नई दिल्ली (राजीव शर्मा): सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के आरोपी आशीष मिश्रा को मौजूदा जमानत शर्तों के अधीन अपने परिवार और करीबी रिश्तेदारों के साथ दिवाली मनाने के लिए उत्तर प्रदेश में अपने गृह नगर जाने की अनुमति दे दी।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे मिश्रा फिलहाल जमानत पर बाहर हैं, लेकिन उन पर लखीमपुर खीरी में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा हुआ था। अदालत ने इस बात पर जोर देते हुए कि मुकदमे में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए, इस अस्थायी दौरे की अनुमति दे दी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने मिश्रा को 16 अक्टूबर को लौटने का निर्देश दिया। यह आदेश मिश्रा का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे द्वारा दौरे की अनुमति मांगे जाने के बाद आया।
पीठ ने टिप्पणी की कि कार्यवाही में न तो बिना उचित विचार के जल्दबाजी की जानी चाहिए और न ही इसे अत्यधिक अवधि के लिए लंबित रहने देना चाहिए। इसने कहा कि अभियोजन पक्ष को समय पर प्रगति और निष्पक्ष मुकदमे के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।
मुकदमे की प्रगति और कानूनी टीम में बदलाव
सुनवाई के दौरान, उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को सूचित किया कि मामले की सुनवाई करने वाले जज का तबादला इलाहाबाद उच्च अदालत द्वारा कर दिया गया है। पीठ को यह भी बताया गया कि कार्यवाही का संचालन करने के लिए एक नए विशेष लोक अभियोजक (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) की नियुक्ति की गई है।
अदालत के समक्ष रखी गई जानकारी के अनुसार, 131 गवाहों में से 90 से पूछताछ की जा चुकी है। पीड़ितों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पीठ को बताया कि वे मामले में हुए घटनाक्रम से संतुष्ट हैं।
न्यायिक अधिकारी लोकेश राय ने 14 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी के जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाल लिया, और उन्होंने शिव कुमार सिंह का स्थान लिया, जो इस मामले की सुनवाई कर रहे थे।
राज्य सरकार ने अतिरिक्त जिला सरकारी वकील के रूप में सेवा दे रहे प्रभाकर ब्रह्म मिश्रा की जगह सरकारी वकील कपिल कटियार को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया है।
इससे पहले, 5 अक्टूबर को, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से पीठासीन अधिकारी के खिलाफ आरोपों पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए कहा था, जिसमें यह दावा भी शामिल था कि उन्होंने कई मामलों को अपने पास स्थानांतरित कर लिया था और आरोपियों को बरी कर दिया था।
अक्टूबर 2021 का है मामला
यह हिंसा 3 अक्टूबर, 2021 को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के खिलाफ किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में हुई थी।
इस घटना में आठ लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें चार किसान भी शामिल थे, जिन्हें कथित तौर पर एक एसयूवी ने कुचल दिया था। इस हिंसा के बाद गुस्से में आए किसानों द्वारा वाहन के ड्राइवर और दो बीजेपी कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या (लिंचिंग) कर दी गई थी। एक पत्रकार की भी जान चली गई थी।
दिसंबर 2023 में, ट्रायल कोर्ट ने मुख्य मामले में मुकदमे को आगे बढ़ाते हुए मिश्रा और 12 अन्य के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश सहित आरोप तय किए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त को मिश्रा की जमानत शर्तों में और ढील देने से इनकार कर दिया था। नवीनतम आदेश केवल निर्दिष्ट दिवाली दौरे की अनुमति देता है और उनकी जमानत पर लगाई गई अन्य शर्तों में कोई बदलाव नहीं करता है।
