राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन का उद्घाटन भाषण, सदन की कार्यवाही को दी नई दिशा

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):राज्यसभा महोदय: माननीय सदस्यों, मैं सदन और अपनी ओर से सभी नए सदस्यों का स्वागत करता हूँ। राज्यसभा के 271वें सत्र के प्रारंभ में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।

इस सदन में सार्थक विचार-विमर्श की गौरवशाली परंपरा रही है और मुझे विश्वास है कि यह सत्र भी इस परंपरा को कायम रखेगा। हमारे सामने 19 बैठकें हैं और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर बहस और निर्णय लेने के लिए इस बहुमूल्य समय का सदुपयोग करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

माननीय सदस्यों, इस सत्र से सचिवालय ने सदस्यों की सीटों पर स्थित मल्टीमीडिया उपकरणों के माध्यम से नौ भाषाओं में कार्यवाही का लाइव एआई-आधारित समवर्ती अनुवाद आरंभ किया है। यह सुविधा धीरे-धीरे सभी बाईस अनुसूचित भाषाओं तक विस्तारित की जाएगी। सदस्यों से अनुरोध है कि वे इसके और सुधार के लिए अपने सुझाव दें।

इस सत्र में महत्वपूर्ण विधायी और विचार-विमर्श संबंधी कार्यसूची है। मैं सदस्यों से आग्रह करता हूं कि वे कार्यसूची के समयबद्ध निपटान पर ध्यान केंद्रित रखें, क्योंकि प्रत्येक व्यवधान से राष्ट्र और हमारे द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने वाले लोगों को प्रभावित करने वाले मामलों पर चर्चा में विलंब होता है।

मैं सदन के सभी सदस्यों से इस प्रतिष्ठित संस्था की गरिमा, अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की अपील करता हूँ। यद्यपि मतभेद संसदीय लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं, फिर भी उन्हें सदन की पवित्रता को बनाए रखने वाले तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए। सदन के कामकाज में व्यवधान उत्पन्न करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

इन्हीं शब्दों के साथ, मैं आप सभी को एक सफल, रचनात्मक और उद्देश्यपूर्ण सत्र की शुभकामनाएं देता हूं।

By Rajeev Sharma

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