिक दलों के नेताओं सहित बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। उनके पिता ने युवाओं से अपील की है कि वे नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवन जीने का संकल्प लें।

By Gurpreet Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *