टोरंटो(राजीव शर्मा): ‘साइन्ड टू गॉड’ टूर में संगीत, तकनीक और भावुक क्षण एक साथ देखने को मिले। इस शाम में कई जाने-माने कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की विरासत केंद्र में रही। शो में दिवंगत गायक का होलोग्राफिक रूप भी प्रस्तुत किया गया।
कॉन्सर्ट में संगीत जगत के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकार शामिल हुए, जिनमें एपी ढिल्लों, शिंदा कहलोन, सनी माल्टन, बोहेमिया, राजा कुमारी और स्टील बैंजरज़ शामिल थे। उनकी प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में संगीत की विविधता जोड़ी, जबकि पूरे शो के दौरान मूसेवाला की मौजूदगी का एहसास बना रहा।
होलोग्राम बना आकर्षण का केंद्र
शाम के प्रमुख आकर्षणों में मूसेवाला का होलोग्राफिक रूप शामिल था, जिसके जरिए दर्शकों को मंच पर गायक की डिजिटल प्रस्तुति देखने का अवसर मिला। टोरंटो में ‘साइन्ड टू गॉड’ वर्ल्ड टूर का पहला शो 9 अक्टूबर को स्कोटियाबैंक एरीना में हुआ।
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इस तकनीक ने प्रशंसकों को ऐसे कलाकार से दृश्य रूप में जुड़ने का मौका दिया, जिसका संगीत दुनियाभर के पंजाबी श्रोताओं के बीच लोकप्रिय है। मई 2022 में निधन के बाद भी उनकी खास शैली, दमदार गायकी और पहचानी जाने वाली मंचीय छवि उनकी लोकप्रियता का अहम हिस्सा बनी हुई है।
कॉन्सर्ट में केवल अलग-अलग कलाकारों की प्रस्तुतियों पर ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि सभी कलाकारों को एक साझा विषय के तहत प्रस्तुत किया गया—पंजाबी संगीत और उसके अंतरराष्ट्रीय श्रोताओं पर मूसेवाला का निरंतर प्रभाव।
मूसेवाला के माता-पिता का भावुक पल
कार्यक्रम का एक और व्यक्तिगत और भावुक पहलू उस समय सामने आया, जब मूसेवाला के माता-पिता बलकौर सिंह और चरण कौर अपने छोटे बेटे के साथ मंच पर आए, जिसे प्यार से ‘छोटा सिद्धू’ कहा जाता है।
उनकी मौजूदगी ने संगीत श्रद्धांजलि को उस परिवार से जोड़ा, जो गायक की सार्वजनिक विरासत के पीछे है। कई दर्शकों के लिए यह पल उनके काम का उत्सव मनाने के साथ-साथ परिवार के निजी दुख की याद भी लेकर आया।
बलकौर सिंह ने अपने बेटे के मशहूर ‘थापी’ वाले अंदाज को दोहराया, जो मूसेवाला की पहचान और सार्वजनिक प्रस्तुतियों से गहराई से जुड़ा था। चरण कौर ने भी माइक के जरिए दर्शकों को संबोधित किया और कार्यक्रम का एक यादगार क्षण जोड़ा।
पंजाबी संगीत का सितारों से सजा मंच
एपी ढिल्लों, बोहेमिया और सनी माल्टन जैसे कलाकारों की भागीदारी ने कार्यक्रम को व्यापक संगीत अपील दी। इस प्रस्तुति में पंजाबी और अंतरराष्ट्रीय संगीत की अलग-अलग शैलियों तथा पीढ़ियों से जुड़े कलाकार एक साथ आए।
इन कलाकारों की मौजूदगी ने भारत से बाहर, खासकर कनाडा और अन्य देशों में बसे बड़े पंजाबी समुदायों के बीच पंजाबी संगीत की पहुंच को भी दर्शाया।
लाइव प्रस्तुतियों और होलोग्राफिक तकनीक के मेल से ऐसा मंचीय अनुभव बना, जिसमें आधुनिक प्रोडक्शन के साथ ऐसे कलाकार को श्रद्धांजलि दी गई, जिसका रिकॉर्ड किया हुआ संगीत आज भी श्रोताओं को आकर्षित करता है।
मंच से आगे भी कायम विरासत
मूसेवाला का प्रभाव उनके गीतों से आगे उनकी विशिष्ट कलात्मक पहचान, गीत-लेखन के अंदाज और प्रशंसकों के साथ उनके जुड़ाव तक फैला हुआ है। उनके निधन के बाद भी उनका संगीत व्यापक रूप से सुना जाता रहा है, जिससे आधुनिक पंजाबी संगीत पर चर्चा में उनका नाम प्रमुख बना हुआ है।
‘साइन्ड टू गॉड’ टूर ने प्रस्तुतियों, डिजिटल प्रस्तुति और उनके परिवार की मौजूदगी के माध्यम से इन पहलुओं को एक साथ जोड़ा।
दर्शकों के लिए यह शाम केवल लोकप्रिय कलाकारों का जमावड़ा नहीं थी। यह ऐसे गायक के संगीत और सार्वजनिक व्यक्तित्व को फिर से याद करने का अवसर भी थी, जिसका असर दुनियाभर के पंजाबी समुदायों में अब भी महसूस किया जाता है।
