नई दिल्ली(गुरप्रीत सिंह): आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा का नाम दिल्ली के वोटर लिस्ट में जोड़ने को लेकर दी गई चुनाव आयोग की दलीलों को खारिज कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने चुनाव आयोग को राघव चड्ढा के फार्म 6 को सार्वजनिक करने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की तरह राघव चड्ढा के फार्म 6 पर आपत्तियां दर्ज कराने का समय दिया जाए। साथ ही पूछा कि क्या अमित शाह के दबाव में ज्ञानेश कुमार ने राघव चड्ढा का नाम बैक डोर से शामिल किया? क्योंकि 1 से 7 सितंबर तक राजेंद्र नगर विधानसभा में आए फार्म 6 में राघव चड्ढा का कहीं नाम नहीं है। जब ड्राफ्ट रोल में 746 वोट हैं और फाइनल रोल अभी आया नहीं है तो राघव चड्ढा का 747वां नंबर कहां से आ गया?
बुधवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर अनुराग ढांडा ने कहा कि मंगलवार को जब हमने तथ्य रखे कि एसआईआर में चुनाव आयोग मनमानी कर रहा है और बिना किसी रिकॉर्ड के बैक डोर से नाम डालने का काम किया गया है। इसके बाद चुनाव आयोग ने अपनी सफाई प्रेस रिलीज जारी की। इसमें भी उसी बात की तस्दीक की है जो हमने कही थी। एक-एक एसओपी और प्रक्रिया, जिसका जिक्र हमने किया था, चुनाव आयोग ने अपनी प्रेस रिलीज में उसी को सही बताया है। लेकिन अगर वह एसओपी और प्रक्रिया सही है, तो राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट में कैसे जुड़ गया, यह चुनाव आयोग अभी तक नहीं बता रहा है।
अनुराग ढांडा ने बताया कि चुनाव आयोग ने अपने प्रेस नोट में कहा है कि 30 जून से 17 अगस्त के बीच एन्युमरेशन फॉर्म भरे जा सकते थे। 31 अगस्त को लिस्ट फ्रीज की गई और फॉर्म 6 भरने वालों पर 31 अगस्त से 30 सितंबर तक आपत्तियां लेकर ईआरओ द्वारा अप्रूवल का समय तय है। चुनाव आयोग के अनुसार सिर्फ फॉर्म 6, फॉर्म 7 और फॉर्म 8, इन तीन तरीकों से ही वोट जोड़ा जा सकता है।
अनुराग ढांडा ने आगे कहा कि इनमें से फॉर्म 8 वोट ट्रांसफर के लिए होता है, जो यहां हो नहीं सकता क्योंकि पंजाब की वोटर लिस्ट से दिल्ली में वोट ट्रांसफर नहीं कराया गया। अगर ट्रांसफर होता तो पंजाब के एसआईआर में उसे शिफ्टेड मार्क करने की जरूरत नहीं पड़ती, वहां से तो वोट सीधे हट ही जाता। दूसरा फॉर्म 7 है, जो नए फॉर्म 6 पर आपत्ति जताने के लिए होता है, इसलिए इसका भी राघव चड्ढा के मामले से कोई संबंध नहीं है। अब बचा फॉर्म 6। अगर राघव चड्ढा ने दिल्ली में फॉर्म 6 भरा है, तो चुनाव आयोग को स्पष्ट करना पड़ेगा कि वह फॉर्म 6 किस तारीख को भरा गया, कब भरा गया और वह फॉर्म 6 कहां है? अनिवार्य नियम के तहत लोगों की आपत्तियों के लिए उसे चुनाव आयोग की वेबसाइट पर कुछ दिनों के लिए क्यों नहीं डाला गया?
अनुराग ढांडा ने कहा कि चुनाव आयोग ने खुद माना है कि ड्राफ्ट रोल में 746 सीरियल नंबर तक ही वोटर शामिल हैं और जब भी फाइनल इलेक्टोरल रोल पब्लिश होगा, उसमें सीरियल नंबर ड्राफ्ट रोल के आगे से शुरू होगा। लेकिन फाइनल रोल तो अभी पब्लिश हुआ ही नहीं है। फाइनल रोल पब्लिश करने की तारीख 4 नवंबर 2026 है, जब सप्लीमेंट्री इलेक्टोरल रोल पब्लिश किया जाएगा और उसमें आगे का सीरियल नंबर जुड़ सकता है। ऐसे में राघव चड्ढा का 747वां सीरियल नंबर अभी कहां से आ गया?
अनुराग ढांडा ने कहा कि अगर चुनाव आयोग फॉर्म 6 का दावा करता है, तो 31 अगस्त के बाद यानी ड्राफ्ट रोल आने के बाद 1 से 7 सितंबर तक भरे गए सभी फॉर्म 6 की लिस्ट हमारे पास मौजूद है। यह चुनाव आयोग के लिए अनिवार्य नियम होता है कि वह नए वोट बनने के आवेदनों की सूची सार्वजनिक करे ताकि किसी को आपत्ति हो तो वह दर्ज करा सके। ये सभी फॉर्म 6 राजेंद्र नगर विधानसभा के हैं और इनमें से किसी में भी राघव चड्ढा का नाम नहीं है।
अनुराग ढांडा ने कहा कि चुनाव आयोग झूठ बोल रहा है कि राघव चड्ढा ने प्रक्रिया के तहत फॉर्म 6 भरकर वोट जुड़वाया है। उनका फॉर्म 6 कब भरा गया, कहां से जुड़वाया गया और आपत्तियों के लिए उसे वेबसाइट पर क्यों नहीं डाला गया? ऐसा लगता है कि सभी प्रक्रियाओं और एसओपी को दरकिनार करके सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का फोन गया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बैक डोर से सीधे राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज करा दिया।
अनुराग ढांडा ने कहा कि चुनाव आयोग को खुली चुनौती है कि राघव चड्ढा का वोट किस फॉर्म को भरकर और किस तरह से दिल्ली की वोटर लिस्ट में जुड़ा, उसे सार्वजनिक किया जाए। राजेंद्र नगर में जितने लोगों ने फॉर्म 6 भरा है, उनके नाम चुनाव आयोग ने सार्वजनिक किए हैं, इसलिए यह कोई व्यक्तिगत जानकारी छुपाने की बात नहीं है। नए वोट पर आपत्तियां लेना और उस पर ईआरओ का फैसला होना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।
अनुराग ढांडा ने कहा कि अगर चुनाव आयोग की नीयत साफ है और यह अमित शाह के कहने पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा बैक डोर से नहीं किया गया है, तो चुनाव आयोग प्रेस रिलीज जारी करके यह स्पष्ट करे कि राघव चड्ढा ने फॉर्म 6 कब भरा। उस फॉर्म 6 को सार्वजनिक किया जाए और उस पर आपत्तियां दर्ज कराने का समय दिया जाए। चुनाव आयोग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वह किसके दबाव में झूठ बोल रहा है और किसके दबाव में राघव चड्ढा की फर्जी वोट एंट्री के सच को छुपाया जा रहा है।
