शिमला(राजीव शर्मा): हिमाचल प्रदेश सरकार ने 31 जुलाई 2025 तक राज्य में 2,035 सरकारी संस्थानों को डिनोटिफाई किया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के बाद 362 नए सरकारी संस्थान भी खोले गए हैं।
भाजपा विधायकों, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी शामिल थे, के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे संस्थानों को बंद करने का निर्णय लिया गया, जहां पर्याप्त कर्मचारी, जरूरी आधारभूत ढांचा या बेहतर सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं।
सुक्खू ने सदन को बताया कि डिनोटिफाई किए गए संस्थानों में से 123 को बाद में उन्हीं स्थानों पर दोबारा शुरू किया गया। इस आंकड़े को लेकर जयराम ठाकुर ने सरकार से सवाल किया कि यदि इन संस्थानों की जरूरत बाद में महसूस हुई, तो इन्हें पहले बंद करने का निर्णय क्यों लिया गया।
जरूरत के आधार पर खोले जा रहे संस्थान: सुक्खू
मुख्यमंत्री ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी सरकारी संस्थान को खोलने का आधार केवल घोषणा नहीं, बल्कि वहां की वास्तविक जरूरत, उपलब्ध स्टाफ, भवन और लोगों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली विधानसभा चुनाव से पहले कई संस्थान जल्दबाजी में शुरू किए गए थे, लेकिन वहां पर्याप्त शिक्षक या विद्यार्थी तक उपलब्ध नहीं थे। सरकार अब संस्थानों की उपयोगिता और संसाधनों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है।
भाजपा ने लगाए राजनीतिक भेदभाव के आरोप
विपक्षी भाजपा सदस्यों ने सरकार पर डिनोटिफिकेशन की कार्रवाई को राजनीतिक नजरिए से करने का आरोप लगाया। विधायकों ने सवाल उठाया कि कुछ क्षेत्रों में संस्थान खोलने के फैसले लिए गए, जबकि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में इसी तरह की सुविधाओं को बंद कर दिया गया।
भाजपा विधायक हंस राज ने चंबा जिले के चुराह विधानसभा क्षेत्र में सरकारी संस्थानों से जुड़े मुद्दे को भी सदन में उठाया। उन्होंने क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि वहां संस्थानों को लेकर सामान्य मानदंडों के बजाय स्थानीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
चंबा मेडिकल कॉलेज के लिए ₹200 करोड़ का प्रावधान
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार चंबा जिले के विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि चंबा मेडिकल कॉलेज को पूरा करने के लिए ₹200 करोड़ आवंटित किए गए हैं और संस्थान में फैकल्टी को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि सरकारी संस्थानों के विस्तार और संचालन में केवल संख्या बढ़ाना लक्ष्य नहीं है, बल्कि पर्याप्त मानव संसाधन, बुनियादी सुविधाएं और लोगों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।
