नई दिल्ली(राजीव शर्मा):भारत सरकार का खान मंत्रालय, बिहार के पटना में 17 अगस्त 2026 को महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी के 8वें चरण पर एक रोड शो और राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण और विकास ट्रस्ट (एनएमईडीटी) पर एक कार्यशाला का आयोजन कर रहा है।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत सरकार में कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे करेंगे। इस अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी और खान मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार भी उपस्थित रहेंगे। बिहार सरकार के खान मंत्रालय, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई), मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (एमईसीएल) के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और संभावित निवेशक इस कार्यक्रम में भाग लेंगे।
8वें चरण में कुल 20 खनिज ब्लॉक शामिल हैं, जिनमें 3 खनन पट्टा और 17 संयुक्त लाइसेंस ब्लॉक हैं। इनमें ग्रेफाइट, दुर्लभ मृदा तत्व (आरईई), दुर्लभ धातु, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, मोलिब्डेनम, टंगस्टन, पोटाश, फॉस्फोराइट और ग्लॉकोनाइट जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज शामिल हैं।
इस रोड शो में संभावित निवेशकों और उद्योग जगत के हितधारकों को प्रस्तावित खनिज ब्लॉकों की खनिज क्षमता, नीलामी की रूपरेखा, बोली प्रक्रिया तथा महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज क्षेत्र में निवेश और भागीदारी के अवसरों की जानकारी दी जाएगी। खनिज ब्लॉकों के संबंध में एमईसीएल, खनिज नीलामी प्रक्रिया और निविदा दस्तावेज के संबंध में एसबीआईकैप्स तथा ई-नीलामी प्रक्रिया के संबंध में एमएसटीसी द्वारा विस्तृत प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
इस कार्यक्रम में कंपोजिट लाइसेंस धारकों के लिए अन्वेषण व्यय की आंशिक प्रतिपूर्ति हेतु एनएमईडीटी योजना पर एक प्रस्तुति भी शामिल होगी, जिसके बाद हितधारकों के साथ बातचीत को सुविधाजनक बनाने और नीलामी प्रक्रिया से संबंधित प्रश्नों के समाधान के लिए एक खुली चर्चा आयोजित की जाएगी।
कार्यक्रम के दूसरे भाग में खनिज अन्वेषण: योजना, क्रियान्वयन और रिपोर्टिंग विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला में भारत की खनिज अन्वेषण क्षमता, राष्ट्रीय भूविज्ञान डेटा भंडार (एनजीडीआर), एनजीडीआर का उपयोग करके अन्वेषण ब्लॉकों की तैयारी और खनिज अन्वेषण रिपोर्ट तैयार करने जैसे विषयों को शामिल किया जाएगा। इसमें भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा तकनीकी सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।
यह पहल खनिज अन्वेषण को बढ़ावा देने, महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज संसाधनों के विकास में तेजी लाने, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और भारत की खनिज सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है। यह उभरती प्रौद्योगिकियों, स्वच्छ ऊर्जा और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक खनिजों के घरेलू अन्वेषण और विकास को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत की व्यापक परिकल्पना का भी समर्थन करती है।
