गुवाहाटी(राजीव शर्मा): असम में बाढ़ की स्थिति मंगलवार को कई जलमग्न इलाकों में पानी घटने के साथ कुछ बेहतर हुई, लेकिन आपदा में दो और लोगों की मौत हो गई, जिससे इस साल मरने वालों की संख्या 87 पहुंच गई। इसके बावजूद राज्य भर में करीब 1.3 लाख लोग अब भी बाढ़ के असर से जूझ रहे हैं।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, ताजा दो मौतें सिवसागर जिले से दर्ज की गईं, जो सबसे अधिक प्रभावित इलाका बना हुआ है। जिले में 55,000 से अधिक लोग अब भी बाढ़ के बाद की स्थिति से प्रभावित हैं, जबकि चराइदेव में लगभग 35,000 और जोरहाट में 20,000 से अधिक लोग प्रभावित हैं।
अधिकारियों ने बताया कि ऊपरी असम के कुछ हिस्सों में रातभर बारिश जारी रही, लेकिन बाढ़ का पानी धीरे-धीरे घट रहा है, जिससे प्रभावित समुदायों को कुछ राहत मिली है।
राहत कार्य जारी हैं। राज्य प्रशासन पांच जिलों में 55 राहत शिविर और वितरण केंद्र चला रहा है, जहां 11,000 से अधिक विस्थापित लोगों को आश्रय, भोजन और अन्य जरूरी सेवाएं दी जा रही हैं। मेडिकल टीमें, पशु चिकित्सा कर्मी और आपदा राहत एजेंसियां भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में तैनात की गई हैं।
बाढ़ से कृषि और बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान हुआ है। 14,230 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि अब भी जलमग्न है, जबकि हजारों घरों, सड़कों, तटबंधों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों ने बताया कि करीब 55,000 पशुधन बह गए हैं, जबकि 35,000 अन्य पशु आपदा से प्रभावित हुए हैं।
इधर, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अरुणाचल प्रदेश और मेघालय के कुछ हिस्सों में आने वाले दिनों में गरज-चमक के साथ अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसका असर असम के सीमावर्ती जिलों पर भी पड़ सकता है, खासकर उन इलाकों में जो इन दोनों राज्यों से लगे हैं।
IMD ने नागालैंड के बड़े हिस्सों के लिए येलो अलर्ट भी जारी किया है और असम के चारा, सिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में भी खराब मौसम की संभावना जताई है। नुमालीगढ़ में धानसिरी नदी अभी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे आशंका है कि नई बारिश से संवेदनशील इलाकों में स्थिति और बिगड़ सकती है।
