आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में AI के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): आयुष ग्रिड द्वारा तैयार किए गए डिजिटल आधार को आगे बढ़ाते हुए, आयुष मंत्रालय अब आयुर्वेद और व्यापक आयुष क्षेत्र के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अगली प्रमुख तकनीक के रूप में बढ़ावा दे रहा है। मंत्रालय स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान, शिक्षा, सूचना सेवाओं और निवेश सुविधा के क्षेत्रों में एआई के इस्तेमाल की संभावनाओं पर काम कर रहा है। इसके अंतर्गत विशेष एआई अनुप्रयोगों और राष्ट्रीय एआई पहलों के साथ व्यापक सहयोग से एक उभरता हुआ इकोसिस्टम तैयार हो रहा है।

लोगों के लिए एमएआईएसपी चैटबॉट बातचीत के माध्यम से आयुर्वेद सहित आयुष से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है। एआरपी रिसर्च असिस्टेंट एक जनरेटिव एआई आधारित सहायक है। यह आयुष रिसर्च पोर्टल का विस्तार करते हुए शोधकर्ताओं को आयुर्वेद और अन्य आयुष विषयों से संबंधित साहित्य को अधिक प्रभावी ढंग से खोजने और समझने में मदद करता है। ई-एलएमएस चैटबॉट आयुर्वेद और अन्य आयुष शिक्षण संस्थानों के लिए एआई आधारित विद्यार्थी जीवन चक्र प्रबंधन की सुविधा देता है। वहीं ई-चरक चैटबॉट औषधीय पौधों के व्यापार में सहायक के रूप में काम करता है और बातचीत आधारित एआई को आयुर्वेदिक औषध विज्ञान से जुड़े तंत्र से जोड़ता है। योग सारथी योग संबंधी सुझाव देने वाला एआई चैटबॉट है, जबकि निवेश सारथी आयुष क्षेत्र में निवेश के लिए एआई सहायक के रूप में काम करता है। ये सभी चैटबॉट आयुष ग्रिड के डिजिटल पोर्टल से आगे बढ़कर संवादात्मक, कुशल और उपयोगकर्ता-केंद्रित एआई सेवाओं के विस्तार को दर्शाते हैं।

इंडियाएआई इम्पैक्ट समिट 2026 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ साझेदारी में तैयार स्वास्थ्य पर एआई के प्रभाव का केसबुक में आयुष मंत्रालय का एक विशेष उदाहरण शामिल किया गया। इसका शीर्षक “आयुर्वेद के लिए एआई आधारित निर्णय सहायता : रिट्रीवल ऑगमेंटेड जनरेशन दृष्टिकोण” था। वैश्विक स्वास्थ्य एआई केसबुक में आयुर्वेद से जुड़े इस उदाहरण को शामिल किया जाना जनरेटिव एआई और आरएजी तकनीक के माध्यम से प्रमाण-आधारित आयुर्वेदिक ज्ञान को मजबूत करने और पारंपरिक चिकित्सा के व्यापक डिजिटल परिवर्तन की संभावनाओं को रेखांकित करता है।

मंत्रालय इंडियाएआई इनोवेशन चैलेंज में भागीदारी के माध्यम से अपने व्यापक एआई इकोसिस्टम को आगे बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य आयुष क्षेत्र के लिए विशेष रूप से तैयार एआई आधारित समाधान विकसित करना है। प्रमुख उपयोग क्षेत्रों में आवाज आधारित इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड, रोगों के रुझान की पहचान और व्यक्तिगत उपचार सहायता से जुड़े समाधान शामिल हैं। इनका उद्देश्य आयुर्वेद और अन्य आयुष प्रणालियों में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सकीय जानकारी और मरीज-केंद्रित देखभाल को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करना है।

11 जुलाई 2025 को विश्व स्वास्थ्य संगठन, अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ और विश्व बौद्धिक संपदा संगठन ने संयुक्त रूप से “पारंपरिक चिकित्सा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल” शीर्षक से एक तकनीकी रिपोर्ट जारी की थी। इसमें बताया गया है कि एआई पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में किस तरह सहायता कर सकता है। साथ ही, इसमें आयुर्वेद सहित पारंपरिक चिकित्सा में जिम्मेदार, प्रमाण-आधारित और सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर बल दिया गया है।

आयुष मंत्रालय ने इंडियाएआई और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग के साथ सहयोग किया है। इसके अंतर्गत आयुष इकोसिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भाषा तकनीक, डिजिटल स्वास्थ्य और उन्नत कंप्यूटिंग के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने के अवसर तैयार हुए हैं। मंत्रालय से संबंधित सामग्री अब एआई कोश पर भी उपलब्ध है। इससे आयुष और आयुर्वेद के क्षेत्र में एआई अनुसंधान और जानकारी के व्यापक प्रसार में मदद मिलेगी। भाषिणी के साथ सहयोग के माध्यम से आयुष ग्रिड के पोर्टल अब भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में उपलब्ध हैं। इसका इस्तेमाल आयुर्वेद के चिकित्सकों, विद्यार्थियों और लोगों द्वारा किया जाता है। इससे देश की भाषाई विविधता के बीच इन सेवाओं की पहुंच और भागीदारी बढ़ेगी।

एआई सहायकों के साथ-साथ इंडियाएआई और भाषिनी के सहयोग से आयुष इकोसिस्टम कुशल और नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाओं की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान का स्थान तकनीक से लेना नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से इस ज्ञान को मजबूत करना, आपस में जोड़ना और व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराना है, ताकि यह भारत और दुनिया भर के लोगों के लिए अधिक खोज योग्य, प्रमाण-आधारित और सुलभ हो सके।

By Rajeev Sharma

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