नई दिल्ली(राजीव शर्मा): रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ और समन्वित कार्रवाई करने का आग्रह किया है। उन्होंने जोर दिया कि देशों को इस खतरे के प्रति चयनात्मक रुख नहीं अपनाना चाहिए। ताजिकिस्तान के दुशांबे में आयोजित एक क्षेत्रीय बैठक में उनके ये बयान आए, जिसमें पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार भी शामिल थे।
एससीओ की सरकार प्रमुखों की परिषद की 25वीं बैठक में बोलते हुए सिंह ने कहा कि आतंकवाद न केवल सुरक्षा, बल्कि आर्थिक प्रगति और सामाजिक स्थिरता के लिए भी गंभीर चुनौती है। उन्होंने बताया कि आतंकी गतिविधियां व्यापार के प्रति विश्वास को कमजोर करती हैं, निवेश को हतोत्साहित करती हैं, व्यापार में बाधा डालती हैं और युवाओं से अवसर छीन लेती हैं।
सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकी नेटवर्क के हर हिस्से के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, जिसमें वे लोग भी शामिल हैं जो चरमपंथी समूहों को वित्तीय सहायता, लॉजिस्टिक समर्थन या सुरक्षित शरण देते हैं। उन्होंने जोर दिया कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक विचार से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
भारत ने मजबूत क्षेत्रीय सहयोग के लिए दिया जोर
रक्षा मंत्री ने एससीओ देशों से अपनी साझा प्रतिबद्धताओं को व्यावहारिक कदमों में बदलने का आग्रह किया, विशेष रूप से उस समय जब भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंताओं के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता का सामना कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में दिए गए पिछले बयानों का उल्लेख करते हुए सिंह ने सुरक्षा, संपर्क और आर्थिक अवसरों को साथ-साथ आगे बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन को संप्रभु समानता, पारस्परिक सम्मान और सदस्य देशों के बीच सहमति के सिद्धांतों का सम्मान करते हुए प्रभावी बना रहना चाहिए।
आर्थिक सहयोग पर सिंह ने वर्ष 2026–2030 के लिए बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम हेतु प्रस्तावित कार्य योजना का समर्थन किया। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्रीय जुड़ाव को मजबूत करना और प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करना है।
संपर्क परियोजनाओं में राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान जरूरी
सिंह ने भारत के उन परिवहन और व्यापार मार्गों के समर्थन को रेखांकित किया, जो मध्य एशिया और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच पहुंच सुधार सकते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा और चाबहार बंदरगाह को क्षेत्रीय संपर्क के महत्वपूर्ण घटक बताया।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे का विकास परामर्श और हर देश की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित होना चाहिए। मंत्री के अनुसार, इन सिद्धांतों की अनदेखी करने वाली संपर्क पहलें स्थायी लाभ देने में असफल रहेंगी।
उन्होंने सीमा-पार व्यापार को अधिक सक्षम बनाने के लिए व्यावहारिक सुधारों का भी आह्वान किया। उनके अनुसार, सरलीकृत सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, डिजिटल दस्तावेजीकरण और बेहतर लॉजिस्टिक्स व्यवस्था व्यापार की लागत घटा सकती हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी ढंग से व्यापार करने में मदद कर सकती हैं।
डिजिटल बुनियादी ढांचा और युवाओं के अवसरों पर ध्यान
भारत के विकास अनुभव को साझा करते हुए सिंह ने देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम को तकनीक के माध्यम से वित्तीय समावेशन और सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार के उदाहरण बताया।
उन्होंने जोर दिया कि क्षेत्रीय आर्थिक प्रगति का मूल्यांकन आम लोगों पर इसके प्रभाव से होना चाहिए, जिसमें युवाओं को उपलब्ध अवसर, उद्यमियों के लिए नए बाजारों तक पहुंच और किसानों तथा छोटे व्यवसायों द्वारा उपयोगी तकनीकों को अपनाना शामिल है।
सिंह के बयानों ने सुरक्षा सहयोग के साथ आर्थिक विकास को भी महत्व दिया, जिसमें यह सुनिश्चित करने पर बल दिया गया कि क्षेत्रीय साझेदारियां समुदायों के लिए ठोस लाभ लाएं।
एससीओ सदस्यों ने आर्थिक सहयोग रोडमैप को मंजूरी दी
बैठक में व्यापार, परिवहन, वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास में चल रहे सहयोग की भी समीक्षा की गई। प्रतिनिधिमंडलों ने अपनी चर्चाओं के परिणामों को शामिल करते हुए एक संयुक्त संचार-पत्र अपनाया।
निर्णयों में वर्ष 2027 के लिए एससीओ बजट, वित्तीय एवं प्रशासनिक मामले और वर्ष 2026–2030 के बहुपक्षीय व्यापार तथा आर्थिक सहयोग को कवर करने वाली कार्य योजना शामिल थी।
सभा में ताशकंद में यूनिवर्सल सेंटर और दुशांबे में एंटी-ड्रग सेंटर को स्थायी एससीओ निकायों के रूप में स्थापित करने के कदमों का भी स्वागत किया गया, जिससे सहयोग हेतु संगठन के संस्थागत ढांचे को मजबूती मिलेगी।
बैठक में भारत का संदेश आतंकवाद के प्रति एकजुट प्रतिक्रिया की अपील और मजबूत आर्थिक संबंधों के समर्थन का मिश्रण था, बशर्ते ऐसा सहयोग राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करे और पूरे क्षेत्र में सार्थक अवसर प्रदान करे।
