पानीपत(राजीव शर्मा): कमजोर मांग, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और लॉजिस्टिक्स खर्च में वृद्धि के कारण पानीपत का टेक्सटाइल और हैंडलूम उद्योग मुश्किल दौर से गुजर रहा है। इससे निर्यात और घरेलू कारोबार, दोनों पर दबाव बढ़ गया है।
भारत के प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में पहचान रखने वाले इस शहर में कुछ क्षेत्रों में कारोबार की मात्रा 50 प्रतिशत तक गिर गई है। उद्योग जगत से जुड़े लोगों के अनुसार, निर्यातक पॉलिएस्टर यार्न की बढ़ती कीमतों, महंगे मालभाड़े और शिपमेंट में देरी को लेकर विशेष रूप से चिंतित हैं।
पानीपत के टेक्सटाइल उद्योग का अनुमानित वार्षिक कारोबार करीब 60,000 करोड़ रुपये है, जिसमें निर्यात का योगदान लगभग 20,000 करोड़ रुपये है। शहर की करीब 450 औद्योगिक इकाइयां विदेशी कारोबार से जुड़ी हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हैंडलूम व पावरलूम उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला की आपूर्ति करती हैं।
शहर के निर्माता रग, कालीन, बाथ मैट और फ्लोर कवरिंग से लेकर बेडशीट, तौलिया, पर्दे, कुशन, कंबल और गद्दे तक तैयार करते हैं। इन उत्पादों के खरीदार परंपरागत रूप से दुनिया के प्रमुख बाजारों में रहे हैं।
हालांकि, पिछले तीन से चार वर्षों से इस क्षेत्र को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद अनिश्चितता बढ़ी, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ा और बाजार का भरोसा कमजोर हुआ।
अमेरिका में टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता के बाद स्थिति और जटिल हो गई। अमेरिका पानीपत के सबसे महत्वपूर्ण निर्यात गंतव्यों में से एक है। अनुमान है कि शहर के करीब 60 प्रतिशत टेक्सटाइल निर्यात का संबंध अमेरिकी बाजार से है। ऐसे में अमेरिकी व्यापार नीति में बदलाव स्थानीय निर्माताओं और निर्यातकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।
हालांकि, निर्यातकों और विदेशी खरीदारों ने कारोबार को जारी रखने की कोशिश की, लेकिन इसके बाद ईरान-इजरायल संघर्ष समेत बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने यूरोपीय बाजारों के लिए होने वाली शिपमेंट में अतिरिक्त मुश्किलें पैदा कर दीं।
खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए व्यवधान ने चिंता की एक और वजह बढ़ा दी है। मालभाड़े की ऊंची दरें, लंबा ट्रांजिट समय और शिपिंग मार्गों को लेकर अनिश्चितता कारोबार की लागत बढ़ा रही है। वहीं, उपभोक्ता मांग कमजोर होने के कारण निर्माताओं के लिए अतिरिक्त खर्च का बोझ खरीदारों पर डालना मुश्किल हो रहा है।
इसका असर अब केवल निर्यातकों तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मुश्किलों और बाजार के भरोसे में कमी के बीच पानीपत का घरेलू टेक्सटाइल कारोबार भी दबाव में आ गया है।
उद्योग जगत के लोगों को अब वैश्विक व्यापार मार्गों में अधिक स्थिरता, कच्चे माल और मालभाड़े की लागत में कमी तथा मांग में सुधार की उम्मीद है, ताकि टेक्सटाइल सिटी पानीपत फिर से रफ्तार पकड़ सके।
